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सरकारी अस्पताल की रिपोर्ट पर भरोसा करना पड़ा महंगा, 26 डॉक्टरों समेत 71 स्टाफ खतरे में

Wed, 17 Jun 2020 10:49 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Wed, 17 Jun 2020 10:49 AM IST
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Reports of government hospital Kapurthala Negative, PGI Chandigarh Doctors and Staff in Danger
प्रदर्शन करते सफाई कर्मचारी - फोटो : अमर उजाला
पंजाब के सरकारी अस्पताल की कोरोना रिपोर्ट पर भरोसा करना पीजीआई को भारी पड़ गया। कपूरथला (पंजाब) से रेफर होकर आई एक मरीज की कोरोना रिपोर्ट वहां के सरकारी अस्पताल ने निगेटिव दी थी। जिस पर भरोसा करके पीजीआई के डॉक्टरों ने बिना एहतियात मरीज का इलाज शुरू कर दिया।
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पीजीआई के एडवांस कार्डियक सेंटर में तीन दिन तक भर्ती रहने के बाद महिला में कोरोना की पुष्टि से हड़कंप मच गया और आनन-फानन में मरीज के संपर्क में आने वाले पीजीआई के 26 डॉक्टरों समेत 71 कर्मचारियों को क्वारंटीन कर दिया गया। अब पंजाब के सरकारी अस्पताल की लापरवाही से पीजीआई के डॉक्टरों व स्टाफ पर कोरोना का खतरा मंडरा रहा है।
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उधर, मरीज की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद तत्काल उसे कोरोना डेडीकेटेड हॉस्पिटल में शिफ्ट कर दिया गया है। पीजीआई प्रशासन के अनुसार, 71 स्टाफ में हाई रिस्क केटेगरी में शामिल 32 लोगों को अलग कर दिया गया है। इन सबका 7 से 10 दिनों के भीतर कोरोना टेस्ट कराया जाएगा। वहीं, क्वारंटीन किए गए अन्य डॉक्टर व कर्मचारियों पर भी नजर रखी जा रही है। उनमें लक्षण दिखने पर जांच की जाएगी।
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कपूरथला की 42 वर्षीय महिला को 12 जून को गंभीर स्थिति में पीजीआई की इमरजेंसी में लाया गया था। उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए और कपूरथला के सरकारी अस्पताल की कोरोना जांच रिपोर्ट निगेटिव होने पर उसे तत्काल पीजीआई के एडवांस कार्डियक सेंटर में शिफ्ट कर दिया गया। उसमें सांस लेने में तकलीफ के साथ ही कोरोना के अन्य लक्षण दिखाई दे रहे थे।

जिसे गंभीरता से लेते हुए कर्मचारियों ने पीजीआई प्रशासन से उसकी दोबारा कोरोना जांच कराने की डिमांड की गई। 14 जून को कोरोना टेस्ट के लिए महिला का नमूना लिया गया। 15 जून की दोपहर 2.30 बजे आई रिपोर्ट में कोरोना की पुष्टि हुई। इसके बाद उसे तत्काल कोविड-19 वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। इस दौरान एडवांस कार्डियक सेंटर ड्यूटी कर रहे हैं 26 डॉक्टरों और 45 से ज्यादा अन्य स्टाफ उसके संपर्क में आ चुका था।

कार्डियक सेंटर में पूरे दिन हंगामा

महिला के पॉजिटिव होने की जानकारी के बाद कार्डियक सेंटर में ड्यूटी कर रहे लगभग दो दर्जन से ज्यादा हॉस्पिटल अटेंडेंट और सफाई कर्मचारी मंगलवार सुबह से सेंटर के सेकंड फ्लोर पर एकत्र होकर खुद को क्वारंटीन करने की मांग करने लगे जबकि पीजीआई प्रशासन का कहना था कि उन्हें संक्रमण का कोई खतरा नहीं है। पीजीआई कॉन्ट्रेक्ट वर्कर यूनियन के अध्यक्ष संजीव सफाई कर्मचारियों के साथ सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक अपनी मांग को लेकर वहीं बैठे रहे।

उनका कहना था कि हॉस्पिटल अटेंडेंट और सफाई कर्मचारी उस मरीज के ज्यादा नजदीक थे। उन्होंने बिना ग्लव्ज के मरीज की गंदगी साफ की। सेंटर में इलाज के दौरान उस मरीज ने खून की उल्टियां तक की थीं इसलिए डॉक्टरों से ज्यादा हॉस्पिटल अटेंडेंट और सफाई कर्मचारियों पर संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है। सुरक्षा की दृष्टि से सबसे पहले उन्हें क्वारंटीन किया जाना चाहिए। उनकी मांग को देखते हुए पीजीआई प्रशासन ने सफाई कर्मचारियों को भी देर शाम क्वारंटीन कर दिया।

इन पर मंडरा रहा कोरोना का खतरा
मरीज के संपर्क में आने से पीजीआई एडवांस कार्डियक सेंटर के डॉक्टर, नर्सिंग ऑफिसर, टेक्नीशियन, सिक्योरिटी गार्ड, सेनेटरी अटेंडेंट, हॉस्पिटल अटेंडेंट, लैब अटेंडेंट और सफाई कर्मचारियों पर कोरोना का खतरा मंडरा रहा है। इतना ही नहीं चिह्नित किए गए 71 लोगों के संपर्क में आए उनके परिवार के सदस्य भी कोरोना संक्रमण की जद में आ चुके हैं। इन लोगों को पीजीआई में क्वारंटीन कर अगले 7 दिन तक उनमें कोरोना के लक्षण आने का इंतजार किया जाएगा। उसके बाद भी उनकी जांच होगी। अगर 7 दिनों के अंदर कोई लक्षण दिखाई नहीं दिया तो वह सभी डिस्चार्ज कर दिए जाएंगे।

मरीज को कपूरथला से पीजीआई रेफर करने से पहले की वहां के सरकारी अस्पताल की कोरोना टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव थी। उस रिपोर्ट के आधार पर ही पीजीआई में मरीज का कोरोना टेस्ट नहीं किया गया लेकिन तीन दिनों में ही उसमें कोरोना के लक्षण सामने आने लगे। पीजीआई की टेस्ट में कोरोना की पुष्टि होते ही उसे कोविड वार्ड में शिफ्ट कर उसके संपर्क में आए सभी लोगों को क्वारंटीन कर दिया गया है।
- डॉ. अशोक कुमार, पीजीआई प्रवक्ता
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