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Panchkula News: स्टाफ बढ़ाने का रीमाइंडर फाइलों में अटका, एमसीएच में बढ़ता गया प्रसूताओं का दबाव

Fri, 07 Aug 2026 02:00 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 07 Aug 2026 02:00 AM IST
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Reminder to increase staff stuck in red tape; pressure from expectant mothers mounts at MCH.
गायनी वार्ड शिफ्टिंग से पहले ही भेजी थी अतिरिक्त डॉक्टरों की मांग
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कमी के बीच रोज 600 मरीजों की ओपीडी और ऑपरेशन का बोझ; तीन प्रसूताओं की मौत के बाद जांच तेज
डीजीएचएस को कई बार भेजा गया भर्ती प्रस्ताव अब भी लंबित
केवल एक गायनी विशेषज्ञ समेत पांच डॉक्टरों पर पूरा विभाग निर्भर
पीएमओ और सीएमओ ने तीन मातृ मृत्यु मामलों की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंपी
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। मदर एंड चाइल्ड केयर (एमसीएच) अस्पताल में गायनी वार्ड शिफ्ट होने से पहले ही स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टरों और स्टाफ की कमी को लेकर डीजीएचएस को रीमाइंडर भेजकर अतिरिक्त नियुक्तियों की मांग की थी, लेकिन प्रस्ताव मंजूरी का इंतजार करता रहा और इधर मरीजों का दबाव लगातार बढ़ता गया। हालात यह हैं कि स्टाफ की कमी के बीच विभाग रोजाना करीब 600 मरीजों की ओपीडी, भर्ती मरीजों की देखरेख और ऑपरेशन का बोझ उठा रहा है। इसी बीच बीते दिनों तीन प्रसूताओं और एक नवजात की मौत के मामलों ने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच प्रक्रिया तेज कर दी है।
सूत्रों के अनुसार एमसीएच बिल्डिंग में गायनी सेवाएं स्थानांतरित करने से पहले ही विभाग ने गायनी स्पेशलिस्ट, सीनियर रेजिडेंट, पीडियाट्रिक विशेषज्ञों और स्टाफ नर्सों की अतिरिक्त तैनाती के लिए प्रस्ताव भेजा था। बाद में मरीजों की संख्या बढ़ने पर तीन बार रीमाइंडर भी भेजे गए, लेकिन अब तक मंजूरी नहीं मिल सकी। विभाग ने गायनी और पीडियाट्रिक सेवाओं के लिए 35 अतिरिक्त डॉक्टरों की मांग रखी हुई है।
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वर्तमान में पूरे विभाग में केवल एक गायनी स्पेशलिस्ट, तीन रेगुलर मेडिकल ऑफिसर और दो कंसल्टेंट तैनात हैं। इनके साथ 22 डीएनबी डॉक्टर सेवाएं दे रहे हैं। यही टीम ओपीडी, लेबर रूम, ऑपरेशन, वार्ड प्रबंधन, हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की निगरानी और आपातकालीन मामलों को संभाल रही है। अधिकारियों का कहना है कि डीएनबी डॉक्टर प्रशिक्षणरत हैं और सेवाओं में सहयोग कर रहे हैं, लेकिन गंभीर और जटिल मामलों के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी लगातार महसूस की जा रही है।
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एमसीएच में संचालित महिला क्लीनिक का अतिरिक्त भार भी एकमात्र गायनी विशेषज्ञ पर है। यहां महिलाओं को कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों को लेकर परामर्श दिया जाता है। इसके कारण नियमित ओपीडी और विशेष क्लीनिक दोनों का दबाव सीमित विशेषज्ञ स्टाफ पर आ गया है।
उधर, बीते 28 दिनों में हुई तीन मातृ मृत्यु और एक नवजात की मौत के मामलों को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने अलग-अलग स्तर पर जांच शुरू कर रखी है। विभागीय रिव्यू में एक महिला की मौत पोस्टपार्टम हेमरेज (पीपीएच), दूसरी की हृदय रोग और तीसरी की ब्रेन डिजीज के कारण बताई गई है। वहीं नवजात की मौत का कारण हृदय संबंधी बीमारी सामने आया है।
परिजनों की शिकायतों के बाद पीएमओ कार्यालय ने भी अलग से जांच शुरू की है। सभी मामलों का रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। सीएमओ और पीएमओ स्तर से रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। जांच में यदि किसी स्तर पर लापरवाही या चूक सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

पीएमओ डॉ. आरएस चौहान ने कहा कि विभाग ने अतिरिक्त विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति के लिए कई बार प्रस्ताव भेजा है। एमसीएच में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, इसलिए स्टाफ बढ़ाना जरूरी है। वहीं मातृ मृत्यु मामलों की जांच भी जारी है और सभी रिकॉर्ड की समीक्षा की जा रही है।
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