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हरियाणा : पीपीपी के डाटा का नियमित रूप से होगा सुरक्षा ऑडिट
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चंडीगढ़। हरियाणा परिवार पहचान प्राधिकरण के डाटा से छेड़छाड़ आसान नहीं होगी। सरकार ने पैनल में शामिल एजेंसियों की मदद से डाटा का नियमित सुरक्षा ऑडिट कराने का निर्णय लिया है। डाटा की निगरानी के साथ ही सुरक्षा के लिए बैकअप बनाए जाएंगे। अभी तक परिवार पहचान पत्र के तहत 67 लाख से अधिक परिवार पंजीकृत हो चुके हैं।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने वीरवार को यह जानकारी दी। वह यहां हरियाणा परिवार पहचान प्राधिकरण (एचपीपीए) की चौथी बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि परिवार पहचान पत्र के तहत सत्यापन के क्षेत्र को बढ़ाने के साथ-साथ डाटा की सुरक्षा बनाए रखना परिवार पहचान पत्र के साथ 43 विभागों की 443 सेवाओं और योजनाओं को एकीकृत किया गया है, 120 अन्य सेवाओं व योजनाओं को इसके साथ जोड़ने पर विचार किया जा रहा है।
पीपीपी के जरिये सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना लोगों को नहीं करना पड़ेगा। अब नागरिकों को जाति प्रमाण पत्र, पीडीएस सेवाएं, आयुष्मान भारत और वृद्धावस्था सम्मान भत्ता जैसी सेवाओं के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते, ना ही कोई दस्तावेज जमा करवाना होता है। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर योजनाओं एवं सेवाओं से संबंधित एक दिवसीय सेमिनार और लोगों की आशंकाओं एवं संदेह को दूर करने के लिए सत्र आयोजित किये जाने चाहिए ताकि अधिक से अधिक लोगों को सरकार की कल्याणकारी नीतियों से जोड़ा जा सके।
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मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने वीरवार को यह जानकारी दी। वह यहां हरियाणा परिवार पहचान प्राधिकरण (एचपीपीए) की चौथी बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि परिवार पहचान पत्र के तहत सत्यापन के क्षेत्र को बढ़ाने के साथ-साथ डाटा की सुरक्षा बनाए रखना परिवार पहचान पत्र के साथ 43 विभागों की 443 सेवाओं और योजनाओं को एकीकृत किया गया है, 120 अन्य सेवाओं व योजनाओं को इसके साथ जोड़ने पर विचार किया जा रहा है।
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पीपीपी के जरिये सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना लोगों को नहीं करना पड़ेगा। अब नागरिकों को जाति प्रमाण पत्र, पीडीएस सेवाएं, आयुष्मान भारत और वृद्धावस्था सम्मान भत्ता जैसी सेवाओं के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते, ना ही कोई दस्तावेज जमा करवाना होता है। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर योजनाओं एवं सेवाओं से संबंधित एक दिवसीय सेमिनार और लोगों की आशंकाओं एवं संदेह को दूर करने के लिए सत्र आयोजित किये जाने चाहिए ताकि अधिक से अधिक लोगों को सरकार की कल्याणकारी नीतियों से जोड़ा जा सके।
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