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Panchkula News: 32.25 लाख की साइबर ठगी के मामले में आरोपी को नियमित जमानत
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पंचकूला। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ. हिमांशु सिंह की अदालत ने 32.25 लाख की साइबर ठगी के मामले में आरोपी रोहित शर्मा को नियमित जमानत दी है। रोहित उत्तर प्रदेश के एटा जिले के अलीगंज का रहने वाला है। अदालत ने कहा कि आरोपी 12 अगस्त 2025 से न्यायिक हिरासत में है। जांच पूरी हो चुकी है और चालान अदालत में पेश किया जा चुका है। ऐसे में आरोपी को और अधिक समय तक जेल में नहीं रखा जा सकता।
यह था मामला
मामला साइबर ठगी से जुड़ा हुआ है। अमरावती एन्क्लेव निवासी शिकायतकर्ता नरेश रोहिला ने साइबर थाना में 23 मई 2024 को शिकायत दी थी कि फेसबुक और व्हाट्सएप के जरिये उससे लेजार्ड एप पर निवेश का झांसा देकर 32.25 लाख रुपये की ठगी की गई। ठगों ने उसे अमेरिकी शेयरों में ट्रेडिंग और आईपीओ निवेश का झांसा दिया था। रकम कई बैंक खातों में जमा करवाई गई। इनमें से एक खाता दत्त ट्रेडर्स नाम से था जो आरोपी रोहित शर्मा के नाम पर निकला।
अभियोजन पक्ष का पक्ष
सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि आरोपी ने अपने बैंक खाता की जानकारी साइबर ठगों को बेच दी थी ताकि धोखाधड़ी से प्राप्त धनराशि उसमें जमा की जा सके। आरोपी के खाते में शिकायतकर्ता से कुल 16.50 लाख रुपये जमा हुए। अभियोजन ने दलील दी कि आरोपी को जमानत देने पर वह दोबारा ऐसे अपराध कर सकता है और जांच को प्रभावित कर सकता है।
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बचाव पक्ष का पक्ष
आरोपी के वकील ने कहा कि रोहित शर्मा को झूठा फंसाया गया है। वह एफआईआर में नामजद नहीं है। उसके खिलाफ सारा मामला दस्तावेजी साक्ष्यों पर आधारित है जो पहले ही जांच एजेंसी के पास हैं। साथ ही सह-आरोपियों जगदीश चंदर, शुभम, भूलेश, सार्थक और रमेश कुमार को पहले ही जमानत मिल चुकी है।
अदालत का फैसला
अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि आरोपी के खिलाफ जांच पूरी हो चुकी है और चालान पेश कर दिया गया है इसलिए उसे जेल में रखना उचित नहीं है। अदालत ने आरोपी को 70,000 रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के जमानती पर रिहा करने का आदेश दिया।
इन शर्तों पर दी जमानत
आरोपी गवाही या साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करेगा। देश से बाहर नहीं जाएगा और पासपोर्ट कोर्ट में जमा करेगा। दो लगातार सुनवाइयों पर अनुपस्थित नहीं रहेगा। मोबाइल नंबर और पता बदलने पर अदालत को तुरंत सूचित करेगा।
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यह था मामला
मामला साइबर ठगी से जुड़ा हुआ है। अमरावती एन्क्लेव निवासी शिकायतकर्ता नरेश रोहिला ने साइबर थाना में 23 मई 2024 को शिकायत दी थी कि फेसबुक और व्हाट्सएप के जरिये उससे लेजार्ड एप पर निवेश का झांसा देकर 32.25 लाख रुपये की ठगी की गई। ठगों ने उसे अमेरिकी शेयरों में ट्रेडिंग और आईपीओ निवेश का झांसा दिया था। रकम कई बैंक खातों में जमा करवाई गई। इनमें से एक खाता दत्त ट्रेडर्स नाम से था जो आरोपी रोहित शर्मा के नाम पर निकला।
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अभियोजन पक्ष का पक्ष
सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि आरोपी ने अपने बैंक खाता की जानकारी साइबर ठगों को बेच दी थी ताकि धोखाधड़ी से प्राप्त धनराशि उसमें जमा की जा सके। आरोपी के खाते में शिकायतकर्ता से कुल 16.50 लाख रुपये जमा हुए। अभियोजन ने दलील दी कि आरोपी को जमानत देने पर वह दोबारा ऐसे अपराध कर सकता है और जांच को प्रभावित कर सकता है।
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बचाव पक्ष का पक्ष
आरोपी के वकील ने कहा कि रोहित शर्मा को झूठा फंसाया गया है। वह एफआईआर में नामजद नहीं है। उसके खिलाफ सारा मामला दस्तावेजी साक्ष्यों पर आधारित है जो पहले ही जांच एजेंसी के पास हैं। साथ ही सह-आरोपियों जगदीश चंदर, शुभम, भूलेश, सार्थक और रमेश कुमार को पहले ही जमानत मिल चुकी है।
अदालत का फैसला
अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि आरोपी के खिलाफ जांच पूरी हो चुकी है और चालान पेश कर दिया गया है इसलिए उसे जेल में रखना उचित नहीं है। अदालत ने आरोपी को 70,000 रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के जमानती पर रिहा करने का आदेश दिया।
इन शर्तों पर दी जमानत
आरोपी गवाही या साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करेगा। देश से बाहर नहीं जाएगा और पासपोर्ट कोर्ट में जमा करेगा। दो लगातार सुनवाइयों पर अनुपस्थित नहीं रहेगा। मोबाइल नंबर और पता बदलने पर अदालत को तुरंत सूचित करेगा।