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कुरुक्षेत्र में चल रही पुलिस भर्ती प्रक्रिया में खामियों का अंबार
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 09 Jul 2016 01:34 AM IST
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हरियाणा पुलिस भर्ती प्रक्रिया अब प्राइवेट सुरक्षा के साये में चलेगी।
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कुरूक्षेत्र (हरियाणा) में हो रही पुलिस भर्ती पर पूर्व आईजी और लोक स्वराज पार्टी के अध्यक्ष रणवीर शर्मा ने हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग पर सवाल उठाया है। रणवीर शर्मा ने आयोग के चेयरमैन को भर्ती पर खुली बहस करने को कहा था, जिसके लिए शुक्रवार का दिन तय किया गया। शर्मा तो बहस के लिये समय पर पहुंच गए पर आयोग के चेयरमैन भारत भूषण भारती से वह नहीं मिल सके। पूर्व आईजी ने पत्रकारों को पुलिस मैनुअल का हवाला देते हुए कहा कि कुरूक्षेत्र में चल रही पुलिस भर्ती में कई अनियमितताएं हैं।
शर्मा ने आरोप लगाया कि पुलिस भर्ती के लिए आवासीय क्षेत्र को चुना गया जबकि हरियाणा में छह ट्रेनिंग सेंटर खाली हैं। जिनमें उम्मीदवारों को जोन के अनुसार टेस्ट के लिए बुलाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पुलिस की भर्ती आमतौर पर अक्तूबर से नवंबर और फरवरी से मार्च के बीच होती है। भर्ती के स्थान पर टेंट लगाए जाने चाहिए, अस्थाई शौचालय बनाने चाहिए और अस्थाई डिस्पेंसरी भी होनी चाहिए इसके साथ ही एक एंबुलेंस भी मौजूद होनी चाहिए।
लेकिन कुरूक्षेत्र में ऐसा कुछ नहीं है। रणवीर ने कहा कि आमतौर पर पुलिस व सेना में भर्ती के समय सबसे पहले जवान की छाती और लंबाई मापी जाती है। फिर मौजूद डाक्टर मेडिकल करते हैं। यह प्रक्रिया पास करने के बाद ही दौड़ लगवाई जाती है। लेकिन इस प्रक्रिया में भी खामियां हैं।
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पुलिस मैनुअल और पुराने सिविल, सैन्य भर्ती रिकार्ड के अनुसार रोजाना एक स्थान पर 500 से 700 जवानों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया जाता है पर कुरूक्षेत्र में रोज 13 से 15 हजार जवानों को इस प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है। प्रायोगिक परीक्षा का समय भी गलत है तथा दौड़ के लिए ट्रैक भी नहीं है। कोई भी अभ्यार्थी यहां दुर्घटना का शिकार होता है तो ऐसी स्थिति में भर्ती बोर्ड के अध्यक्ष और सदस्य सीधे तौर पर इसके लिए जिम्मेदार होंगे।
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शर्मा ने आरोप लगाया कि पुलिस भर्ती के लिए आवासीय क्षेत्र को चुना गया जबकि हरियाणा में छह ट्रेनिंग सेंटर खाली हैं। जिनमें उम्मीदवारों को जोन के अनुसार टेस्ट के लिए बुलाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पुलिस की भर्ती आमतौर पर अक्तूबर से नवंबर और फरवरी से मार्च के बीच होती है। भर्ती के स्थान पर टेंट लगाए जाने चाहिए, अस्थाई शौचालय बनाने चाहिए और अस्थाई डिस्पेंसरी भी होनी चाहिए इसके साथ ही एक एंबुलेंस भी मौजूद होनी चाहिए।
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लेकिन कुरूक्षेत्र में ऐसा कुछ नहीं है। रणवीर ने कहा कि आमतौर पर पुलिस व सेना में भर्ती के समय सबसे पहले जवान की छाती और लंबाई मापी जाती है। फिर मौजूद डाक्टर मेडिकल करते हैं। यह प्रक्रिया पास करने के बाद ही दौड़ लगवाई जाती है। लेकिन इस प्रक्रिया में भी खामियां हैं।
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पुलिस मैनुअल और पुराने सिविल, सैन्य भर्ती रिकार्ड के अनुसार रोजाना एक स्थान पर 500 से 700 जवानों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया जाता है पर कुरूक्षेत्र में रोज 13 से 15 हजार जवानों को इस प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है। प्रायोगिक परीक्षा का समय भी गलत है तथा दौड़ के लिए ट्रैक भी नहीं है। कोई भी अभ्यार्थी यहां दुर्घटना का शिकार होता है तो ऐसी स्थिति में भर्ती बोर्ड के अध्यक्ष और सदस्य सीधे तौर पर इसके लिए जिम्मेदार होंगे।