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Panchkula News: 200 मनोवैज्ञानिकों की भर्ती प्रक्रिया रुकी, इसे आगे न बढ़ाने का पंजाब ने दिलाया विश्वास
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चंडीगढ़। 200 मनोवैज्ञानिकों की भर्ती आउटसोर्सिंग के जरिये करने की प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका पर पंजाब सरकार ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट को सूचित किया कि 29 जनवरी तक भर्ती आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।
यह याचिका उन अभ्यर्थियों ने दाखिल की थी, जिनका चयन 343 मनोवैज्ञानिक पदों के लिए हो चुका था और वे नियुक्ति पत्र का इंतजार कर रहे थे। इसी बीच सरकार ने 18 दिसंबर को अचानक उनकी भर्ती रद्द कर दी और उसी दिन निजी एजेंसी के माध्यम से नई भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी। इन 343 पदों के लिए अप्रैल में विज्ञापन जारी किया गया था और पूरी भर्ती प्रक्रिया बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज द्वारा कराई गई थी। लिखित परीक्षा के बाद दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया चल रही थी, तभी सरकार ने भर्ती रद्द कर दी।
याची पक्ष ने कहा कि आवेदक पूरी मेहनत से परीक्षा पास कर चुके थे और जॉइनिंग से ठीक पहले भर्ती रद्द कर देना उनके साथ अन्याय है। साथ ही यह भी कहा कि नई आउटसोर्स भर्ती में योग्यता मानकों को कमजोर किया गया है। निजी एजेंसी के जरिये भर्ती में कोई लिखित परीक्षा नहीं होती और ऐसे में योग्य युवाओं का शोषण होता है तथा वेतन भी बहुत कम दिया जाता है।
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स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार भर्ती रद्द करने का निर्णय प्रशासनिक कारणों से लिया गया है। साथ ही विश्वविद्यालय को निर्देश दिए गए हैं कि उम्मीदवारों से ली गई आवेदन फीस वापस की जाए। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अगली सुनवाई तक कोई भी नियुक्ति नहीं की जाएगी।
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यह याचिका उन अभ्यर्थियों ने दाखिल की थी, जिनका चयन 343 मनोवैज्ञानिक पदों के लिए हो चुका था और वे नियुक्ति पत्र का इंतजार कर रहे थे। इसी बीच सरकार ने 18 दिसंबर को अचानक उनकी भर्ती रद्द कर दी और उसी दिन निजी एजेंसी के माध्यम से नई भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी। इन 343 पदों के लिए अप्रैल में विज्ञापन जारी किया गया था और पूरी भर्ती प्रक्रिया बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज द्वारा कराई गई थी। लिखित परीक्षा के बाद दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया चल रही थी, तभी सरकार ने भर्ती रद्द कर दी।
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याची पक्ष ने कहा कि आवेदक पूरी मेहनत से परीक्षा पास कर चुके थे और जॉइनिंग से ठीक पहले भर्ती रद्द कर देना उनके साथ अन्याय है। साथ ही यह भी कहा कि नई आउटसोर्स भर्ती में योग्यता मानकों को कमजोर किया गया है। निजी एजेंसी के जरिये भर्ती में कोई लिखित परीक्षा नहीं होती और ऐसे में योग्य युवाओं का शोषण होता है तथा वेतन भी बहुत कम दिया जाता है।
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स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार भर्ती रद्द करने का निर्णय प्रशासनिक कारणों से लिया गया है। साथ ही विश्वविद्यालय को निर्देश दिए गए हैं कि उम्मीदवारों से ली गई आवेदन फीस वापस की जाए। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अगली सुनवाई तक कोई भी नियुक्ति नहीं की जाएगी।