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आंतरिक क्षमता को पहचानना ही जीवन की सबसे बड़ी ताकत : सद्गुरु सुधांशु महाराज
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पंचकूला। विश्व जागृति मिशन एवं हरियाणा योग सभा के संयुक्त तत्वावधान में सेक्टर-12 स्थित योग दिव्य मंदिर में एक दिवसीय दिव्य योग भक्ति सत्संग महोत्सव आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विश्व जागृति मिशन के अध्यक्ष सद्गुरु सुधांशु जी महाराज, उपाध्यक्ष एवं योग गुरु डॉ. अर्चिका दीदी, योगिराज लाल महाराज और गुरु माता प्रभा की पावन उपस्थिति रही। चंडीगढ़, पंचकूला सहित पंजाब और हरियाणा से बड़ी संख्या में गुरु भक्त कार्यक्रम में पहुंचे।
सद्गुरु सुधांशु महाराज ने कहा कि हर व्यक्ति के भीतर अपार क्षमता मौजूद है। आवश्यकता अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानकर उसे सही दिशा में लगाने की है। भारतीय संत परंपरा ने हमेशा समाज को स्वस्थ, सकारात्मक और संस्कारवान जीवन जीने की प्रेरणा दी है। उन्होंने योगिराज लाल जी महाराज और गुरु माता प्रभा जी की ओर से समाज कल्याण, स्वास्थ्य और योग के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की।
योगिराज लाल महाराज ने कहा कि योग आत्मिक संतुलन का मार्ग है। उन्होंने कहा कि अध्यात्म, योग और सनातन संस्कृति के प्रचार की दिशा में ऐसे आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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कार्यक्रम में आचार्य ताराचंद शास्त्री के मार्गदर्शन में महर्षि वेदव्यास गुरुकुल विद्यापीठ, कानपुर के ऋषिकुमार मानस त्रिवेदी ने दीपक आसन प्रस्तुत किया। वहीं शिवांक तिवारी ने देशभक्ति कविता का पाठ किया। गुरु भक्तों ने भक्ति और योग कार्यक्रमों में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
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सद्गुरु सुधांशु महाराज ने कहा कि हर व्यक्ति के भीतर अपार क्षमता मौजूद है। आवश्यकता अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानकर उसे सही दिशा में लगाने की है। भारतीय संत परंपरा ने हमेशा समाज को स्वस्थ, सकारात्मक और संस्कारवान जीवन जीने की प्रेरणा दी है। उन्होंने योगिराज लाल जी महाराज और गुरु माता प्रभा जी की ओर से समाज कल्याण, स्वास्थ्य और योग के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की।
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योगिराज लाल महाराज ने कहा कि योग आत्मिक संतुलन का मार्ग है। उन्होंने कहा कि अध्यात्म, योग और सनातन संस्कृति के प्रचार की दिशा में ऐसे आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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कार्यक्रम में आचार्य ताराचंद शास्त्री के मार्गदर्शन में महर्षि वेदव्यास गुरुकुल विद्यापीठ, कानपुर के ऋषिकुमार मानस त्रिवेदी ने दीपक आसन प्रस्तुत किया। वहीं शिवांक तिवारी ने देशभक्ति कविता का पाठ किया। गुरु भक्तों ने भक्ति और योग कार्यक्रमों में उत्साहपूर्वक भाग लिया।