{"_id":"66ac2c38da535c1a160fe3a4","slug":"rebel-leaders-called-a-meeting-of-party-representatives-proposed-to-change-sad-chief-pkl-office-news-c-16-1-pkl1079-482357-2024-08-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Panchkula News: बागी नेताओं ने पार्टी प्रतिनिधियों की बुलाई बैठक, शिअद प्रधान बदलने का प्रस्ताव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Panchkula News: बागी नेताओं ने पार्टी प्रतिनिधियों की बुलाई बैठक, शिअद प्रधान बदलने का प्रस्ताव
विज्ञापन
चंडीगढ़। शिरोमणि अकाली दल (शिअद) से निष्कासित बागी नेताओं ने पार्टी प्रधान को बदलने की ठान ली है। इसके लिए बागी नेताओं ने अब नया कदम उठाया है। बागी नेताओं ने पार्टी प्रतिनिधियों की बैठक बुलाई है। पार्टी से निष्कासित सुखदेव सिंह ढींडसा, गुरप्रताप सिंह वडाला, बीबी जगीर कौर और प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने यह प्रतिनिधियों की बैठक बुलाई है। इस बैठक में शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल को पद से हटाने को लेकर प्रस्ताव लाया जाएगा। अब देखना यह होगा कि पार्टी प्रतिनिधियों की इस बैठक में शिअद के कौन से चेहरे पहुंचते हैं।
बागी नेताओं द्वारा पार्टी डेलीगेट्स की बैठक बुलाए जाने का दावा अनुशासन समिति के चेयरमैन बलविंदर सिंह भूंदड़ और महेशइंद्र सिंह ग्रेवाल ने किया है। महेशइंद्र सिंह ग्रेवाल ने बताया कि पार्टी में 494 प्रतिनिधि हैं, जब तक इनकी सर्वसम्मति नहीं बनती तब तक पार्टी प्रधान को पद से हटाना दल के संविधान और कानून के खिलाफ है। यहां तक कि चेयरमैन भूंदड़ ने दावा किया पार्टी के प्रतिनिधियों की सूची भारत निर्वाचन आयोग और राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पास भी उपलब्ध है। प्रतिनिधियों की बैठक में अब यह देखना होगा कि कहीं पार्टी के कार्यालय और चुनाव चिह्न पर कब्जा करने की चाहत में गलत तरीके से प्रधान सुखबीर बादल को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव पास न कराया जाए जोकि गैर सांविधानिक होगा।
ढींडसा भूल गए जब टोहड़ा को निष्कासित किया था: ग्रेवाल
महेशइंद्र सिंह ग्रेवाल ने ढींडसा को पार्टी से निष्कासित किए जाने के दौरान कहा कि लगता है कि वह पूर्व जत्थेदार गुरचरण सिंह टोहड़ा को शिअद से निष्कासित करने वाला घटनाक्रम भूल गए हैं। ग्रेवाल ने कहा कि पूर्व सीएम व पार्टी प्रमुख प्रकाश सिंह बादल से जब टोहड़ा ने उन्हें एक्टिंग प्रधान बनाए जाने की सिर्फ पेशकश की थी, तब इतनी सी बात को लेकर उस समय अनुशासन समिति के अध्यक्ष होने के नाते ढींडसा ने टोहड़ा को पार्टी से बाहर कर दिया था। आज ढींडसा टोहड़ा को याद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ढींडसा ने 5 मार्च, 2024 को प्रधान सुखबीर बादल की अध्यक्षता में जब पार्दी दोबारा जॉइन की थी, तब उन्होंने कहा था कि वह सुखबीर की अध्यक्षता में पार्टी पर विश्वास रखते हैं, लेकिन जब उनके बेटे परमिंदर सिंह ढींडसा को संगरूर से इस बार टिकट नहीं दिया गया तो उन्होंने पार्टी प्रधान पर सवाल उठाने शुरू कर दिए।
विज्ञापन
सुखदेव सिंह ढींडसा पर सियासी प्रहार करते हुए ग्रेवाल ने कहा कि ‘सुधार लहर’ वाले अब प्रदीप कलेर की बात को उठा रहे हैं लेकिन खुद सुखदेव सिंह ढींडसा मान चुके हैं कि परमिंदर को वोट डलवाने के लिए वे डेरे पर जा चुके हैं। इतना ही नहीं, बीबी जगीर कौर ने खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी कि परमिंदर को डेरे की सपोर्ट के कारण जीत मिली।
कैबिनेट मंत्री रहते हुए ऑपरेशन ब्लैक थंडर को चंदूमाजरा ने भी दी मंजूरी
ग्रेवाल ने कहा कि जो लोग पार्टी, बेअदबी और सिख समाज को लेकर अकाली दल पर तरह-तरह के आरोप लगा रहे हैं। बागियों में शामिल नेता प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने 1985 में ऑपरेशन ब्लैक थंडर को कैबिनेट मंत्री रहते हुए मंजूरी दी थी। यहां तक कि श्री अकाल तख्त साहिब के बाहर जनवरी 1986 में टकसाली नेताओं को रोकने के लिए गोलियां चलवाई गई थीं। इसको लेकर मीडिया में भी रिपोर्ट प्रकाशित हैं।
विज्ञापन
बागी नेताओं द्वारा पार्टी डेलीगेट्स की बैठक बुलाए जाने का दावा अनुशासन समिति के चेयरमैन बलविंदर सिंह भूंदड़ और महेशइंद्र सिंह ग्रेवाल ने किया है। महेशइंद्र सिंह ग्रेवाल ने बताया कि पार्टी में 494 प्रतिनिधि हैं, जब तक इनकी सर्वसम्मति नहीं बनती तब तक पार्टी प्रधान को पद से हटाना दल के संविधान और कानून के खिलाफ है। यहां तक कि चेयरमैन भूंदड़ ने दावा किया पार्टी के प्रतिनिधियों की सूची भारत निर्वाचन आयोग और राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पास भी उपलब्ध है। प्रतिनिधियों की बैठक में अब यह देखना होगा कि कहीं पार्टी के कार्यालय और चुनाव चिह्न पर कब्जा करने की चाहत में गलत तरीके से प्रधान सुखबीर बादल को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव पास न कराया जाए जोकि गैर सांविधानिक होगा।
विज्ञापन
ढींडसा भूल गए जब टोहड़ा को निष्कासित किया था: ग्रेवाल
महेशइंद्र सिंह ग्रेवाल ने ढींडसा को पार्टी से निष्कासित किए जाने के दौरान कहा कि लगता है कि वह पूर्व जत्थेदार गुरचरण सिंह टोहड़ा को शिअद से निष्कासित करने वाला घटनाक्रम भूल गए हैं। ग्रेवाल ने कहा कि पूर्व सीएम व पार्टी प्रमुख प्रकाश सिंह बादल से जब टोहड़ा ने उन्हें एक्टिंग प्रधान बनाए जाने की सिर्फ पेशकश की थी, तब इतनी सी बात को लेकर उस समय अनुशासन समिति के अध्यक्ष होने के नाते ढींडसा ने टोहड़ा को पार्टी से बाहर कर दिया था। आज ढींडसा टोहड़ा को याद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ढींडसा ने 5 मार्च, 2024 को प्रधान सुखबीर बादल की अध्यक्षता में जब पार्दी दोबारा जॉइन की थी, तब उन्होंने कहा था कि वह सुखबीर की अध्यक्षता में पार्टी पर विश्वास रखते हैं, लेकिन जब उनके बेटे परमिंदर सिंह ढींडसा को संगरूर से इस बार टिकट नहीं दिया गया तो उन्होंने पार्टी प्रधान पर सवाल उठाने शुरू कर दिए।
विज्ञापन
सुखदेव सिंह ढींडसा पर सियासी प्रहार करते हुए ग्रेवाल ने कहा कि ‘सुधार लहर’ वाले अब प्रदीप कलेर की बात को उठा रहे हैं लेकिन खुद सुखदेव सिंह ढींडसा मान चुके हैं कि परमिंदर को वोट डलवाने के लिए वे डेरे पर जा चुके हैं। इतना ही नहीं, बीबी जगीर कौर ने खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी कि परमिंदर को डेरे की सपोर्ट के कारण जीत मिली।
कैबिनेट मंत्री रहते हुए ऑपरेशन ब्लैक थंडर को चंदूमाजरा ने भी दी मंजूरी
ग्रेवाल ने कहा कि जो लोग पार्टी, बेअदबी और सिख समाज को लेकर अकाली दल पर तरह-तरह के आरोप लगा रहे हैं। बागियों में शामिल नेता प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने 1985 में ऑपरेशन ब्लैक थंडर को कैबिनेट मंत्री रहते हुए मंजूरी दी थी। यहां तक कि श्री अकाल तख्त साहिब के बाहर जनवरी 1986 में टकसाली नेताओं को रोकने के लिए गोलियां चलवाई गई थीं। इसको लेकर मीडिया में भी रिपोर्ट प्रकाशित हैं।