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Panchkula News: कोटक बैंक के गुमनाम खातों का राज खोलेगा रजत, 6 दिन के पुलिस रिमांड पर
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नगर निगम पंचकूला में 158 करोड़ का एफडी घोटाला... महिला की भूमिका भी जांच में, फर्जी खातों से करोड़ों की रकम ट्रांसफर
माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। नगर निगम पंचकूला के एफडीआर घोटाले की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। मुख्य आरोपी रजत से पूछताछ में कोटक महिंद्रा बैंक में खुले दो गुमनाम खातों का खुलासा हुआ है, जिनका नगर निगम के आधिकारिक रिकॉर्ड में कोई उल्लेख नहीं था।
एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने आरोपी को शुक्रवार को अदालत में पेश किया। जांच एजेंसी ने 10 दिन का रिमांड मांगा था लेकिन अदालत ने 6 दिन की अनुमति दी। जांच में एक महिला की भूमिका भी सामने आई है जिसकी विजिलेंस ब्यूरो गहन पड़ताल कर रहा है। इन खातों को खुलवाने में शामिल बैंक कर्मियों और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
विजिलेंस जांच के अनुसार, रजत ने बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर दिलीप राघव के साथ मिलकर 70 करोड़ रुपये से अधिक की राशि संदिग्ध तरीके से निजी खातों में ट्रांसफर करवाई। आशंका है कि एफडीआर तोड़कर रकम पहले इन गुप्त खातों में डाली गई और फिर वहां से आगे भेजी गई। डिजिटल डाटा और ट्रांजेक्शन एंट्री से संकेत मिले हैं कि पैसों को घुमाने के लिए जटिल लेयरिंग तंत्र का इस्तेमाल किया गया।
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डायरी और डिजिटल डाटा से खुलेंगे राज
विजिलेंस टीम कस्टोडियल पूछताछ के जरिए पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ रही है। आरोपी की निजी डायरी से कई प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आने की संभावना है। इसके अलावा मोबाइल, लैपटॉप और व्हाट्सएप चैट की जांच की जा रही है। घोटाले की रकम से खरीदी गई चल-अचल संपत्तियों के दस्तावेज जुटाने के लिए छापेमारी भी जारी है।
बैंक अधिकारी नेक्सस की जांच तेज
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला केवल बैंक कर्मचारी और एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। इतनी बड़ी रकम के हेरफेर में व्यापक मिलीभगत की आशंका है। आरोप है कि बैंक स्टेटमेंट और एफडीआर रिकॉर्ड में इस तरह हेरफेर की गई कि लंबे समय तक निगम को गड़बड़ी का पता ही नहीं चला। अब विजिलेंस पूरे नेक्सस से जुड़े लोगों को चिह्नित करने में जुटी है।
पुराने मामलों की भी जांच की मांग
विकास मंच पंचकूला ने वर्ष 2020 में हुए करीब सवा करोड़ रुपये के कथित गबन का मुद्दा भी उठाया है। मंच के राकेश अग्रवाल ने इस पूरे प्रकरण की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो से कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अकाउंट्स विभाग के पुराने और वर्तमान अधिकारियों की भूमिका की भी जांच जरूरी है।
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माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। नगर निगम पंचकूला के एफडीआर घोटाले की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। मुख्य आरोपी रजत से पूछताछ में कोटक महिंद्रा बैंक में खुले दो गुमनाम खातों का खुलासा हुआ है, जिनका नगर निगम के आधिकारिक रिकॉर्ड में कोई उल्लेख नहीं था।
एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने आरोपी को शुक्रवार को अदालत में पेश किया। जांच एजेंसी ने 10 दिन का रिमांड मांगा था लेकिन अदालत ने 6 दिन की अनुमति दी। जांच में एक महिला की भूमिका भी सामने आई है जिसकी विजिलेंस ब्यूरो गहन पड़ताल कर रहा है। इन खातों को खुलवाने में शामिल बैंक कर्मियों और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
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विजिलेंस जांच के अनुसार, रजत ने बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर दिलीप राघव के साथ मिलकर 70 करोड़ रुपये से अधिक की राशि संदिग्ध तरीके से निजी खातों में ट्रांसफर करवाई। आशंका है कि एफडीआर तोड़कर रकम पहले इन गुप्त खातों में डाली गई और फिर वहां से आगे भेजी गई। डिजिटल डाटा और ट्रांजेक्शन एंट्री से संकेत मिले हैं कि पैसों को घुमाने के लिए जटिल लेयरिंग तंत्र का इस्तेमाल किया गया।
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डायरी और डिजिटल डाटा से खुलेंगे राज
विजिलेंस टीम कस्टोडियल पूछताछ के जरिए पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ रही है। आरोपी की निजी डायरी से कई प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आने की संभावना है। इसके अलावा मोबाइल, लैपटॉप और व्हाट्सएप चैट की जांच की जा रही है। घोटाले की रकम से खरीदी गई चल-अचल संपत्तियों के दस्तावेज जुटाने के लिए छापेमारी भी जारी है।
बैंक अधिकारी नेक्सस की जांच तेज
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला केवल बैंक कर्मचारी और एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। इतनी बड़ी रकम के हेरफेर में व्यापक मिलीभगत की आशंका है। आरोप है कि बैंक स्टेटमेंट और एफडीआर रिकॉर्ड में इस तरह हेरफेर की गई कि लंबे समय तक निगम को गड़बड़ी का पता ही नहीं चला। अब विजिलेंस पूरे नेक्सस से जुड़े लोगों को चिह्नित करने में जुटी है।
पुराने मामलों की भी जांच की मांग
विकास मंच पंचकूला ने वर्ष 2020 में हुए करीब सवा करोड़ रुपये के कथित गबन का मुद्दा भी उठाया है। मंच के राकेश अग्रवाल ने इस पूरे प्रकरण की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो से कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अकाउंट्स विभाग के पुराने और वर्तमान अधिकारियों की भूमिका की भी जांच जरूरी है।