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Panchkula News: नगर निगम के वित्तीय घोटाले में पुष्पिंदर सिंह की जमानत खारिज
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पंचकूला। नगर निगम पंचकूला के करोड़ों रुपये के कथित वित्तीय घोटाले से जुड़े मामले में अदालत ने पुष्पिंदर सिंह की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने आरोपों की गंभीरता, सार्वजनिक धन से जुड़े मामले और मनी लॉन्ड्रिंग की समानांतर कार्रवाई को देखते हुए जमानत देने का आधार नहीं पाया।
अदालत के आदेश के अनुसार मामला नगर निगम की 16 फिक्स्ड डिपॉजिट से जुड़ा है, जिनकी कुल राशि करीब 145.03 करोड़ रुपये थी। जांच में निगम और बैंक रिकॉर्ड में गंभीर विसंगतियां सामने आने के साथ कथित तौर पर अनधिकृत बैंक खातों के संचालन की बात सामने आई है।
अभियोजन के अनुसार पुष्पिंदर सिंह पर बैंक शाखा प्रबंधक रहते हुए बैंकिंग प्रक्रियाओं को दरकिनार कर कथित फर्जी खातों और एफडी से जुड़े लेनदेन में भूमिका निभाने का आरोप है। जांच में उसके व्यक्तिगत खातों में 29.46 करोड़ रुपये और पत्नी के खाते में 4.36 करोड़ रुपये पहुंचने की बात कही गई है।
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बचाव पक्ष ने दलील दी कि पुष्पिंदर ने जून 2023 में शाखा प्रबंधक का पद छोड़ दिया था, जबकि विवादित एफडी अप्रैल 2024 से अप्रैल 2025 के बीच बनाई गईं। यह भी कहा गया कि जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।
अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड प्रथम दृष्टया पुष्पिंदर और नगर निगम के सार्वजनिक धन के कथित गबन की साजिश के बीच सीधा संबंध दर्शाता है। अदालत ने महत्वपूर्ण राशि की बरामदगी बाकी होने और सह-आरोपियों के खिलाफ जांच जारी रहने का भी उल्लेख किया। बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका को देखते हुए जमानत खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत पर की गई टिप्पणियां मुकदमे के अंतिम निर्णय पर राय नहीं मानी जाएंगी।
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अदालत के आदेश के अनुसार मामला नगर निगम की 16 फिक्स्ड डिपॉजिट से जुड़ा है, जिनकी कुल राशि करीब 145.03 करोड़ रुपये थी। जांच में निगम और बैंक रिकॉर्ड में गंभीर विसंगतियां सामने आने के साथ कथित तौर पर अनधिकृत बैंक खातों के संचालन की बात सामने आई है।
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अभियोजन के अनुसार पुष्पिंदर सिंह पर बैंक शाखा प्रबंधक रहते हुए बैंकिंग प्रक्रियाओं को दरकिनार कर कथित फर्जी खातों और एफडी से जुड़े लेनदेन में भूमिका निभाने का आरोप है। जांच में उसके व्यक्तिगत खातों में 29.46 करोड़ रुपये और पत्नी के खाते में 4.36 करोड़ रुपये पहुंचने की बात कही गई है।
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बचाव पक्ष ने दलील दी कि पुष्पिंदर ने जून 2023 में शाखा प्रबंधक का पद छोड़ दिया था, जबकि विवादित एफडी अप्रैल 2024 से अप्रैल 2025 के बीच बनाई गईं। यह भी कहा गया कि जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।
अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड प्रथम दृष्टया पुष्पिंदर और नगर निगम के सार्वजनिक धन के कथित गबन की साजिश के बीच सीधा संबंध दर्शाता है। अदालत ने महत्वपूर्ण राशि की बरामदगी बाकी होने और सह-आरोपियों के खिलाफ जांच जारी रहने का भी उल्लेख किया। बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका को देखते हुए जमानत खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत पर की गई टिप्पणियां मुकदमे के अंतिम निर्णय पर राय नहीं मानी जाएंगी।