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पंजाब यूनिवर्सिटी राज्य की विरासत, नाम बदलना हमारी विरासत का अपमान : मलविंदर कंग
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चंडीगढ़। आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद मलविंदर सिंह कंग ने पंजाब विश्वविद्यालय का नाम बदलने और इसकी स्वायत्तता को कमजोर करने की कथित साजिशों का समर्थन करने वाले हालिया बयानों की निंदा की है।
कंग ने हरियाणा कांग्रेस के सांसद दीपेंद्र हुड्डा पर भाजपा की भाषा बोलने और भाजपा पर पंजाब की सांस्कृतिक और सांविधानिक विरासत को कमजोर करने का आरोप लगाया। कंग ने कहा कि पंजाब विश्वविद्यालय सिर्फ एक शैक्षणिक संस्थान नहीं है बल्कि यह पंजाब की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक विरासत का प्रतीक है।
विभाजन से बहुत पहले स्थापित यह विश्वविद्यालय पंजाबी भाषा, संस्कृति और मूल्यों को दर्शाता है। हरियाणा का नाम पंजाब विश्वविद्यालय से जोड़ने की कोशिशें अनुचित और असांविधानिक हैं। ऐसे करना पंजाब का अपमान है। ऐतिहासिक तथ्यों पर प्रकाश डालते हुए कंग ने बताया कि हरियाणा के कॉलेजों ने 1973 में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल के नेतृत्व में पंजाब विश्वविद्यालय से स्वेच्छा से खुद को अलग कर लिया था।
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उन्होंने कहा कि 50 से अधिक वर्षों से हरियाणा का पंजाब विश्वविद्यालय से कोई संबंध नहीं रहा है। अब वे किस आधार पर मालिकी का दावा करते हैं या नाम बदलने की मांग करते हैं? अगर हरियाणा के नेता इतने ही इच्छुक हैं, तो उन्हें पंजाब की विरासत पर नजर रखने के बजाय हरियाणा विश्वविद्यालय स्थापित करना चाहिए।
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कंग ने हरियाणा कांग्रेस के सांसद दीपेंद्र हुड्डा पर भाजपा की भाषा बोलने और भाजपा पर पंजाब की सांस्कृतिक और सांविधानिक विरासत को कमजोर करने का आरोप लगाया। कंग ने कहा कि पंजाब विश्वविद्यालय सिर्फ एक शैक्षणिक संस्थान नहीं है बल्कि यह पंजाब की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक विरासत का प्रतीक है।
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विभाजन से बहुत पहले स्थापित यह विश्वविद्यालय पंजाबी भाषा, संस्कृति और मूल्यों को दर्शाता है। हरियाणा का नाम पंजाब विश्वविद्यालय से जोड़ने की कोशिशें अनुचित और असांविधानिक हैं। ऐसे करना पंजाब का अपमान है। ऐतिहासिक तथ्यों पर प्रकाश डालते हुए कंग ने बताया कि हरियाणा के कॉलेजों ने 1973 में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल के नेतृत्व में पंजाब विश्वविद्यालय से स्वेच्छा से खुद को अलग कर लिया था।
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उन्होंने कहा कि 50 से अधिक वर्षों से हरियाणा का पंजाब विश्वविद्यालय से कोई संबंध नहीं रहा है। अब वे किस आधार पर मालिकी का दावा करते हैं या नाम बदलने की मांग करते हैं? अगर हरियाणा के नेता इतने ही इच्छुक हैं, तो उन्हें पंजाब की विरासत पर नजर रखने के बजाय हरियाणा विश्वविद्यालय स्थापित करना चाहिए।