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Panchkula News: विवाहित दंपती की सुरक्षा की मांग पर उदासीन रवैया, पंजाब सरकार को फटकार

Fri, 28 Jun 2024 05:08 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 28 Jun 2024 05:08 AM IST
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Punjab government reprimanded for its indifferent attitude towards the demand for security of married couple.
चंडीगढ़। प्रेम विवाह करने वाले दंपती की सुरक्षा से जुड़े एक मामले में सुनवाई करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने विवाह योग्य आयु वाले नागरिकों के अपना जीवन साथी चुनने और विवाह करने के अधिकार पर जोर देते हुए कहा कि आखिर क्यों उन्हें शांतिपूर्ण जीवन जीने के लिए अदालत आने को मजबूर किया जा रहा है। हाईकोर्ट ने जालंधर पुलिस आयुक्त को याचिकाकर्ताओं की सुरक्षा की समीक्षा कर उचित निर्णय लेने का आदेश दिया है।
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दंपती ने हाईकोर्ट को बताया कि वे दोनों वयस्क हैं और विवाह की न्यूनतम आयु को पार कर चुके हैं। दोनों जालंधर में एक निजी फैक्टरी में काम करते हैं और खुद का भरण-पोषण करने और एक-दूसरे के प्रति अपने वैवाहिक दायित्वों को पूरा करने के लिए पर्याप्त कमाई करते हैं। पुरुष ने बताया कि उसकी पहली पत्नी का स्वर्गवास 14 वर्ष पहले हो चुका है, जबकि महिला पहले से विवाहित नहीं थी। महिला ने बताया कि उनको उसके परिजनों से जान का खतरा है।
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याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उन्होंने सुरक्षा की मांग को लेकर जालंधर पुलिस को निवेदन किया था, लेकिन कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई। हाईकोर्ट ने याची पक्ष को सुनने के बाद कहा कि अपनी पसंद से शादी करना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। इस मामले में पुलिस इस जोड़े के सुरक्षा निवेदन पर सही प्रकार से फैसला लेने पर नाकाम रही जिसके चलते उन्हें हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी।
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सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद जिम्मेदार व वयस्क जोड़ों को पुलिस से सुरक्षा नहीं मिल रही है और उन्हें अदालत आना पड़ता है। कैसे दो परिपक्व, जिम्मेदार और सहमति वाले वयस्क, जिन्होंने कानूनी रूप से विवाह करने के बाद एक साथ अपना जीवन बिताने का फैसला किया था, उन्हें अपनी इच्छानुसार शांतिपूर्ण जीवन जीने की अनुमति नहीं दी गई। याचिका का निपटारा करते हुए हाईकोर्ट ने जालंधर के पुलिस आयुक्त को याचिकाकर्ताओं की सुरक्षा की समीक्षा कर उचित निर्णय लेने का आदेश दिया है।
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