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Panchkula News: पंजाब सरकार ने सीमावर्ती जिलों में मोबाइल ड्रोन डिटेक्शन प्लेटफॉर्म की यूनिटें की तैनात
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चंडीगढ़। पंजाब सरकार ने पाकिस्तान से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा पर नशा तस्करी को रोकने के लिए सीमावर्ती जिलों में मोबाइल ड्रोन डिटेक्शन प्लेटफॉर्म ड्रोन सेंस डी200 प्रो की तीन यूनिटें तैनात की हैं। यह प्लेटफॉर्म ड्रोन से संबंधित गतिविधियों और खेप गिराने वाले स्थानों की सटीक जानकारी प्रदान करेंगे। इससे पहले पिछले साल सरकार ने अमृतसर, तरनतारन और फिरोजपुर में एंटी-ड्रोन सिस्टम भी तैनात किए थे।
पिछले कुछ साल के दौरान पंजाब में पाकिस्तान से लगती सीमा के जरिये होने वाली नशा तस्करी के तरीकों में बदलाव आया है और अब फार्मास्यूटिकल ड्रग्स पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। पंजाब में नशा-रोधी कानूनों को लागू करने के संबंध में अब हेरोइन की लत के बजाय फार्मास्युटिकल ड्रग्स की लत एक प्रमुख चुनौती के रूप में उभर रही है। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और पंजाब पुलिस के ड्रोन के जरिये नशीले पदार्थों की तस्करी से निपटने के लिए अपनाई गई रणनीति के चलते पंजाब में जमीनी स्तर पर हेरोइन की उपलब्धता में गिरावट आ रही है।
जमीनी स्तर पर तत्काल कार्रवाई के लिए 147 पुलिस कर्मचारियों के साथ-साथ 52 ड्रोन रिस्पांस टीमों (डीआरटी) द्वारा सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के साथ निकट तालमेल में काम किया जा रहा है। ये टीमें ड्रोन अलर्ट मिलने पर संदिग्ध खेप गिराने वाले स्थानों तक पहुंचती हैं, तलाशी लेती हैं और गिराई गई खेपों को प्राप्त करने वाले व्यक्तियों को गिरफ्तार करती हैं। इसके लिए 585 स्थानों पर 2367 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और 600 पुलिस कर्मचारियों वाले 64 सेकेंड लाइन ऑफ डिफेंस नाकों की व्यवस्था की गई है।
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सीमावर्ती क्षेत्रों में विलेज डिफेंस कमेटियों (वीडीसी) को ड्रोन रिस्पांस टीमों के साथ जोड़ा गया है। युद्ध नशे के विरुद्ध अभियान के तहत 1 मार्च 2025 से अब तक लगभग 80,000 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है और 486 ड्रोन बरामद किए गए हैं। नशा तस्करी नेटवर्क के आर्थिक आधार को तोड़ने के लिए 336 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति फ्रीज की गई है।
नशों से संबंधित जानकारी देने के लिए बनाई गई इनामी नीति के तहत प्रत्येक ड्रोन की बरामदगी पर 25,000 रुपये का नकद इनाम दिया जाता है और मौजूदा वर्ष के दौरान इस नीति के तहत लगभग 2 करोड़ रुपये की राशि वितरित की जा चुकी है। सरकार के अनुसार पंजाब में फार्मास्युटिकल ड्रग्स की जब्ती से संबंधित आंकड़ों के अनुसार अधिकांश फार्मास्युटिकल ड्रग्स पंजाब में नहीं बनाए जाते और हिमाचल प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली आदि राज्यों में बनाए जाते हैं।
वर्ष 2025 से अब तक उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, दिल्ली और हिमाचल सहित अन्य राज्यों से जुड़ी खेपों में से 11.54 लाख नशीली गोलियां/कैप्सूल बरामद किए गए हैं।
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पिछले कुछ साल के दौरान पंजाब में पाकिस्तान से लगती सीमा के जरिये होने वाली नशा तस्करी के तरीकों में बदलाव आया है और अब फार्मास्यूटिकल ड्रग्स पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। पंजाब में नशा-रोधी कानूनों को लागू करने के संबंध में अब हेरोइन की लत के बजाय फार्मास्युटिकल ड्रग्स की लत एक प्रमुख चुनौती के रूप में उभर रही है। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और पंजाब पुलिस के ड्रोन के जरिये नशीले पदार्थों की तस्करी से निपटने के लिए अपनाई गई रणनीति के चलते पंजाब में जमीनी स्तर पर हेरोइन की उपलब्धता में गिरावट आ रही है।
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जमीनी स्तर पर तत्काल कार्रवाई के लिए 147 पुलिस कर्मचारियों के साथ-साथ 52 ड्रोन रिस्पांस टीमों (डीआरटी) द्वारा सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के साथ निकट तालमेल में काम किया जा रहा है। ये टीमें ड्रोन अलर्ट मिलने पर संदिग्ध खेप गिराने वाले स्थानों तक पहुंचती हैं, तलाशी लेती हैं और गिराई गई खेपों को प्राप्त करने वाले व्यक्तियों को गिरफ्तार करती हैं। इसके लिए 585 स्थानों पर 2367 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और 600 पुलिस कर्मचारियों वाले 64 सेकेंड लाइन ऑफ डिफेंस नाकों की व्यवस्था की गई है।
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सीमावर्ती क्षेत्रों में विलेज डिफेंस कमेटियों (वीडीसी) को ड्रोन रिस्पांस टीमों के साथ जोड़ा गया है। युद्ध नशे के विरुद्ध अभियान के तहत 1 मार्च 2025 से अब तक लगभग 80,000 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है और 486 ड्रोन बरामद किए गए हैं। नशा तस्करी नेटवर्क के आर्थिक आधार को तोड़ने के लिए 336 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति फ्रीज की गई है।
नशों से संबंधित जानकारी देने के लिए बनाई गई इनामी नीति के तहत प्रत्येक ड्रोन की बरामदगी पर 25,000 रुपये का नकद इनाम दिया जाता है और मौजूदा वर्ष के दौरान इस नीति के तहत लगभग 2 करोड़ रुपये की राशि वितरित की जा चुकी है। सरकार के अनुसार पंजाब में फार्मास्युटिकल ड्रग्स की जब्ती से संबंधित आंकड़ों के अनुसार अधिकांश फार्मास्युटिकल ड्रग्स पंजाब में नहीं बनाए जाते और हिमाचल प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली आदि राज्यों में बनाए जाते हैं।
वर्ष 2025 से अब तक उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, दिल्ली और हिमाचल सहित अन्य राज्यों से जुड़ी खेपों में से 11.54 लाख नशीली गोलियां/कैप्सूल बरामद किए गए हैं।