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फरीदाबाद की संत नगर कॉलोनी के हजारों निवासियों को हटाने पर उच्च न्यायालय ने लगाई रोक
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चंडीगढ़। फरीदाबाद की संत नगर कॉलोनी के लगभग 2500 निवासियों को बड़ी राहत देते हुए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने कॉलोनी को हटाने के नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही न्यायालय ने हरियाणा सरकार, केंद्र सरकार, फरीदाबाद नगर निगम और फरीदाबाद स्मार्ट सिटी लिमिटेड को 7 सितंबर के लिए नोटिस जारी कर जवाब भी मांग लिया है।
संत नगर कॉलोनी के 196 स्थानीय निवासियों द्वारा एडवोकेट वैभव जैन के जरिए दायर याचिका में न्यायालय को बताया गया कि यहां यह कॉलोनी 1960 से है। यह एक झोपड़पट्टी कॉलोनी है और यहां पास ही एक रेलवे ट्रैक है। एडवोकेट वैभव जैन ने बताया कि इस रेल लाइन के पास कचरा और गंदगी को लेकर एनजीटी में एक याचिका दायर की गई थी। इसके बाद एनजीटी ने 1 अक्तूबर 2018 को रेलवे को एक टास्क फॉर्स का गठन कर इस कॉलोनी को यहां से हटाने के आदेश दे दिए। एनजीटी के आदेश के बाद अब यहां कॉलोनी में घरों के बाहर नोटिस लगा दिए गए हैं। कॉलोनी निवासियों का कहना है कि मामले में उनका पक्ष तक नहीं सुना गया है और वैसे भी यह जमीन जहां कॉलोनी है वह सिर्फ रेलवे की नहीं है, ऐसे में रेलवे को उनके घर को गिराने का अधिकार ही नहीं है।
विकास कार्य जारी हैं
याचिका में बताया गया है कि फरीदाबाद स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने 2016 में उनकी कॉलोनी का स्मार्ट स्लम के तौर पर चयन किया है, जिसके तहत 2018 से ही यहां सीवरेज, एलईडी लाइट्स, वाटर सप्लाई, सड़कें आदि के काम भी शुरू हो चुके हैं। जिस कॉलोनी का स्मार्ट स्लम के तौर पर चयन किया गया है उसे कैसे हटाया जा सकता है।
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संत नगर कॉलोनी के 196 स्थानीय निवासियों द्वारा एडवोकेट वैभव जैन के जरिए दायर याचिका में न्यायालय को बताया गया कि यहां यह कॉलोनी 1960 से है। यह एक झोपड़पट्टी कॉलोनी है और यहां पास ही एक रेलवे ट्रैक है। एडवोकेट वैभव जैन ने बताया कि इस रेल लाइन के पास कचरा और गंदगी को लेकर एनजीटी में एक याचिका दायर की गई थी। इसके बाद एनजीटी ने 1 अक्तूबर 2018 को रेलवे को एक टास्क फॉर्स का गठन कर इस कॉलोनी को यहां से हटाने के आदेश दे दिए। एनजीटी के आदेश के बाद अब यहां कॉलोनी में घरों के बाहर नोटिस लगा दिए गए हैं। कॉलोनी निवासियों का कहना है कि मामले में उनका पक्ष तक नहीं सुना गया है और वैसे भी यह जमीन जहां कॉलोनी है वह सिर्फ रेलवे की नहीं है, ऐसे में रेलवे को उनके घर को गिराने का अधिकार ही नहीं है।
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विकास कार्य जारी हैं
याचिका में बताया गया है कि फरीदाबाद स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने 2016 में उनकी कॉलोनी का स्मार्ट स्लम के तौर पर चयन किया है, जिसके तहत 2018 से ही यहां सीवरेज, एलईडी लाइट्स, वाटर सप्लाई, सड़कें आदि के काम भी शुरू हो चुके हैं। जिस कॉलोनी का स्मार्ट स्लम के तौर पर चयन किया गया है उसे कैसे हटाया जा सकता है।
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