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35 फुट कचरे का पहाड़ आज से होगा खत्म, प्रशासक करेंगे उद्घाटन

Thu, 19 Dec 2019 11:12 PM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Thu, 19 Dec 2019 11:12 PM IST
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Process to eliminate 35 foot waste mountain starts
चंडीगढ़। डड्डूमाजरा स्थित 35 फुट ऊंचे कचरे के पहाड़ को हटाने के लिए शुक्रवार से काम शुरू हो जाएगा। प्रशासक वीपी सिंह बदनौर डंपिंग ग्राउंड में लगी मशीनों का उद्घाटन करेंगे। डंपिंग ग्राउंड से 18 महीने में कचरा हटाने का समय दे दिया गया है, लेकिन डंपिंग ग्राउंड को साफ करने के लिए जाने कितने आंदोलन हुए और न जाने कितने राजनीतिक आश्वासन दिए गए। कई बार राजनीति का मुद्दा बनाकर आरोप प्रत्यारोप का दौर चला तो कभी नेताओं ने अपने घोषणा पत्र में प्रमुखता से स्थान दिया। पर राहत की बात है कि शहर की एक बड़ी समस्या का समाधान अगले डेढ़ साल में हो जाएगा।
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डंपिंग ग्राउंड ने डड्डूमाजरा के लोगों का जीवन जैसे एक कहानी बना दिया। कभी कचरा हटने का आश्वासन मिलने पर खुशी से झूम उठते तो कभी काम में देरी के कारण लोग मायूस हो जाते। दुर्गंध और बीमारियों ने जैसे लोगों का जीना मुहाल कर दिया था। किसी के बेटे की शादी नहीं हो रही थी तो किसी के घर बीमारियां दस्तक दे रहीं थीं। इन सबके बीच अमर उजाला ने कई बार लोगों के बीच जाकर उनकी पीड़ा अधिकारियों के सामने रखी, लेकिन आखिर एक दिन ऐसा आया है जब लोगों को शहर की सबसे बड़ी समस्या से निजात मिलने का एक रास्ता दिखाई दिया। आज लोगों की खुशी का कोई ठिकाना नहीं है। लोगों को लग रहा है कि उनकी लड़ाई का परिणाम मिल रहा है।
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यह क्षेत्र हैं प्रभावित
डंपिंग ग्राउंड से न केवल डड्डूमाजरा कॉलानी बल्कि सेक्टर- 25, 24, धनास, ईडब्ल्यूएस कॉलोनी, सारंगपुर, पंजाब यूनिवर्सिटी तक के क्षेत्र प्रभावित हैं।
डंपिंग ग्राउंड पर मनाया योगा डे और स्वतंत्रता दिवस
डड्डूूमाजरा के लोगों ने नेताओं और अधिकारियों से कई बार गुहार, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उसकेबाद लोगों ने विरोध स्वरूप डंपिंग ग्राउंड पर ही योगा किया। उसके बाद स्वतंत्रता दिवस पर डंपिंग ग्राउंड के बगल में कार्यक्रम आयोजित करके विरोध जताया।
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इंदौर से लेकर अलग अलग जगह किए टूर
डंपिंग ग्राउंड को हटाने के लिए अधिकारियों और पार्षदों ने कई बार इंदौर का स्टडी टूर किया, लेकिन उस पर अमल नहीं हो सका। इसके अलावा अधिकारियों ने अमरावती और विजयवाड़ा में जाकर भी कचरा प्रोसेस करने की जानकारी ली, लेकिन उस पर बहुत ज्यादा अमल नहीं हो सका। उसके बाद स्मार्ट सिटी के तहत डंपिंग ग्राउंड को हटाने का निर्णय लिया गया।
पिछले पांच साल में पहुंचे ये लोग
1-किरन खेर, सांसद
डड्डूमाजरा के लोगों ने बताया कि वर्ष 2014 में डंपिंग ग्राउंड को हटाने के लिए भूख हड़ताल की थी। मौजूदा सांसद किरण खेर ने आकर लोगों को जूस पिलाकर हड़ताल खत्म कराई और कहा कि सत्ता में आए तो सबसे पहले डंपिंग ग्राउंड की समस्या को हल करेंगे, लेकिन समस्या समाप्त नहीं हुई। इसके बाद अगले लोकसभा चुनाव में सांसद फिर से अपने चुनावी वादों में डंपिंग ग्राउंड हटाने का मुद्दा लेकर आईं। हालांकि काफी जद्दोजहद के बाद कचरा का पहाड़ हट रहा है।
2- विजय देव, तत्कालीन एडवाइजर चंडीगढ़
डड्डूमाजरा के लोगों की समस्या देखने चंडीगढ़ के तत्कालीन एडवाइजर विजय देव भी पहुंचे थे। उन्होंने डड्डूमाजरा में डंपिंग ग्राउंड की हालत देखकर पूछा आखिर यहां लोग कैसे रहते हैं। जल्द ही इस समस्या का समाधान निकालना होगा। एडवाइजर के आश्वासन से लोग भी गदगद हो गए। उन्हें लगा कि अब शायद इस जहरीली हवा से मुक्ति मिलेगी, लेकिन कुछ नहीं हो सका।
3- पवन बंसल, पूर्व मंत्री
कांग्रेस के शासनकाल में इस समस्या के निराकरण की मांग ने जोर पकड़ा। तत्कालीन सांसद और पूर्व मंत्री पवन बंसल ने लोगों की समस्या को सुना और जेपी कंपनी को कूढ़ा प्रोसेस करने के लिए टेंडर दिया, लेकिन वर्ष 2014 में सत्ता जाने के बाद पवन बंसल ने भाजपा पर ही आरोप लगाना शुरू कर दिया कि जर्मन मशीनों की बात हुई थी और भाजपा ने लुधियाना की मशीनें लगवा दी हैं। आरोप प्रत्यारोप के दौर में डड्डूमाजरा के लोगों की समस्या जस की तस रही।
4- आशा जायसवाल, पूर्व मेयर
वर्ष 2017 में मेयर बनीं आशा जायसवाल ने अपने कार्यकाल में लगभग 3 से 4 बार डड्डूमाजरा में भ्रमण किया। हर बार लोगों को आश्वासन दिया गया कि डंपिंग ग्राउंड के कचरे से लोगों को हर हाल में मुक्ति दिलाई जाएगी, लेकिन नगर निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की आपसी खींचतान में डंपिंग ग्राउंड एक मुद्दा बनकर ही रह गया। लोगों को उम्मीद थी कि इस बार समस्या का हल होगा, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
5- देवेश मोदगिल, पूर्व मेयर
वर्ष 2018 में देवेश मोदगिल मेयर बने। नए मेयर से लोगों की उम्मीदें फिर से बंध गईं। सालों से अपनी समस्या का हल होने का इंतजार कर रहे लोग ने मेयर से अपील की। निगम प्रशासन और मेयर की खींचतान इतनी बढ़ गई कि मेयर ने कंपोस्ट बनाने वाले प्लांट का उदघाटन करने से ही मना कर दिया। मेयर ने कहा कि चारों ओर गंदगी फैली है और प्लांट भी अव्यवस्थित है। इसे पहले व्यवस्थित करो तब उद्घाटन होगा। उद्घाटन टलने के बाद लोगों की उम्मीदें एक बाद फिर धूमिल हो गईं।
6- राजेश कालिया, वर्तमान मेयर
वर्ष 2019 में राजेश कालिया मेयर बने। लोग उनसे मदद मांगने पहुंचे। प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्र को मेयर ने सदन में सभी को पढ़कर बताया। कहा कि डड्डूमाजरा के लोग डंपिंग ग्राउंड की समस्या से परेशान हैं। वर्तमान मेयर ने लोगों की मदद के लिए थोड़ा कदम बढ़ाया तो विरोधियों ने उन्हें डड्डूमाजरा का मेयर घोषित कर दिया। आपसी खींचतान से लोगों की समस्या जस की तस बनी रही।
7- मनोज परिदा, वर्तमान एडवाइजर
चंडीगढ़ के वर्तमान एडवाइजर मनोज परिंदा ने भी डड्डूमाजरा के बारे में सुना तो वहां जाने का मन बनाया। एडवाइजर वहां पहुंचे तो कचरे से उठने वाली दुर्गंध से समस्या का अंदाजा लगा लिया। लोगों ने कहा कि किसी तरह समस्या से निजात दिलाएं। अपने स्तर पर एडवाइजर ने भी काम शुरू किया, लेकिन समस्या का हल निकालना इतना आसान नहीं है।
8- वीपी सिंह बदनौर, गवर्नर पंजाब
अधिकारियों और जनप्रतिधियों के दफ्तरों के चक्कर लगा लगाकर थक चुके डड्डूमाजरा के लोग अब पंजाब के गवर्नर वीपी सिंह बदनौर के दरवाजे पर पहुंचे और विकराल हो चुकी समस्या से निजात दिलाने की गुहार लगाई। लोगों की अपील पर गवर्नर भी डड्डूमाजरा का हाल देखने पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों से मजाक में कहा कि यहां के इत्र की खुशबू लेने मैं भी आ गया हूं। गवर्नर के निरीक्षण के बाद भी डड्डूमाजरा की स्थिति नहीं बदली।

अधिकारियों ने पीएमओ तक को किया था गुमराह
डड्डूमाजरा के लोगों ने वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अपनी पीढ़ा बताई थी। उसके बाद पीएमओ ने नगर निगम से जबाव मांगा था। तत्कालीन एमओएच ने पीएमओ और शिकायकर्ता को पत्र लिखकर बताया कि डंपिंग ग्राउंड पर हरियाली है। प्रतिदिन कैमिकल का छिड़काव किया जाता है, लेकिन हकीकत यह थी कि वहां न कोई पौधे रोपे गए थे और न कोई छिड़काव किया जाता था।
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