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फार्मेसी काउंसिल की कार्यप्रणाली में बड़े स्तर पर बदलाव की तैयारी
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चंडीगढ़। हरियाणा राज्य फार्मेसी काउंसिल में पंजीकरण के नाम पर सामने आए भ्रष्टाचार के मामले के बाद अब हरियाणा सरकार काउंसिल की कार्यप्रणाली में आमूल चूल परिवर्तन की तैयारी में है। काउंसिल को लेकर एनएचएम के एमडी आईएएस प्रभजोत सिंह की रिपोर्ट के आधार पर अब हरियाणा सरकार ने काउंसिल में सुधार प्रक्रिया शुरू कर दी है। योजना के तहत अब काउंसिल में पंजीकरण का पूरा कार्य ही ऑनलाइन किए जाने की तैयारी है। साथ ही पंजीकरण प्रमाण पत्र देने के लिए समय अवधि तय की जाएगी। किसी का पंजीकरण रोका जाएगा तो संबंधित को इसका कारण बताया जाएगा।
मामले को खुद स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज देख रहे हैं। काउंसिल के कार्य की देखरेख के लिए एचसीएस अधिकारी योगेश मेहता को जिम्मेदारी दी गई है, जबकि फार्मेसी की उपनिदेशक दीपक मलिक को रजिस्ट्रार का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। विज ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि काउंसिल का पूरा कार्य पारदर्शी हो, साथ ही इसमें गड़बड़ी और भ्रष्टाचार की गुंजाइश ना हो। खामियों को रोकने के लिए तमाम उपाय करने समेत पूरी प्रक्रिया के लिए एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) तैयार करने को कहा गया है। इसमें अलग अलग अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय होगी। खासकर पंजीकरण के मामले को सरल और पारदर्शी करने पर फोकस रहेगा। इस समय पंजीकरण के लिए आवेदन तो आनलाइन मांगा था, लेकिन बाद में मैनुअली तौर पर फाइल जमा कराई जाती थी। इसी में गड़बड़ी होती थी। फाइल जमा कराने की न तो रसीद दी जाती थी और न ही तय समय पर पंजीकरण प्रणाण दिया जाता था। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस पर काम शुरू कर दिया है। आगामी कुछ माह में फार्मेसी काउंसिल की कार्यप्रणाली में बड़े स्तर पर बदलाव होगा।
आईएएस प्रभजोत सिंह ने 22 पेज की रिपोर्ट में की थी सिफारिशें
मुख्यमंत्री मनोहर लाल के आदेश पर एनएचएम के एमडी आईएएस प्रभजोत सिंह ने काउंसिल की ढाई माह तक जांच की थी। 22 पेज की रिपोर्ट में आईएएस ने लिखा था कि काउंसिल में पारदर्शिता नाम की कोई चीज नहीं है। लंबित पंजीकरण पर सुझाव दिया गया था कि हरियाणा के छात्रों के लिए पंजीकरण की समय सीमा एक माह तक तय की जाए और दूसरे प्रदेशों से कोर्स करने वालों के लिए तीन माह की डेडलाइन तय की जाए। साथ ही ऑनलाइन करने समेत सुधार के लिए एचसीएस अधिकारी को लगाने की भी सिफारिश की थी।
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मामले को खुद स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज देख रहे हैं। काउंसिल के कार्य की देखरेख के लिए एचसीएस अधिकारी योगेश मेहता को जिम्मेदारी दी गई है, जबकि फार्मेसी की उपनिदेशक दीपक मलिक को रजिस्ट्रार का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। विज ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि काउंसिल का पूरा कार्य पारदर्शी हो, साथ ही इसमें गड़बड़ी और भ्रष्टाचार की गुंजाइश ना हो। खामियों को रोकने के लिए तमाम उपाय करने समेत पूरी प्रक्रिया के लिए एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) तैयार करने को कहा गया है। इसमें अलग अलग अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय होगी। खासकर पंजीकरण के मामले को सरल और पारदर्शी करने पर फोकस रहेगा। इस समय पंजीकरण के लिए आवेदन तो आनलाइन मांगा था, लेकिन बाद में मैनुअली तौर पर फाइल जमा कराई जाती थी। इसी में गड़बड़ी होती थी। फाइल जमा कराने की न तो रसीद दी जाती थी और न ही तय समय पर पंजीकरण प्रणाण दिया जाता था। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस पर काम शुरू कर दिया है। आगामी कुछ माह में फार्मेसी काउंसिल की कार्यप्रणाली में बड़े स्तर पर बदलाव होगा।
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आईएएस प्रभजोत सिंह ने 22 पेज की रिपोर्ट में की थी सिफारिशें
मुख्यमंत्री मनोहर लाल के आदेश पर एनएचएम के एमडी आईएएस प्रभजोत सिंह ने काउंसिल की ढाई माह तक जांच की थी। 22 पेज की रिपोर्ट में आईएएस ने लिखा था कि काउंसिल में पारदर्शिता नाम की कोई चीज नहीं है। लंबित पंजीकरण पर सुझाव दिया गया था कि हरियाणा के छात्रों के लिए पंजीकरण की समय सीमा एक माह तक तय की जाए और दूसरे प्रदेशों से कोर्स करने वालों के लिए तीन माह की डेडलाइन तय की जाए। साथ ही ऑनलाइन करने समेत सुधार के लिए एचसीएस अधिकारी को लगाने की भी सिफारिश की थी।
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