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Panchkula News: तारीफ चेहरे की नहीं<bha>;</bha> चरित्र की होनी चाहिए... क्योंकि चेहरा बनाने में दो मिनट और चरित्र बनाने में लगता है पूरा जीवन
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पंचकूला। सेक्टर-5 के शालीमार ग्राउ़ंड में बाबा बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री की ओर से आयोजित पांच दिवसीय श्री हनुमंत कथा के दूसरे दिन मंगलवार को श्रद्धालुओं को वाचन में कहा कि तारीफ चेहरे की नहीं; चरित्र की होनी चाहिए... क्योंकि चेहरा बनाने में दो मिनट और चरित्र बनाने में लग जाता है पूरा जीवन। इसलिए हनुमान जी का चरित्र इतना अद्भुत है कि अगर किसी का बिगड़ा चरित्र हो तो सुधरे हुए व्यक्ति का चरित्र सुनने से उसका बिगड़ा हुआ चरित्र सुधर जाता है।
मंगलवार को शाम 6:30 बजे मंच पर पहुंचते की बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कथा कि शुरूआत करते हुए कहा... जा पर कृपा राम की ही, ताप पर कृपा कर ही सब कोई। राम जी की कृपा पत्थरों पर हुई तो पत्थर पानी में तैर गए, राम जी की कृपा मीरा पर हुई तो विष भी अमृत बन गया, राम जी की कृपा सूरदास पर हुई तो बिना आंखों के भी वह भगवान के कपड़ों का दर्शन कर लेते थे। राम जी की कृपा तुलसी पर हुई तो तुलसी तुलसी सब कहें तुलसी बन बन की घास और कृपा भाई प्रभु राम की सो बन गई तुलसीदास।उन्होंने बताया कि हनुमान जी लंका आए थे तो पूरी लंका जलाकर चले गए थे। अब ऐसे अनेक बंदर आ रहे हैं। अब पता नहीं क्या होने वाला है, मतलब पाकिस्तान एक ऑपरेशन सिंदूर की बहन कुरैशी वह ऑपरेशन किया विचार करो यह हाल हो गया की 9 जगह विस्फोट हो गया अब पाकिस्तान को समझ लेना चाहिए कि जब भारत की बहने इतनी खतरनाक है।
जिस दिन पंचकूला के भैया मैदान में आएंगे पाकिस्तान का क्या हाल होगा। उन्होंने कहा कि श्रीलंका में कहा गया कि एक बंदर आया था तो देखो क्या हाल हुआ। अनेक वानर आ गए तो देखो क्या होगा। लंका में बात चली थी पत्थरों का पुल बन गया है और वानर पत्थरों से जनता की तरफ आ रहे हैं। लंका के लोग बोले की पार्टी चेंज कर लो। जैसे-जैसे भविष्य जी ने की थी तो लोगों ने कहा कि करें क्या लोगों ने कहा कि यह वाला झंडा हटाओ और राम वाला झंडा लगा लो।
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धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि जब लंका के लोग रावण के पास गए कि वह लोग जादूगर हैं वह पानी में पत्थर तेरा देते हैं तो रावण ने कहा कि यह कोई बड़ी बात नहीं है मैं भी पानी में पत्थर तेरा सकता हूं ।अगले दिन सभी समुद्र किनारे इक्क्ठे हुए रावण ने अपनी कुलदेवी का आह्वान किया। राजा ने प्रजा की तरफ जाकर कहा कि जाओ पत्थर लेकर आओ तो लोगों ने सोचा कि छोटा-मोटा पत्थर क्या जब तराना ही है तो बड़ा पत्थर लेकर आते हैं, तो प्रजा बड़े-बड़े पत्थर ले आई। रावण को पसीना आ गया। रावण ने पत्थर पढ़ा हाथ लगाया कुलदेवी का आह्वान किया जितना तंत्र मंत्र शमशानी विद्या विद्या देवी की विद्या निखमाला देवी की साधना जितनी साधना जानता था रावण ने सब मंत्र को लगा दिया और जैसे ही समुद्र में पत्थर को डाला तो पत्थर पर डूब गया। लोग बोले निकल आया चमत्कार। वह डूब गया। राजा बलि चलो चलो रावण को पसीना आ गया। जिसको देख रावण से रहा नहीं गया। रावण ने सर में पानी डाला और पता नहीं क्या गुदगुदाया और वह पत्थर पानी में ऊपर आ गया और उनके पैर में लगा। प्रजा जय-जय कार कार करने लगी। ताली बजाने लगी और बोली की पार्टी बदलने की जरूरत नहीं है। अपना भी राजा किसी से काम नहीं है।
अगर वह पानी में पत्थर तैराते हैं तो हमारे लंका भी पति पानी में पत्थर तैराते हैं। रावण घर आ गया रात को जब मंदोदरी ने चरण को दबाते हुए मुस्कुराते हुए बोली स्वामी बुरा ना मानना तो एक बात पूछूं रावण बोले पूछो हमने सुना आपने आज पानी में पत्थर तेरा दिया। सब चर्चा कर रहे हैं, रावण बोले बिल्कुल। मंदोदरी बोली क्षमा करना हमें पता है आपके कौन-कौन सी शक्ति है। कौन-कौन सा मंत्र है पर ऐसी कोई शक्ति या मंत्र है तुम में पत्थर को तेरा सको।
बुरा ना मानो ऐसी कोई देवी नहीं है तुम्हारे पास जो पानी में पत्थर तैरा सके। तो उसने कहा कि आप मुझे बताएं कि पानी में पत्थर कैसे तैराए। रावण उठकर बैठ गया आंखों से आंसू बहने लगे। रावण ने कहा मंदोदरी तुम सच कहती हो मेरे पास कोई शक्ति नहीं हैं। मेरे पास कोई मंत्र नहीं है। लेकिन मैने तो जोर-जर्ष में कह दिया कि मैं पानी में पत्थर तरा दूंगा।
पानी में पत्थर डूब गया मेरी नाक कट गई और मैंने पानी में सर डालकर पत्थर से कहा पत्थर तुझे राजा राम की सौगंध है मेरी नाक बचाने के लिए ऊपर आजा और वह पत्थर ऊपर आ गया। हम बताना चाहते हैं कि रहे हैं राम कि कृपा क्या होती है। यह राम जी की कृपा होती है कि दुश्मन भी अपना काम चला ले।
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मंगलवार को शाम 6:30 बजे मंच पर पहुंचते की बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कथा कि शुरूआत करते हुए कहा... जा पर कृपा राम की ही, ताप पर कृपा कर ही सब कोई। राम जी की कृपा पत्थरों पर हुई तो पत्थर पानी में तैर गए, राम जी की कृपा मीरा पर हुई तो विष भी अमृत बन गया, राम जी की कृपा सूरदास पर हुई तो बिना आंखों के भी वह भगवान के कपड़ों का दर्शन कर लेते थे। राम जी की कृपा तुलसी पर हुई तो तुलसी तुलसी सब कहें तुलसी बन बन की घास और कृपा भाई प्रभु राम की सो बन गई तुलसीदास।उन्होंने बताया कि हनुमान जी लंका आए थे तो पूरी लंका जलाकर चले गए थे। अब ऐसे अनेक बंदर आ रहे हैं। अब पता नहीं क्या होने वाला है, मतलब पाकिस्तान एक ऑपरेशन सिंदूर की बहन कुरैशी वह ऑपरेशन किया विचार करो यह हाल हो गया की 9 जगह विस्फोट हो गया अब पाकिस्तान को समझ लेना चाहिए कि जब भारत की बहने इतनी खतरनाक है।
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जिस दिन पंचकूला के भैया मैदान में आएंगे पाकिस्तान का क्या हाल होगा। उन्होंने कहा कि श्रीलंका में कहा गया कि एक बंदर आया था तो देखो क्या हाल हुआ। अनेक वानर आ गए तो देखो क्या होगा। लंका में बात चली थी पत्थरों का पुल बन गया है और वानर पत्थरों से जनता की तरफ आ रहे हैं। लंका के लोग बोले की पार्टी चेंज कर लो। जैसे-जैसे भविष्य जी ने की थी तो लोगों ने कहा कि करें क्या लोगों ने कहा कि यह वाला झंडा हटाओ और राम वाला झंडा लगा लो।
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धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि जब लंका के लोग रावण के पास गए कि वह लोग जादूगर हैं वह पानी में पत्थर तेरा देते हैं तो रावण ने कहा कि यह कोई बड़ी बात नहीं है मैं भी पानी में पत्थर तेरा सकता हूं ।अगले दिन सभी समुद्र किनारे इक्क्ठे हुए रावण ने अपनी कुलदेवी का आह्वान किया। राजा ने प्रजा की तरफ जाकर कहा कि जाओ पत्थर लेकर आओ तो लोगों ने सोचा कि छोटा-मोटा पत्थर क्या जब तराना ही है तो बड़ा पत्थर लेकर आते हैं, तो प्रजा बड़े-बड़े पत्थर ले आई। रावण को पसीना आ गया। रावण ने पत्थर पढ़ा हाथ लगाया कुलदेवी का आह्वान किया जितना तंत्र मंत्र शमशानी विद्या विद्या देवी की विद्या निखमाला देवी की साधना जितनी साधना जानता था रावण ने सब मंत्र को लगा दिया और जैसे ही समुद्र में पत्थर को डाला तो पत्थर पर डूब गया। लोग बोले निकल आया चमत्कार। वह डूब गया। राजा बलि चलो चलो रावण को पसीना आ गया। जिसको देख रावण से रहा नहीं गया। रावण ने सर में पानी डाला और पता नहीं क्या गुदगुदाया और वह पत्थर पानी में ऊपर आ गया और उनके पैर में लगा। प्रजा जय-जय कार कार करने लगी। ताली बजाने लगी और बोली की पार्टी बदलने की जरूरत नहीं है। अपना भी राजा किसी से काम नहीं है।
अगर वह पानी में पत्थर तैराते हैं तो हमारे लंका भी पति पानी में पत्थर तैराते हैं। रावण घर आ गया रात को जब मंदोदरी ने चरण को दबाते हुए मुस्कुराते हुए बोली स्वामी बुरा ना मानना तो एक बात पूछूं रावण बोले पूछो हमने सुना आपने आज पानी में पत्थर तेरा दिया। सब चर्चा कर रहे हैं, रावण बोले बिल्कुल। मंदोदरी बोली क्षमा करना हमें पता है आपके कौन-कौन सी शक्ति है। कौन-कौन सा मंत्र है पर ऐसी कोई शक्ति या मंत्र है तुम में पत्थर को तेरा सको।
बुरा ना मानो ऐसी कोई देवी नहीं है तुम्हारे पास जो पानी में पत्थर तैरा सके। तो उसने कहा कि आप मुझे बताएं कि पानी में पत्थर कैसे तैराए। रावण उठकर बैठ गया आंखों से आंसू बहने लगे। रावण ने कहा मंदोदरी तुम सच कहती हो मेरे पास कोई शक्ति नहीं हैं। मेरे पास कोई मंत्र नहीं है। लेकिन मैने तो जोर-जर्ष में कह दिया कि मैं पानी में पत्थर तरा दूंगा।
पानी में पत्थर डूब गया मेरी नाक कट गई और मैंने पानी में सर डालकर पत्थर से कहा पत्थर तुझे राजा राम की सौगंध है मेरी नाक बचाने के लिए ऊपर आजा और वह पत्थर ऊपर आ गया। हम बताना चाहते हैं कि रहे हैं राम कि कृपा क्या होती है। यह राम जी की कृपा होती है कि दुश्मन भी अपना काम चला ले।