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पंजाब में क्वांरटीन मरीजों के घरों के बाहर नहीं लगेंगे पोस्टर, सरकार ने फैसला वापस लिया

Fri, 04 Sep 2020 08:42 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Fri, 04 Sep 2020 08:42 PM IST
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Posters will no longer be held outside the homes of patients living in quarantine
कैप्टन अमरिंदर सिंह (फाइल फोटो) - फोटो : एएनआई

पंजाब में घरेलू एकांतवास में रह रहे कोविड के मरीजों को अब सामाजिक भेदभाव से डरने की जरूरत नहीं रहेगी, जिसका सामना उन्हें उनके घरों के बाहर पोस्टर चिपकाए जाने के कारण करना पड़ रहा था। इस भेदभाव को दूर करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शुक्रवार को अपनी सरकार के उस फैसले को वापस ले लिया, जिसके तहत घरेलू एकांतवास में रह रहे कोविड के मरीजों के घरों के बाहर पोस्टर चिपकाए जाते थे।

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मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि पहले लगाए गए पोस्टर भी हटा लिए जाएं। उन्होंने कहा कि यह कदम उठाने का मकसद ऐसे मरीजों के प्रति पोस्टरों के कारण पैदा होने वाले भेदभाव को दूर करना है। इसके अलावा जांच करवाए जाने के डर को भी दूर करना है। मुख्यमंत्री ने एक बार फिर से लोगों से अपील की कि वह कोविड के इलाज के लिए जल्द अपनी जांच करवाएं ताकि इस बीमारी का पहले ही पता चल सके और सही तरह इलाज हो सके।
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उन्होंने कहा कि इन पोस्टरों के कारण मरीजों को मानसिक तौर पर परेशानी का सामना करते हुए देखा गया है। इस कारण इन पोस्टरों को चस्पा करने का प्रारंभिक मकसद, जोकि पड़ोसियों और अन्य ऐसे मरीजों को बचाना था, पूरा नहीं हो पा रहा है, बल्कि इन पोस्टरों के कारण लोग जांच करवाने से भाग रहे थे। कैप्टन ने कहा कि इन पोस्टरों के साथ सामाजिक अलगाव और भेदभाव जैसे अनचाहे और अनपेक्षित नतीजों के कारण मरीजों को चिंता और पक्षपात का सामना करना पड़ता था।
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एकांतवास संबंधी हिदायतें जारी रहेंगी
मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि वह निरंतर जरूरी ऐहतियात बरतते रहें और पोस्टरों को हटाने के बावजूद घरेलू एकांतवास संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करते रहें। हिदायतों का उल्लंघन डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट, एपीडेमिक डिजीज एक्ट और आईपीसी के अंतर्गत दंडनीय अपराध है।

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