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Panchkula News: 43 साल में आबादी तो बढ़ी लेकिन पांच में से दो ट्यूबवेल हुए खराब, अब कैसे बुझे लोगों की प्यास
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माई सिटी रिपोर्टर पंचकूला। गर्मी की शुरुआत हो गई है। अब अधिकारियों की लापरवाही जनता पर भारी पड़ने लगी है। सेक्टर-10 में पहली और दूसरी मंजिल पर रहने वाले लोगों के घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। यहां पांच ट्यूबवेलों में से दो खराब पड़े हैं। एचएसवीपी तीन ट्यूबवेलों से पानी की सप्लाई कर रहा है। एक ट्यूबवेल में पानी का स्तर नीचे जाने के कारण उस पर ताला जड़ दिया है। एक ट्यूबवेल की मोटर खराब हो गई है। सेक्टर में पानी के ट्यूबवेल की मोटर पुरानी होने के कारण बार-बार खराब हो जाती है। इसलिए हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण से मांग है कि इनपर लगी पुरानी मोटरों को बदलकर नई मोटर लगाई जानी चाहिए। ट्यूबवेलों की संख्या में भी इजाफा होनी चाहिए, क्योंकि सेक्टर 1980 में विकसित हुआ था। सेक्टर में करीब 1352 मकान हैं। 43 सालों में आबादी भी कई गुना बढ़ी है, लेकिन सुविधा में इजाफा नहीं हुआ है। स्थानीय लोगों की माने तो पुराने सेक्टरों में स्टिल्ट प्लस फोर का नियम लाकर विभाग ने पेयजल की समस्या और बढ़ा दी है।
क्लोरीनेशन प्लांट बंद, ब्लीचिंग पाउडर का हो रहा उपयोग
पिछले काफी समय से सेक्टर-10 के ट्यूबवेलों का क्लोरीनेशन प्लांट बंद पड़ा है। वर्तमान में विभाग के मुलाजिम ब्लीचिंग पाउडर का उपयोग कर रहे हैं। इसका खुलासा अमर उजाला की रियलिटी चेक में हुआ है। 25 किलो के बैग से करीब 35 फीसदी क्लोरीन की मात्रा मिलती है। इसके अलावा चूना या एलम का उपयोग किया जा रहा। इसके जरिए पानी को शुद्ध किया जा रहा। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक पेयजल में क्लोरीन की मात्रा .2-.4 पीपीएम होनी चाहिए। यह मानक सप्लाई स्थल की शुरुआत का है। अंतिम छोर के इलाकों में पानी के पहुंचने तक यह स्वत: कम हो जाती है। इन सभी मानकों की जांच होनी चाहिए। स्थानीय लोगों की मांग है कि पेयजल की सप्लाई से पहले हार्डनेस, कैल्शियम, मैग्निशयम, आयरन, फ्लोराइड, सल्फेट, क्लोराइड और टीडीएस की भी जांच होनी चाहिए। ये पानी में अनिवार्य तत्व हैं।
सेक्टर-10 के पहली और दूसरी मंजिल तक पानी नहीं पहुंच पाता। पांच सालों से सेक्टर में पेजयल की समस्या बरकरार है। 40 सालों में सेक्टर की आबादी बढ़ी है। यहां 1352 मकान हैं, करीब 12 हजार लोग यहां रहते हैं, लेकिन एचएसवीपी ने समय के साथ पेयजल सप्लाई की व्यवस्था में सुधार नहीं किया है। - विजय शर्मा, महासचिव कंज्यूमर एसोसिएशन पंचकूला।
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पेयजल का सही तरीके से क्लोरीनेशन नहीं हो रहा है। ट्यूबवेलों में लगे क्लोरीनेशन प्लांट बंद पड़े हैं। ब्लीचिंग पाउडर का इस्तेमाल किया जा रहा है। पानी लोगों को कितना शुद्ध मिल रहा है, यह जांच का विषय है। - एनसी राणा, सेक्टर-10, निवासी मकान नंबर 601 पंचकूला।
पांच सालों से सेक्टर के अंदर लोग पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं। उल्टा स्टिल्ट प्लस फोर भवनों को निर्माण की मंजूरी देकर समस्या और ज्यादा बढ़ा दी है। सेक्टर के अंदर दो ट्यूबवेल खराब पड़े हैं। इसके चलते समस्या और ज्यादा गहरा गई है। - डॉ. वैभव, निवासी सेक्टर-10 पंचकूला।
सेक्टर-10 में 1995 से रह रहा हूं। यहां पानी में शोरा बहुत ज्यादा है। साल में तीन से चार बार पानी का पाइप लाइन जाम होने के कारण प्लंबर बुलाना पड़ता है। यहां पानी का दबाव इतना कम है कि पहली और दूसरी मंजिल पर पानी चढ़ता ही नहीं है। - सुरेश गोपाल, सेक्टर-10 निवासी पंचकूला।
पांच सालों में पेयजल की समस्या ज्यादा बढ़ गई है। यहां पानी का दबाव कम रहने का मुख्य कारण बढ़ती आबादी के अनुसार पेयजल सप्लाई के लिए पर्याप्त व्यवस्था का नहीं होना है। - राकेश कपूर, वाइस प्रेसिडेंट, कंज्यूमर एसोसिएशन, पंचकूला।
एचएसवीपी का काम लोगों के घरों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने का है। विभाग उसे कर रहा है। पहली और दूसरी मंजिल तक पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी विभाग की नहीं है। गर्मी के दिनों में तोड़ी बहुत समस्या आती है। इसकी शिकायत के बाद समय-समय पर समाधान किया जाता है। - जगदेव सिंह, जेई, एचएसवीपी हरियाणा।
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क्लोरीनेशन प्लांट बंद, ब्लीचिंग पाउडर का हो रहा उपयोग
पिछले काफी समय से सेक्टर-10 के ट्यूबवेलों का क्लोरीनेशन प्लांट बंद पड़ा है। वर्तमान में विभाग के मुलाजिम ब्लीचिंग पाउडर का उपयोग कर रहे हैं। इसका खुलासा अमर उजाला की रियलिटी चेक में हुआ है। 25 किलो के बैग से करीब 35 फीसदी क्लोरीन की मात्रा मिलती है। इसके अलावा चूना या एलम का उपयोग किया जा रहा। इसके जरिए पानी को शुद्ध किया जा रहा। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक पेयजल में क्लोरीन की मात्रा .2-.4 पीपीएम होनी चाहिए। यह मानक सप्लाई स्थल की शुरुआत का है। अंतिम छोर के इलाकों में पानी के पहुंचने तक यह स्वत: कम हो जाती है। इन सभी मानकों की जांच होनी चाहिए। स्थानीय लोगों की मांग है कि पेयजल की सप्लाई से पहले हार्डनेस, कैल्शियम, मैग्निशयम, आयरन, फ्लोराइड, सल्फेट, क्लोराइड और टीडीएस की भी जांच होनी चाहिए। ये पानी में अनिवार्य तत्व हैं।
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सेक्टर-10 के पहली और दूसरी मंजिल तक पानी नहीं पहुंच पाता। पांच सालों से सेक्टर में पेजयल की समस्या बरकरार है। 40 सालों में सेक्टर की आबादी बढ़ी है। यहां 1352 मकान हैं, करीब 12 हजार लोग यहां रहते हैं, लेकिन एचएसवीपी ने समय के साथ पेयजल सप्लाई की व्यवस्था में सुधार नहीं किया है। - विजय शर्मा, महासचिव कंज्यूमर एसोसिएशन पंचकूला।
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पेयजल का सही तरीके से क्लोरीनेशन नहीं हो रहा है। ट्यूबवेलों में लगे क्लोरीनेशन प्लांट बंद पड़े हैं। ब्लीचिंग पाउडर का इस्तेमाल किया जा रहा है। पानी लोगों को कितना शुद्ध मिल रहा है, यह जांच का विषय है। - एनसी राणा, सेक्टर-10, निवासी मकान नंबर 601 पंचकूला।
पांच सालों से सेक्टर के अंदर लोग पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं। उल्टा स्टिल्ट प्लस फोर भवनों को निर्माण की मंजूरी देकर समस्या और ज्यादा बढ़ा दी है। सेक्टर के अंदर दो ट्यूबवेल खराब पड़े हैं। इसके चलते समस्या और ज्यादा गहरा गई है। - डॉ. वैभव, निवासी सेक्टर-10 पंचकूला।
सेक्टर-10 में 1995 से रह रहा हूं। यहां पानी में शोरा बहुत ज्यादा है। साल में तीन से चार बार पानी का पाइप लाइन जाम होने के कारण प्लंबर बुलाना पड़ता है। यहां पानी का दबाव इतना कम है कि पहली और दूसरी मंजिल पर पानी चढ़ता ही नहीं है। - सुरेश गोपाल, सेक्टर-10 निवासी पंचकूला।
पांच सालों में पेयजल की समस्या ज्यादा बढ़ गई है। यहां पानी का दबाव कम रहने का मुख्य कारण बढ़ती आबादी के अनुसार पेयजल सप्लाई के लिए पर्याप्त व्यवस्था का नहीं होना है। - राकेश कपूर, वाइस प्रेसिडेंट, कंज्यूमर एसोसिएशन, पंचकूला।
एचएसवीपी का काम लोगों के घरों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने का है। विभाग उसे कर रहा है। पहली और दूसरी मंजिल तक पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी विभाग की नहीं है। गर्मी के दिनों में तोड़ी बहुत समस्या आती है। इसकी शिकायत के बाद समय-समय पर समाधान किया जाता है। - जगदेव सिंह, जेई, एचएसवीपी हरियाणा।