{"_id":"5db9f4f48ebc3e01816744ea","slug":"pollution-increased-again-after-some-relief-panchkula-news-pkl355326331","type":"story","status":"publish","title_hn":"चंडीगढ़ः कुछ राहत के बाद फिर बढ़ गया प्रदूषण, ये सावधानियां बरतेंगे तो बचाव होता रहेगा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चंडीगढ़ः कुछ राहत के बाद फिर बढ़ गया प्रदूषण, ये सावधानियां बरतेंगे तो बचाव होता रहेगा
Thu, 31 Oct 2019 11:49 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Thu, 31 Oct 2019 11:49 AM IST
विज्ञापन
फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदूषण के स्तर से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। सेक्टर 50 व सेक्टर 25 में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 250 से 290 के बीच रिकार्ड किया गया है, जो मंगलवार के मुकाबले अधिक है। एक्यूआई की यह श्रेणी खराब में गिनी जाती है। एक दिन पहले सेक्टर 50 में एयरक्वालिटी इंडेक्स 129 था, जबकि बुधवार को बढ़कर 290 रिकार्ड किया गया।
पर्यावरण विशेषज्ञों के मुताबिक राहत की उम्मीद मौसम पर ही निर्भर करेगी। मौसम में अभी नमी बनी हुई है और अरब सागर में साइक्लोन एक्टिव हो रहा है। इसका भी असर चंडीगढ़ सहित पूरे उत्तर भारत में बना रहेगा। इससे बादल छाए रहेंगे और जब तक बादल रहेंगे, तब तक प्रदूषण के कणों से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।
पर्यावरण विशेषज्ञ व पीजीआई के स्कूल आफ पब्लिक हेल्थ के एनवायरनमेंट विंग के एडिशनल प्रोफेसर डा. रविंद्रा खैवाल के मुताबिक प्रदूषण बढ़ाने में सेकेंडरी प्रदूषण के कण भी अहम रोल निभा रहे हैं। उनके मुताबिक जब प्रदूषण के प्राइमरी स्रोत सूरज की किरणों और नमी की मौजूदगी में क्रिया करते हैं तो सेकेंडरी प्रदूषण के कण भी उत्पन्न होते हैं।
विज्ञापन
इस वजह से भी एयरक्वालिटी इंडेक्स खराब होती है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण बढ़ने के एक साथ कई कारण हैं, जिससे हवा खराब हुई है। इसमें दिवाली की रात बजाए गए पटाखे, गाड़ियों से निकलने वाला एग्जास्ट व नॉन एग्जास्ट धुआं, सेकेंडरी पॉल्यूटेंट, तापमान का गिरना और पराली का जलना शामिल है।
प्रदूषण नियंत्रण कमेटी के मुताबिक, एक्यूआई 0 से 50 के बीच होने पर ‘अच्छा’ होता है, जबकि 51 से 100 के बीच होने पर ‘संतोषजनक’, 101 से 200 के बीच ‘मध्यम’, 201 से 300 के बीच ‘खराब’, 301 और 400 के बीच ‘बहुत खराब’ और 401 और 500 के बीच होने पर उसे ‘गंभीर’ समझा जाता है। दिवाली के दिन कई जगह एक्यूआई 300 से ऊपर दर्ज किया गया था, जो गंभीर की श्रेणी में आता है।
ये सावधानी बरतें
प्रदूषण के वक्त मुंह पर मास्क लगाकर निकलें
रात के वक्त गुनगुने पानी से गरारा करें
ज्यादा संक्रमण होने पर भाप भी ले सकते हैं
बुखार आने पर पास के डॉक्टर को दिखाएं
विज्ञापन
पर्यावरण विशेषज्ञों के मुताबिक राहत की उम्मीद मौसम पर ही निर्भर करेगी। मौसम में अभी नमी बनी हुई है और अरब सागर में साइक्लोन एक्टिव हो रहा है। इसका भी असर चंडीगढ़ सहित पूरे उत्तर भारत में बना रहेगा। इससे बादल छाए रहेंगे और जब तक बादल रहेंगे, तब तक प्रदूषण के कणों से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।
विज्ञापन
पर्यावरण विशेषज्ञ व पीजीआई के स्कूल आफ पब्लिक हेल्थ के एनवायरनमेंट विंग के एडिशनल प्रोफेसर डा. रविंद्रा खैवाल के मुताबिक प्रदूषण बढ़ाने में सेकेंडरी प्रदूषण के कण भी अहम रोल निभा रहे हैं। उनके मुताबिक जब प्रदूषण के प्राइमरी स्रोत सूरज की किरणों और नमी की मौजूदगी में क्रिया करते हैं तो सेकेंडरी प्रदूषण के कण भी उत्पन्न होते हैं।
विज्ञापन
इस वजह से भी एयरक्वालिटी इंडेक्स खराब होती है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण बढ़ने के एक साथ कई कारण हैं, जिससे हवा खराब हुई है। इसमें दिवाली की रात बजाए गए पटाखे, गाड़ियों से निकलने वाला एग्जास्ट व नॉन एग्जास्ट धुआं, सेकेंडरी पॉल्यूटेंट, तापमान का गिरना और पराली का जलना शामिल है।
प्रदूषण नियंत्रण कमेटी के मुताबिक, एक्यूआई 0 से 50 के बीच होने पर ‘अच्छा’ होता है, जबकि 51 से 100 के बीच होने पर ‘संतोषजनक’, 101 से 200 के बीच ‘मध्यम’, 201 से 300 के बीच ‘खराब’, 301 और 400 के बीच ‘बहुत खराब’ और 401 और 500 के बीच होने पर उसे ‘गंभीर’ समझा जाता है। दिवाली के दिन कई जगह एक्यूआई 300 से ऊपर दर्ज किया गया था, जो गंभीर की श्रेणी में आता है।
ये सावधानी बरतें
प्रदूषण के वक्त मुंह पर मास्क लगाकर निकलें
रात के वक्त गुनगुने पानी से गरारा करें
ज्यादा संक्रमण होने पर भाप भी ले सकते हैं
बुखार आने पर पास के डॉक्टर को दिखाएं