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Panchkula News: प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नौ स्क्रीनिंग प्लांटों को भेजा नोटिस
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दीपक शाही
पंचकूला। एनजीटी की सख्ती के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जिले के नौ स्क्रीनिंग प्लांटों को नोटिस भेजा है। इनमें खेतपुराली के सात और कालका नानकपुर के दो स्क्रीनिंग प्लांट शामिल हैं। इस कार्रवाई से जिले के क्रशर जोन में हड़कंप मच गया है। 15 दिन में नोटिस का जवाब न देने वालों के खिलाफ बोर्ड की तरफ से कार्रवाई की जाएगी। बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि क्रशर जोन की स्थिति को ठीक करने के लिए कार्रवाई की जाएगी। 15 दिन के भीतर स्क्रीनिंग प्लांट संचालकों ने मानक पूरे नहीं किए तो 6500 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से बोर्ड जुर्माना लगाए। उसके 15 दिन बाद भी सुधार नहीं हुआ तो स्क्रीनिंग प्लांटों को सील कर दिया जाएगा। इससे पहले बोर्ड की ओर से दो माह पहले रायपुररानी के पांच स्क्रीनिंग प्लांटों को सील किया जा चुका है।
रास्तों पर उड़ती रहती है मिट्टी
खेतपुराली और कालका में लगे सभी स्क्रीनिंग प्लांट और स्टोन क्रशरों के रास्तों पर मिट्टी उड़ती रहती है। यह नियमों के हिसाब से नहीं होनी चाहिए। पानी गिराने की जिम्मेवारी उस एरिया के स्टोन क्रशर मालिकों की होती है। सभी प्लांट्स और स्टोन क्रशर संचालकों ने नियमों का ख्याल रखना ही छोड़ दिया है। ऐसे में सभी जगहों पर नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। क्रशर, प्लांट्स के संचालकों ने खनन विभाग से लेकर पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के सभी नियमों की अवहेलना कर रहे हैं। रात के समय इन स्टोन क्रशरों और स्क्रीनिंग प्लांट्स की बैक साइड से अवैध खनन कर करोड़ों रुपये का ग्रेवल भेजा जाता है। इन प्लांट्स पर बिना रिकॉर्ड के स्टॉक पड़ा रहता है, जो पक्के ग्राउंड एरिया में नहीं गिराया जाता है। साथ ही बिना वाॅटर रीसाइकिलिंग प्लांट के काम हो रहा है।
नोटिस में बोर्ड ने क्या कहा
प्रदूषण बोर्ड की तरफ से जारी नोटिस से स्क्रीनिंग प्लांट मालिकों में खलबली मच गई है। कई प्लांटों में रि-सर्कुलेशन के लिए वाटर स्टोरेज टैंक भी नहीं है। स्क्रीनिंग प्लांटों में दिन-रात बजरी को साफ करने काम चलता है। अधिकांश स्क्रीनिंग प्लांट बोर्ड के नियमों का पालन नहीं करते। इस कारण प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। नोटिस में स्क्रीनिंग प्लांट के मालिकों से टैंकों को स्थापित करने, वाशिंग सेक्शन से पानी के रि-सर्कुलेशन की व्यवस्था, प्लांट की परिधि के साथ पर्याप्त प्लांटेशन और परिसर में रोड की जानकारी उपलब्ध कराने को कहा गया है। ऐसा न करने वाले प्लांट संचालकों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
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ये मानक पूरे होने चाहिए
- धूल कणों को रोकने के लिए हरी पट्टी विकसित करनी अनिवार्य है।
- प्लांट परिसर में पक्की सड़क होनी चाहिए।
- पानी के लिए रि-सर्कुलेशन सिस्टम होना चाहिए।
- चारों तरफ बड़ी दीवार होनी चाहिए।
- धूल के कणों का कम उत्सर्जन होना जरूरी।
- टेंपर प्रूफ इलेक्ट्रॉनिक मीटर लगाना जरूरी है।
- दोहरी प्रवेश सिस्टम के तहत समस्त वित्तीय लेखों को रखना अनिवार्य।
जिले की नौ स्क्रीनिंग प्लांटों को नोटिस भेजकर स्थिति ठीक करने के आदेश दिए हैं। प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण अधिनियम 1974 की धारा 33-ए और वायु प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण अधिनियम 1981 की धारा 31-ए के तहत नोटिस जारी किए गए हैं। 15 दिन के अंदर प्लांट संचालक को प्रदूषण रोकने के उपाय की जानकारी देनी होगी। अगर इन स्क्रीनिंग प्लांट संचालकों ने नोटिस का जवाब नहीं दिया तो उन्हें आगे कोई नोटिस दिए बिना ही कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। - सुधीर मोहन, क्षेत्रीय अधिकारी, हरियाणा स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड
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पंचकूला। एनजीटी की सख्ती के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जिले के नौ स्क्रीनिंग प्लांटों को नोटिस भेजा है। इनमें खेतपुराली के सात और कालका नानकपुर के दो स्क्रीनिंग प्लांट शामिल हैं। इस कार्रवाई से जिले के क्रशर जोन में हड़कंप मच गया है। 15 दिन में नोटिस का जवाब न देने वालों के खिलाफ बोर्ड की तरफ से कार्रवाई की जाएगी। बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि क्रशर जोन की स्थिति को ठीक करने के लिए कार्रवाई की जाएगी। 15 दिन के भीतर स्क्रीनिंग प्लांट संचालकों ने मानक पूरे नहीं किए तो 6500 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से बोर्ड जुर्माना लगाए। उसके 15 दिन बाद भी सुधार नहीं हुआ तो स्क्रीनिंग प्लांटों को सील कर दिया जाएगा। इससे पहले बोर्ड की ओर से दो माह पहले रायपुररानी के पांच स्क्रीनिंग प्लांटों को सील किया जा चुका है।
रास्तों पर उड़ती रहती है मिट्टी
खेतपुराली और कालका में लगे सभी स्क्रीनिंग प्लांट और स्टोन क्रशरों के रास्तों पर मिट्टी उड़ती रहती है। यह नियमों के हिसाब से नहीं होनी चाहिए। पानी गिराने की जिम्मेवारी उस एरिया के स्टोन क्रशर मालिकों की होती है। सभी प्लांट्स और स्टोन क्रशर संचालकों ने नियमों का ख्याल रखना ही छोड़ दिया है। ऐसे में सभी जगहों पर नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। क्रशर, प्लांट्स के संचालकों ने खनन विभाग से लेकर पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के सभी नियमों की अवहेलना कर रहे हैं। रात के समय इन स्टोन क्रशरों और स्क्रीनिंग प्लांट्स की बैक साइड से अवैध खनन कर करोड़ों रुपये का ग्रेवल भेजा जाता है। इन प्लांट्स पर बिना रिकॉर्ड के स्टॉक पड़ा रहता है, जो पक्के ग्राउंड एरिया में नहीं गिराया जाता है। साथ ही बिना वाॅटर रीसाइकिलिंग प्लांट के काम हो रहा है।
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नोटिस में बोर्ड ने क्या कहा
प्रदूषण बोर्ड की तरफ से जारी नोटिस से स्क्रीनिंग प्लांट मालिकों में खलबली मच गई है। कई प्लांटों में रि-सर्कुलेशन के लिए वाटर स्टोरेज टैंक भी नहीं है। स्क्रीनिंग प्लांटों में दिन-रात बजरी को साफ करने काम चलता है। अधिकांश स्क्रीनिंग प्लांट बोर्ड के नियमों का पालन नहीं करते। इस कारण प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। नोटिस में स्क्रीनिंग प्लांट के मालिकों से टैंकों को स्थापित करने, वाशिंग सेक्शन से पानी के रि-सर्कुलेशन की व्यवस्था, प्लांट की परिधि के साथ पर्याप्त प्लांटेशन और परिसर में रोड की जानकारी उपलब्ध कराने को कहा गया है। ऐसा न करने वाले प्लांट संचालकों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
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ये मानक पूरे होने चाहिए
- धूल कणों को रोकने के लिए हरी पट्टी विकसित करनी अनिवार्य है।
- प्लांट परिसर में पक्की सड़क होनी चाहिए।
- पानी के लिए रि-सर्कुलेशन सिस्टम होना चाहिए।
- चारों तरफ बड़ी दीवार होनी चाहिए।
- धूल के कणों का कम उत्सर्जन होना जरूरी।
- टेंपर प्रूफ इलेक्ट्रॉनिक मीटर लगाना जरूरी है।
- दोहरी प्रवेश सिस्टम के तहत समस्त वित्तीय लेखों को रखना अनिवार्य।
जिले की नौ स्क्रीनिंग प्लांटों को नोटिस भेजकर स्थिति ठीक करने के आदेश दिए हैं। प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण अधिनियम 1974 की धारा 33-ए और वायु प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण अधिनियम 1981 की धारा 31-ए के तहत नोटिस जारी किए गए हैं। 15 दिन के अंदर प्लांट संचालक को प्रदूषण रोकने के उपाय की जानकारी देनी होगी। अगर इन स्क्रीनिंग प्लांट संचालकों ने नोटिस का जवाब नहीं दिया तो उन्हें आगे कोई नोटिस दिए बिना ही कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। - सुधीर मोहन, क्षेत्रीय अधिकारी, हरियाणा स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड