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प्लॉट आवंटन मामला : सात लोगों ने स्वयं को आरोप मुक्त करने की अर्जी दी, ईडी की विशेष अदालत में सुनवाई के दौरान पूर्व सीएम हुड्डा समेत सभी 22 आरोपी हाजिर हुए
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पंचकूला। प्लॉट आवंटन मामले में सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की विशेष अदालत में सुनवाई हुई। इस दौरान हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा सहित सभी 22 आरोपी कोर्ट में पेश हुए। इस दौरान सात लोगों की तरफ से प्लॉट आवंटन मामले में खुद को आरोप मुक्त करने की अर्जी दी गई। इस पर बहस जारी रही। वहीं ईडी की तरफ से भी वकीलों ने बहस की। इस दौरान ईडी की विशेष अदालत में आरोप तय करने को लेकर भी बहस की गई। इस मामले में अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी।
इस मामले में पिछली सुनवाई के दौरान पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा की तरफ से पेशी में आने की छूट मांगी गई थी। इसके बाद इसे कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया था। वही सिद्धार्थ भारद्वाज को नियमित जमानत दे दी गई। इस मामले में आरोपी पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के अलावा आईएएस धर्मपाल सिंह नागल, सुरजीत सिंह, सुभाष चंद्र कंसल, नरेंद्र सिंह सोलंकी, रेनू हुड्डा, नंदिता हुड्डा, मोना बेरी, प्रदीप कुमार, कंवरप्रीत सिंह संधू, डागर कत्याल, डॉ. गणेश दत्त, अमन गुप्ता, लेफ्टिनेंट कर्नल रिटायर्ड ओपी दहिया, मनजोत कौर, वाईपीटी एंटरटेनमेंट हाउस प्रा. लिमिटेड के सिद्धार्थ भारद्वाज, भारत भूषण तनेजा, अनुपम सूद सहित सभी लोग अदालत में पेश हुए।
यह है मामला
दायर चार्जशीट के मुताबिक हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और अन्य पर आरोप है कि उन्होंने 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के परिचितों को 30.34 करोड़ रुपये में 14 औद्योगिक भूखंडों को गलत तरीके से आवंटित किया था। आरोप पत्र में चार सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शामिल हैं। ईडी ने हरियाणा सतर्कता ब्यूरो द्वारा एक प्राथमिकी के आधार पर 2015 में जांच शुरू की थी। प्राथमिकी को 2016 में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने ईडी को केस जांच के लिए ट्रांसफर किया था। ईडी की तरफ से इस मामले की जांच करने के बाद पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा सहित चार आईएएस अधिकारियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की 120-बी, 201, 204, 409, 420, 467, 468, 471, 13 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था।
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इस मामले में पिछली सुनवाई के दौरान पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा की तरफ से पेशी में आने की छूट मांगी गई थी। इसके बाद इसे कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया था। वही सिद्धार्थ भारद्वाज को नियमित जमानत दे दी गई। इस मामले में आरोपी पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के अलावा आईएएस धर्मपाल सिंह नागल, सुरजीत सिंह, सुभाष चंद्र कंसल, नरेंद्र सिंह सोलंकी, रेनू हुड्डा, नंदिता हुड्डा, मोना बेरी, प्रदीप कुमार, कंवरप्रीत सिंह संधू, डागर कत्याल, डॉ. गणेश दत्त, अमन गुप्ता, लेफ्टिनेंट कर्नल रिटायर्ड ओपी दहिया, मनजोत कौर, वाईपीटी एंटरटेनमेंट हाउस प्रा. लिमिटेड के सिद्धार्थ भारद्वाज, भारत भूषण तनेजा, अनुपम सूद सहित सभी लोग अदालत में पेश हुए।
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यह है मामला
दायर चार्जशीट के मुताबिक हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और अन्य पर आरोप है कि उन्होंने 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के परिचितों को 30.34 करोड़ रुपये में 14 औद्योगिक भूखंडों को गलत तरीके से आवंटित किया था। आरोप पत्र में चार सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शामिल हैं। ईडी ने हरियाणा सतर्कता ब्यूरो द्वारा एक प्राथमिकी के आधार पर 2015 में जांच शुरू की थी। प्राथमिकी को 2016 में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने ईडी को केस जांच के लिए ट्रांसफर किया था। ईडी की तरफ से इस मामले की जांच करने के बाद पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा सहित चार आईएएस अधिकारियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की 120-बी, 201, 204, 409, 420, 467, 468, 471, 13 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था।
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