{"_id":"62aa44d7f205b24d160c1525","slug":"play-i-am-not-the-girl-of-haryana-pkl-office-news-pkl4537724151","type":"story","status":"publish","title_hn":"खेलां मैं हरियाणा की छोरी भी छोरयां तै कम धाकड़ नहीं सैं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खेलां मैं हरियाणा की छोरी भी छोरयां तै कम धाकड़ नहीं सैं
विज्ञापन
पंचकूला। खेलां मैं हरियाणा की छोरी भी छोरयां तै कम धाकड़ नहीं सैं। खेलो इंडिया मैं छोरयां कै बराबर मैडल जीत के ये साबित भी कर दिया। खेलो इंडिया के सफल आयोजन में हरियाणा ओवरऑल चैंपियन बना है। प्रदेश की चौधर को कायम रखने में यहां की बेटियों का योगदान भी बराबर का रहा है। इस आयोजन में लड़कों ने जहां 71 तो वहीं लड़कियों ने 66 मेडल जीते हैं। लड़कियों ने बॉक्सिंग, कुश्ती और हॉकी में बेहतरीन प्रदर्शन किया और कई मेडल प्रदेश की झोली में डाले।
खेल के क्षेत्र में हरियाणा की बेटियों ने हमेशा ही खुद को साबित करते हुए देश और प्रदेश की शान में चार चांद लगाए हैं। चाहे ओलंपिक की बात रही हो या नेशनल खेलों की। हर बार यहां की बेटियों का सिक्का चला है। बीते 3 से 13 जून तक आयोजित हुए खेलो इंडिया में भी बेटियों की मेहनत रंग लाई और प्रदेश की झोली मेडलों से भर गई। इस आयोजन में लड़कों ने 29 गोल्ड, 22 सिल्वर और 20 ब्रॉन्ज मेडल जीते। लड़कियों ने 23 गोल्ड, 17 सिल्वर और 26 ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं। संवाद
कुश्ती और बॉक्सिंग में मजबूत रहा हरियाणा
इस खेल आयोजन में कुल 25 खेलों को शामिल किया गया था। मगर हरियाणा का सबसे बेहतर प्रदर्शन कुश्ती और बॉक्सिंग में रहा। हरियाणा के खिलाड़ियों ने कुल 137 मेडल में से 53 मेडल केवल कुश्ती और बॉक्सिंग में ही जीते हैं। इनमें से भी 38 मेडल कुश्ती में जीते हैं।
विज्ञापन
त्याग और प्रेरणा के बिना संभव नहीं थी जीत
पंजाब की सुविधा भगत को हराने वाली ओलंपियन विजेंद्र सिंह की बॉक्सर भतीजी तमन्ना ने कहा कि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होेंने बहुत ज्यादा मेहनत की है। हमारे सीनियर खिलाड़ियों से प्रेरणा लेकर ही प्रदेश का नाम रोशन कर पाए हैं।
कई खेलों में कमजोर रहा प्रदर्शन
कई खेलों में प्रदेश का प्रदर्शन बहुत ही खराब रहा। उनमें एक मेडल तक नहीं मिला। हालांकि ये खेल अन्य प्रदेशों के पारंपरिक खेल हैं और प्रचलन में बहुत कम हैं। कलारीपयट्टू और मलखंब में एक भी मेडल खिलाड़ी नहीं जीत पाए हैं।
विज्ञापन
खेल के क्षेत्र में हरियाणा की बेटियों ने हमेशा ही खुद को साबित करते हुए देश और प्रदेश की शान में चार चांद लगाए हैं। चाहे ओलंपिक की बात रही हो या नेशनल खेलों की। हर बार यहां की बेटियों का सिक्का चला है। बीते 3 से 13 जून तक आयोजित हुए खेलो इंडिया में भी बेटियों की मेहनत रंग लाई और प्रदेश की झोली मेडलों से भर गई। इस आयोजन में लड़कों ने 29 गोल्ड, 22 सिल्वर और 20 ब्रॉन्ज मेडल जीते। लड़कियों ने 23 गोल्ड, 17 सिल्वर और 26 ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं। संवाद
विज्ञापन
कुश्ती और बॉक्सिंग में मजबूत रहा हरियाणा
इस खेल आयोजन में कुल 25 खेलों को शामिल किया गया था। मगर हरियाणा का सबसे बेहतर प्रदर्शन कुश्ती और बॉक्सिंग में रहा। हरियाणा के खिलाड़ियों ने कुल 137 मेडल में से 53 मेडल केवल कुश्ती और बॉक्सिंग में ही जीते हैं। इनमें से भी 38 मेडल कुश्ती में जीते हैं।
विज्ञापन
त्याग और प्रेरणा के बिना संभव नहीं थी जीत
पंजाब की सुविधा भगत को हराने वाली ओलंपियन विजेंद्र सिंह की बॉक्सर भतीजी तमन्ना ने कहा कि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होेंने बहुत ज्यादा मेहनत की है। हमारे सीनियर खिलाड़ियों से प्रेरणा लेकर ही प्रदेश का नाम रोशन कर पाए हैं।
कई खेलों में कमजोर रहा प्रदर्शन
कई खेलों में प्रदेश का प्रदर्शन बहुत ही खराब रहा। उनमें एक मेडल तक नहीं मिला। हालांकि ये खेल अन्य प्रदेशों के पारंपरिक खेल हैं और प्रचलन में बहुत कम हैं। कलारीपयट्टू और मलखंब में एक भी मेडल खिलाड़ी नहीं जीत पाए हैं।