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फार्मेसी एक्ट की धज्जियां उड़ाने वाले कैमिस्टों की खैर नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 03 Jul 2016 12:55 AM IST
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खांसी की दवा कोरेक्स समेत करीब 347 फिक्स डोज कांबिनेशन ड्रग्ज को प्रतिबंधित किया गया है।
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फार्मेसी एक्ट की धज्जियां उड़ाने वाले मेडिकल स्टोर संचालकों की खैर नहीं है। बिना फार्मासिस्ट मेडिसिन बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह चेतावनी हरियाणा स्टेट फार्मेसी काउंसिल के चेयरमैन केसी गोयल ने दी है। वह शनिवार को पंचकूला में आयोजित एक कार्यक्रम में पहुंचे थे।
उन्होंने कहा कि देश में कहीं पर भी फार्मेसी एक्ट 1948 की 42 ड्रग्स नियम 65/15 के तहत रजिस्टर्ड के अलावा कोई भी व्यक्ति एलोपैथिक मेडिसिन नहीं बेच सकता है। औषधि नियंत्रक हरियाणा ने 28 दिसंबर 2015 को आदेश जारी करते हुए एफडीए हरियाणा के सभी अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि जिस गांव की आबादी 2500 है और उस गांव में एक एमबीबीएस डॉक्टर होना चाहिए। इस शर्त पर ही दवा बेचने का लाइसेंस दिया जा सकता है, लेकिन जिले में किसी भी गांव में एक भी एमबीबीएस डॉक्टर नहीं है। दवा बेचने की दुकानें दो से पांच तक हो गई हैं। जो किसी डॉक्टर की पर्ची के बिना ही दवा बेच रहे हैं।
केसी गोयल ने बताया कि उच्चस्तरीय एंटीवायोटिक की बिक्री को नियंत्रण करने के लिए शेड्यूल एच बनाया गया है। इसके अंतर्गत 46 साल्ट दिए गए हैं, जिनकी बिक्री का रिकॉर्ड तीन साल तक रखना जरूरी है। बिना किसी डॉक्टर के इनको लिखा नहीं जा सकता है, लेकिन पशु चिकित्सा में कार्यरत वीएलडीए बिना किसी रोक के इन दवाइयों को बेचने में लगे हुए हैं। जो टीके दुधारू पशुओं को लगाए जा रहे हैं, जिनका दूध पीने से जनमानस के शरीर से रोग रोकने की क्षमता समाप्त होती जा रही है। यदि इस पर शीघ्र रोक ना लगाई गई तो वह दिन दूर नहीं जब छोटी-छोटी बीमारियों का इलाज उच्चस्तरीय एंटीवायोटिक से संभव नहीं होगा।
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केसी गोयल ने कहा कि इसी प्रकार होम्योपैथिक की दवाइयां पशु चिकित्सक के लिए खुलेआम बेची जा रही है, जबकि ना ही इन्हें लिखने वाले कोई डाक्टर हैं और ना ही बेचने वालों के पास इनका कोई लाइसेंस है। इसलिए इनपर रोक लगाई जानी चाहिए। जो दवा बिक्रेता अपने फार्मासिस्टों के अलावा दूसरों से दवा बिकवा रहे हैं उन पर रोक लगाई जानी चाहिए। इसी प्रकार शेड्यूल एक्स के अंतर्गत आने वाली दवाइयां बेचने के लिए किसी के पास भी लाइसेंस नहीं है। इसके बावजूद भी इसकी बिक्री जारी है, इस पर रोक लगाई जानी चाहिए।
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उन्होंने कहा कि देश में कहीं पर भी फार्मेसी एक्ट 1948 की 42 ड्रग्स नियम 65/15 के तहत रजिस्टर्ड के अलावा कोई भी व्यक्ति एलोपैथिक मेडिसिन नहीं बेच सकता है। औषधि नियंत्रक हरियाणा ने 28 दिसंबर 2015 को आदेश जारी करते हुए एफडीए हरियाणा के सभी अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि जिस गांव की आबादी 2500 है और उस गांव में एक एमबीबीएस डॉक्टर होना चाहिए। इस शर्त पर ही दवा बेचने का लाइसेंस दिया जा सकता है, लेकिन जिले में किसी भी गांव में एक भी एमबीबीएस डॉक्टर नहीं है। दवा बेचने की दुकानें दो से पांच तक हो गई हैं। जो किसी डॉक्टर की पर्ची के बिना ही दवा बेच रहे हैं।
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केसी गोयल ने बताया कि उच्चस्तरीय एंटीवायोटिक की बिक्री को नियंत्रण करने के लिए शेड्यूल एच बनाया गया है। इसके अंतर्गत 46 साल्ट दिए गए हैं, जिनकी बिक्री का रिकॉर्ड तीन साल तक रखना जरूरी है। बिना किसी डॉक्टर के इनको लिखा नहीं जा सकता है, लेकिन पशु चिकित्सा में कार्यरत वीएलडीए बिना किसी रोक के इन दवाइयों को बेचने में लगे हुए हैं। जो टीके दुधारू पशुओं को लगाए जा रहे हैं, जिनका दूध पीने से जनमानस के शरीर से रोग रोकने की क्षमता समाप्त होती जा रही है। यदि इस पर शीघ्र रोक ना लगाई गई तो वह दिन दूर नहीं जब छोटी-छोटी बीमारियों का इलाज उच्चस्तरीय एंटीवायोटिक से संभव नहीं होगा।
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केसी गोयल ने कहा कि इसी प्रकार होम्योपैथिक की दवाइयां पशु चिकित्सक के लिए खुलेआम बेची जा रही है, जबकि ना ही इन्हें लिखने वाले कोई डाक्टर हैं और ना ही बेचने वालों के पास इनका कोई लाइसेंस है। इसलिए इनपर रोक लगाई जानी चाहिए। जो दवा बिक्रेता अपने फार्मासिस्टों के अलावा दूसरों से दवा बिकवा रहे हैं उन पर रोक लगाई जानी चाहिए। इसी प्रकार शेड्यूल एक्स के अंतर्गत आने वाली दवाइयां बेचने के लिए किसी के पास भी लाइसेंस नहीं है। इसके बावजूद भी इसकी बिक्री जारी है, इस पर रोक लगाई जानी चाहिए।