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तीन गांवों के लोग हो रहे प्रभावित, इस कीमत पर सरकार को नहीं दे सकते राजस्व कमाने की अनुमति: हाईकोर्ट
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चंडीगढ़। लुधियाना के गांव अक्कुवाल, गंगकलां पैणी अराइयां व पैणी गुजरा में बनी 10 फीट की सड़क से हर दिन करीब 500 रेत व अन्य खनन सामग्री से भरे टिप्पर गुजरने को लेकर दाखिल याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने डीसी से जवाब तलब कर लिया है। हाईकोर्ट ने तल्ख लहजे में कहा कि सरकार खनन से राजस्व कमा रही है तो ट्रकों को वैकल्पिक स्थान देना भी आपकी ही जिम्मेदारी है। तीन गांवों के लोगों की कीमत पर आपको राजस्व कमाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अक्कुवाल, गंगकलां पैणी अराइयां और पैणी गुजरा गांव वासियों ने एडवोकेट सतिंदर कौर के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में बताया गया कि तीन गांव से होकर 10 फुट की एक सड़क गुजरती है। इस सड़क पर हर दिन करीब 500 रेत व अन्य खनन सामग्री से भरे टिप्पर गुजरते हैं और इसी सड़क पर एक स्कूल भी है। स्कूल में 1200 बच्चे पढ़ते हैं। इन ट्रक व टिप्परों के कारण लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। दिन-रात चलने वाले टिप्परों के शोर और धूल मिट्टी से लोग परेशान हैं। संबंधित विभागों व डीसी को कई बार शिकायत देने के बावजूद टिप्पर नहीं रुक रहे। सड़क 10 फीट की है जिसमें 8 फीट चौड़ाई वाले टिप्पर चलते हैं। ऐसे में यहां से गांववासी जा ही नहीं सकते। स्कूल आने जाने वाले बच्चों के परिजन भी वाहन नहीं ला पाते, जबकि टिप्परों की आवाजाही के कारण स्कूली बच्चों की सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं।
स्कूल प्रिंसिपल ने भी डीसी व अन्य को शिकायत की थी। कोर्ट को बताया गया कि आरटीआई के जरिये मिले जवाब में संबंधित विभाग ने माना है कि उक्त सड़क विकल्प के रूप में टिप्परों के लिए इस्तेमाल हो रही है, जबकि माइनिंग की अनुमति में उक्त सड़क से टिप्पर गुजरने का जिक्र नहीं है। याची के अनुसार कानूनन ग्रामीण क्षेत्रों में बनी सड़कों को कमर्शियल रूप से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
माइनिंग विभाग और माइनिंग करने वालों का कहना था कि वह सिर्फ रात में ही टिप्पर निकालते हैं, दिन के समय नहीं। याची ने कोर्ट को दिन के समय टिप्परों की तस्वीरें और सीसीटीवी फुटेज दिखाई जिस पर कोर्ट ने डीसी लुधियाना को निजी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।
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स्कूल प्रिंसिपल ने भी डीसी व अन्य को शिकायत की थी। कोर्ट को बताया गया कि आरटीआई के जरिये मिले जवाब में संबंधित विभाग ने माना है कि उक्त सड़क विकल्प के रूप में टिप्परों के लिए इस्तेमाल हो रही है, जबकि माइनिंग की अनुमति में उक्त सड़क से टिप्पर गुजरने का जिक्र नहीं है। याची के अनुसार कानूनन ग्रामीण क्षेत्रों में बनी सड़कों को कमर्शियल रूप से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
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माइनिंग विभाग और माइनिंग करने वालों का कहना था कि वह सिर्फ रात में ही टिप्पर निकालते हैं, दिन के समय नहीं। याची ने कोर्ट को दिन के समय टिप्परों की तस्वीरें और सीसीटीवी फुटेज दिखाई जिस पर कोर्ट ने डीसी लुधियाना को निजी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।
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