72 साल से विकास को तरसा गांव, ग्रामीण बोले-'काम नहीं तो वोट नहीं', करेंगे बहिष्कार
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आजादी के 72 साल बाद भी गुमथला के लोगों को पिछड़ेपन से राहत नहीं मिली है। इस कारण लोग चुनाव का बहिष्कार करने का मन बना चुके हैं। यहां के लोगों का कहना है कि इस बार भी वह चुुनाव में मतदान नहीं करेंगे। नेताओं की ओर से लगातार आश्वासन दिए गए लेकिन सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए वह प्रशासन और नेताओं से कई बार गुहार लगा चुके हैं लेकिन सुनवाई नहीं हुई। लोगों ने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान जब काम नहीं तो वोट नहीं के सिद्धांत पर चलकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे।
गुमथला गांव नगर निगम के अंदर आ गया है। यहां की कुल जनसंख्या 400 है। इसमें 115 वोटर हैं। लोगों ने बताया कि आजादी के पहले से बसे गांव में राजनेता और प्रशासन के लोग केवल आश्वासन देने आए। यहां पर लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। रास्ता न होने से एंबुलेंस भी गांव में नहीं आती है।
बच्चों को स्कूल जाने में होती है परेशानी
बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सड़क नहीं होने के कारण बच्चों के लिए कोई बस यहां तक नहीं आती है। बस नहीं आने के कारण बच्चों को खुद लाने जाना पड़ रहा है। अभी तक कोई काम नहीं हुआ है इसलिए इस बार चुनाव का बहिष्कार करेंगे।- विद्या देवी, स्थानीय निवासी।
सभी जगह लगाई गुहार, नहीं हुआ काम
गांव के लोगों ने सभी जगह गुहार लगाई है। इसके बाद भी काम नहीं हो पाया है। इमरजेंसी की हालत में कोई एंबुलेंस नहीं मिलती है। गांव में किसी को बीमार होने के बाद प्राइवेट वाहन में ले जाना पड़ता है। रास्ता नहीं होने के कारण लोगों को परेशानी होती है। इस कारण मतदान में भाग नहीं लेंगे। - प्रेमचंद गुर्जर, स्थानीय निवासी
गांव में नदी पर नहीं बनाया गया पुल
गांव के लोग नदी पार कर बीड़ घग्गर जाते हैं। इनके लिए अस्थायी पुल बनाया गया है। अभी तक यहां पर स्थायी पुल भी नहीं बनाया गया है। जब नेताओं ने कोई सुनवाई नहीं की तो अब लोकतंत्र के पर्व में हम भाग नहीं लेंगे। अभाव में रहने के कारण लोकतंत्र से हमारा विश्वास उठ गया है। - रूलदन राम, स्थानी निवासी
गांव की धर्मशाला भी नहीं कराई गई ठीक
गांव में बनी धर्मशाला भी ठीक नहीं कराई गई है। इस कारण वोटिंग नहीं करेंगे। कोई भी कार्यक्रम का आयोजन करने में टेंट लगाना पड़ता है। इस कारण लोगों को पैसे खर्च करने पड़ते हैं। इसलिए इस बार वोटिंग नहीं कर शांतिपूर्वक विरोध करेंगे। - सीता देवी, स्थानीय निवासी