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परमजीत सिंह हत्याकांड: सुखदेव सिंह का अर्श डल्ला से संपर्क, जमानत से हाईकोर्ट का इन्कार
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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जनवरी 2023 में हुए परमजीत सिंह हत्याकांड से जुड़े मामले में आरोपी सुखदेव सिंह को आतंकी अर्श डल्ला से संपर्क व अपराध की गंभीरता के चलते जमानत देने से फिलहाल इन्कार कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम की धाराएं लागू हैं और लंबी हिरासत से हुए नुकसान की तुलना में अपराध की गंभीरता अधिक है।
जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि जमानत पर पुनर्विचार से पहले अभियोजन पक्ष के कुछ प्रमुख गवाहों का बयान दर्ज होना आवश्यक है। याचिका दाखिल करते हुए सुखदेव सिंह ने बताया था कि वह 7 जनवरी 2023 से न्यायिक हिरासत में है। 3 मई 2023 को चालान दाखिल किया जा चुका है तथा 10 फरवरी 2025 को आरोप तय हुए।
याची ने कहा कि इतना लंबा समय बीतने के बावजूद अब तक एक भी अभियोजन गवाह की गवाही नहीं हुई है। लुधियाना की ट्रायल कोर्ट में पहला अभियोजन गवाह 21 जनवरी को पेश होना तय है। अभियोजन ने कुल 42 गवाह सूचीबद्ध किए हैं जिनमें 27 सरकारी गवाह शामिल हैं। याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि सुखदेव सिंह का आपराधिक रिकॉर्ड साफ है और उन्हें पारिवारिक विवाद से उपजे संदेह के आधार पर फंसाया गया।
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राज्य सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि यह हत्या विदेश में बैठे हैंडलरों के साथ रची गई साजिश का नतीजा है। सुखदेव सिंह के ऑस्ट्रेलिया में रह रहे बेटे लवप्रीत ने अर्श डल्ला (सरकार द्वारा नामित आतंकवादी) से संपर्क कर हत्या की साजिश रची। अर्श डल्ला ने बाद में सोशल मीडिया पर हत्या की जिम्मेदारी भी ली।
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जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि जमानत पर पुनर्विचार से पहले अभियोजन पक्ष के कुछ प्रमुख गवाहों का बयान दर्ज होना आवश्यक है। याचिका दाखिल करते हुए सुखदेव सिंह ने बताया था कि वह 7 जनवरी 2023 से न्यायिक हिरासत में है। 3 मई 2023 को चालान दाखिल किया जा चुका है तथा 10 फरवरी 2025 को आरोप तय हुए।
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याची ने कहा कि इतना लंबा समय बीतने के बावजूद अब तक एक भी अभियोजन गवाह की गवाही नहीं हुई है। लुधियाना की ट्रायल कोर्ट में पहला अभियोजन गवाह 21 जनवरी को पेश होना तय है। अभियोजन ने कुल 42 गवाह सूचीबद्ध किए हैं जिनमें 27 सरकारी गवाह शामिल हैं। याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि सुखदेव सिंह का आपराधिक रिकॉर्ड साफ है और उन्हें पारिवारिक विवाद से उपजे संदेह के आधार पर फंसाया गया।
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राज्य सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि यह हत्या विदेश में बैठे हैंडलरों के साथ रची गई साजिश का नतीजा है। सुखदेव सिंह के ऑस्ट्रेलिया में रह रहे बेटे लवप्रीत ने अर्श डल्ला (सरकार द्वारा नामित आतंकवादी) से संपर्क कर हत्या की साजिश रची। अर्श डल्ला ने बाद में सोशल मीडिया पर हत्या की जिम्मेदारी भी ली।