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पैनोरमिक कोच : वजन के साथ दूसरे चरण का ट्रायल सफल
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संवाद न्यूज एजेंसी
कालका। कालका शिमला रेलमार्ग पर चार पैनोरमिक कोचों का दूसरे चरण का ट्रायल सफल होने के बाद वीरवार को कोच कालका पहुंच गए हैं। आरसीरएफ कपूरथला के अधिकारियों के अनुसार 6.350 टन वजन के साथ ट्रेन को 28 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चलाया गया। दूसरे चरण के इस ट्रायल में चारों कोचों में 50-50 किलोग्राम के बट्टे रखे गए थे, जिनका कुल वजन 6.350 टन के करीब था। ट्रायल के लिए आरडीएसओ की टीम 16 जून से कालका पहुंची हुई थी। मंगलवार को ट्रायल का कार्य पूरा कर लिया गया था।
28 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से हुआ ट्रायल
पहले चरण का ट्रायल सफल होने के बाद शुक्रवार को पैनोरमिक कोचों को शिमला से कालका भेज दिया गया था। इसके बाद कालका में उक्त कोचों में वजन के लिए लोहे के बट्टे रखे गए थे। दूसरे चरण का ट्रायल शनिवार से हाेना था लेकिन शनिवार और रविवार को कालका-शिमला रेलमार्ग पर भूस्खलन की वजह से दोनों दिन ट्रायल नही हो पाया था। इस कारण सोमवार को चारों पैनोरमिक कोचों को शिमला के लिए रवाना कर दिया गया था। वहां शोघी से शिमला के बीच 25 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चारों कोचों का वजन के साथ ट्रायल किया गया जोकि पहले दिन सफल रहा। उसके बाद कनोह से शिमला के बीच काेचों का 28 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार के साथ ट्रायल किया गया। इसमें आरडीएसओ की टीम को सफलता हाथ लगी है। ट्रायल में सफलता मिलने पर आरसीएफ की टीम में भी खुशी की लहर है। बता दें कि उक्त कोचों का निर्माण आरसीएफ कपूरथला में किया गया है। अधिकारियों के अनुसार यह ट्रायल मैकेनिकल तौर पर पूरी तरह से सफल रहा है। जुलाई के अंत तक इस तरह के तीन और कोच कालका पहुंचेंगे। अगर सब कुछ ठीक रहा तो उम्मीद है कि आगामी 15 अगस्त के आसपास तक यह ट्रेन ट्रैक पर आम लोगो के लिए दौड़ने लगेगी।
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ट्रायल के बाद हम सभी चीजों को जोड़कर विश्लेषण करते हैं कि जिसमें अभी तक सब कुछ सही रहा है। शोघी से शिमला तक ट्रायल हुआ उसके बाद कनोह से शिमला के बीच 28 केएमपीएच की रफ्तार से ट्रायल किया किया। शुक्रवार को हमारी टीम लखनऊ के लिए निकल जाएगी। आरडीएसओ की टीम में कुल 11 सदस्य शामिल थे। -सुसारन तिरू, डिप्टी डायरेक्टर आरडीएसओ
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