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504 करोड़ की हेराफेरी: प्रवीन कुमार को जमानत नहीं, सीबीआई की आशंका-गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं

Fri, 25 Sep 2026 09:08 AM IST
Nivedita संवाद न्यूज एजेंसी, मोहाली
संवाद न्यूज एजेंसी, मोहाली Published by: Nivedita Updated Fri, 25 Sep 2026 09:08 AM IST
सार

वित्त विभाग के 12 जुलाई 2024 के सर्कुलर के तहत किसी एक बैंक में 50 करोड़ रुपये से अधिक राशि रखने की सीमा तय की गई थी। आरोप है कि इसके बावजूद आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में निवेश के तीन अलग-अलग चक्रों में निर्धारित सीमा का पालन नहीं किया गया।

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Panchkula Court ₹504 crore embezzlement Praveen Kumar denied bail CBI
कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सरकारी विभागों से जुड़े करीब 504 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय हेराफेरी के मामले में हरियाणा स्टेट इलेक्शन कमीशन के मुख्य अकाउंट ऑफिसर प्रवीन कुमार को अदालत से राहत नहीं मिली। 
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अदालत ने उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने मामले में लगाए गए आरोपों, आरोपी की कथित भूमिका और जारी जांच को ध्यान में रखते हुए जमानत देने से इनकार किया।
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जांच एजेंसी के अनुसार, प्रवीन कुमार हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में वरिष्ठ लेखा अधिकारी के पद पर भी कार्यरत रहे हैं। सरकारी राशि बैंक में जमा कराने और निवेश से जुड़े वित्त विभाग के नियमों का पालन सुनिश्चित करना उनकी जिम्मेदारी थी।
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एजेंसी के मुताबिक, वित्त विभाग के 12 जुलाई 2024 के सर्कुलर के तहत किसी एक बैंक में 50 करोड़ रुपये से अधिक राशि रखने की सीमा तय की गई थी। आरोप है कि इसके बावजूद आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में निवेश के तीन अलग-अलग चक्रों में निर्धारित सीमा का पालन नहीं किया गया।

दो बैंक खाते खुलवाने का आरोप
अभियोजन पक्ष के अनुसार, एचएसपीसीबी के दो बैंक खाते आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में बिना सक्षम मंजूरी के खुलवाए गए। इनमें से एक खाते में प्रवीन कुमार अकेले अधिकृत हस्ताक्षरी थे। आरोप है कि उन्होंने आईसीआईसीआई बैंक से आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में 3.50 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए, जबकि इसके लिए कोई लिखित निर्देश या सक्षम स्वीकृति नहीं ली गई थी। जांच एजेंसी के अनुसार, दूसरे खाते के जरिए बोर्ड की 159.85 करोड़ रुपये से अधिक राशि निकाली गई।

सीबीआई के मुताबिक, चेकबुक रजिस्टर में चेकबुक प्राप्त करने के लिए प्रवीन कुमार के हस्ताक्षर मिले हैं। वहीं, जांच में उस समय उनकी मोबाइल लोकेशन बैंक शाखा में मौजूद नहीं होने की बात सामने आने का दावा किया गया है।

बचाव पक्ष ने आर्थिक लाभ से किया इनकार
बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि प्रवीन कुमार को इन लेनदेन से कोई व्यक्तिगत आर्थिक लाभ नहीं हुआ। पक्ष का कहना था कि अधिक ब्याज मिलने के कारण बोर्ड के हित में राशि ट्रांसफर की गई थी।


वहीं, सीबीआई ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि मामले में मनी ट्रेल की जांच अभी जारी है। एजेंसी ने आशंका जताई कि जमानत मिलने पर आरोपी विभागीय गवाहों को प्रभावित कर सकता है।
 
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