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Panchkula News: पंचकूला की ग्रीन बेल्ट बनी डंपिंग ग्राउंड, 50 पेड़ों पर मंडराया खतरा, दलदल से बढ़ी परेशानी
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निगम का दावा - लेवलिंग के लिए डाला जा रहा मलबा; स्थानीय लोगों ने उठाई सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। पंचकूला के सेक्टर-4 और 11 चौक के नजदीक सरकारी दफ्तरों के किनारे स्थित ग्रीन बेल्ट एरिया पिछले पांच महीनों से अवैध डंपिंग ग्राउंड में तब्दील हो गई है। यहां लगातार निर्माणाधीन घरों का मलबा और कूड़ा-करकट फेंका जा रहा है। इस कारण आम और नीम सहित 50 से अधिक पेड़ खतरे में पड़ गए हैं। स्थिति तब और गंभीर हो गई है जब पानी की टूटी पाइपलाइन से रिसते पानी ने पूरे इलाके को दलदल में बदल दिया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सुबह-शाम ट्रालियों में भरकर मलबा यहां डाला जा रहा है। सूक्ष्म सिंचाई एवं कमान क्षेत्र विकास प्राधिकरण (मिकाडा) के कर्मचारियों ने बताया कि यह सिलसिला पांच महीने से चल रहा है। पानी की पाइपलाइन लीकेज की दो बार शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। रिसता हुआ पानी जमीन में समाकर मिट्टी को दलदल बना रहा है, जिससे पेड़ों के गिरने का खतरा बढ़ गया है।
नगर निगम का तर्क: लेवलिंग का काम
नगर निगम का कहना है कि बरसात के पानी के जमाव को रोकने के लिए जगह की लेवलिंग करने के उद्देश्य से मलबा गिराया जा रहा है। निगम के कर्मचारियों ने लगभग एक महीने पहले भी लेवलिंग का काम किया था। हालांकि, अब आम लोग भी इस जगह पर मलबा फेंकने लगे हैं, जिससे स्थिति और बिगड़ गई है।
मानसून में तालाब बनने की आशंका
लोगों ने चिंता जताई है कि मानसून शुरू हो चुका है और पाइपलाइन टूटने से पहले ही यहां दलदल की स्थिति बनी हुई है। बरसात में यह इलाका एक बड़े तालाब में बदल जाएगा, जो महीनों तक नहीं सूखेगा। इससे न केवल जलभराव की समस्या बढ़ेगी, बल्कि भविष्य में फिर से लेवलिंग का काम करना पड़ेगा। लोगों ने नगर निगम से मांग की है कि सबसे पहले टूटी हुई पानी की पाइपलाइन को ठीक करवाया जाए।
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सैनिटरी इंस्पेक्टर का बयान
नगर निगम के सैनिटरी इंस्पेक्टर अनिल नैन ने बताया कि शहर में जिन जगहों पर पानी जमा हो जाता है, वहां जगह को समतल करने के लिए इंजीनियरिंग विंग द्वारा मलबा गिराया जाता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। पंचकूला के सेक्टर-4 और 11 चौक के नजदीक सरकारी दफ्तरों के किनारे स्थित ग्रीन बेल्ट एरिया पिछले पांच महीनों से अवैध डंपिंग ग्राउंड में तब्दील हो गई है। यहां लगातार निर्माणाधीन घरों का मलबा और कूड़ा-करकट फेंका जा रहा है। इस कारण आम और नीम सहित 50 से अधिक पेड़ खतरे में पड़ गए हैं। स्थिति तब और गंभीर हो गई है जब पानी की टूटी पाइपलाइन से रिसते पानी ने पूरे इलाके को दलदल में बदल दिया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सुबह-शाम ट्रालियों में भरकर मलबा यहां डाला जा रहा है। सूक्ष्म सिंचाई एवं कमान क्षेत्र विकास प्राधिकरण (मिकाडा) के कर्मचारियों ने बताया कि यह सिलसिला पांच महीने से चल रहा है। पानी की पाइपलाइन लीकेज की दो बार शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। रिसता हुआ पानी जमीन में समाकर मिट्टी को दलदल बना रहा है, जिससे पेड़ों के गिरने का खतरा बढ़ गया है।
नगर निगम का तर्क: लेवलिंग का काम
नगर निगम का कहना है कि बरसात के पानी के जमाव को रोकने के लिए जगह की लेवलिंग करने के उद्देश्य से मलबा गिराया जा रहा है। निगम के कर्मचारियों ने लगभग एक महीने पहले भी लेवलिंग का काम किया था। हालांकि, अब आम लोग भी इस जगह पर मलबा फेंकने लगे हैं, जिससे स्थिति और बिगड़ गई है।
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मानसून में तालाब बनने की आशंका
लोगों ने चिंता जताई है कि मानसून शुरू हो चुका है और पाइपलाइन टूटने से पहले ही यहां दलदल की स्थिति बनी हुई है। बरसात में यह इलाका एक बड़े तालाब में बदल जाएगा, जो महीनों तक नहीं सूखेगा। इससे न केवल जलभराव की समस्या बढ़ेगी, बल्कि भविष्य में फिर से लेवलिंग का काम करना पड़ेगा। लोगों ने नगर निगम से मांग की है कि सबसे पहले टूटी हुई पानी की पाइपलाइन को ठीक करवाया जाए।
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सैनिटरी इंस्पेक्टर का बयान
नगर निगम के सैनिटरी इंस्पेक्टर अनिल नैन ने बताया कि शहर में जिन जगहों पर पानी जमा हो जाता है, वहां जगह को समतल करने के लिए इंजीनियरिंग विंग द्वारा मलबा गिराया जाता है।