{"_id":"696aa914e954636ba507a979","slug":"panchkula-youth-trapped-in-myanmar-after-being-lured-by-a-foreign-job-panchkula-news-c-16-1-pkl1006-925717-2026-01-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Panchkula News: विदेश में नौकरी के लालच में म्यांमारमें फंसा पंचकूला का युवक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Panchkula News: विदेश में नौकरी के लालच में म्यांमारमें फंसा पंचकूला का युवक
विज्ञापन
थाइलैंड भेजने के बहाने टेलीग्राम पर फंसाया; हथियारों के साए में कराया गया साइबर ठगी का काम, दूतावास की मदद से 9 महीने बाद वतन वापसी
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। पंचकूला के सेक्टर-19 निवासी सागर शर्मा की कहानी उन युवाओं के लिए चेतावनी है जो विदेश में नौकरी के सपने देख रहे हैं। अप्रैल 2025 के अंतिम सप्ताह में सागर को टेलीग्राम पर एक मैसेज आया कंप्यूटर का ज्ञान होने पर थाइलैंड में अच्छी नौकरी, 17-18 हजार रुपये सैलरी और रहने-खाने की पूरी सुविधा।
सागर ने 10वीं के बाद तीन साल का कंप्यूटर डिप्लोमा किया था। घर की आर्थिक हालत कमजोर थी और वह 20 हजार रुपये की मार्केटिंग नौकरी कर रहा था। बड़े बेटे होने के नाते जब 50 हजार रुपये तक कमाई की बात सामने आई तो उसने बिना ज्यादा सोच-विचार हामी भर दी।
पांच दिन की बातचीत के बाद सागर थाइलैंड पहुंच गया। वीजा ऑन अराइवल होने के कारण कोई परेशानी नहीं हुई। एयरपोर्ट पर सूचना देने पर होटल में रुकने को कहा गया लेकिन रात करीब तीन बजे एक कार आई जिसमें दो युवक सवार थे। उनमें से एक के पास आधुनिक हथियार था। सागर को कार में बैठाया गया और 10-12 घंटे की यात्रा के बाद उसे म्यांमार ले जाया गया। रास्ते में सवाल पूछने पर हथियार दिखाकर चुप करा दिया जाता था।
विज्ञापन
म्यांमार पहुंचते ही सागर से पासपोर्ट और मोबाइल फोन छीन लिए गए। यहां उससे सोशल मीडिया पर रैंडम लोगों से बातचीत कर अमीर लोगों के मोबाइल नंबर निकालने और साइबर ठगी से जुड़ा काम करवाया जाने लगा। मना करने पर जान से मारने की धमकी दी गई। मजबूरी में उसे काम करना पड़ा।
रोज़ाना 24 घंटे में से 18 घंटे लगातार काम, जबकि बाकी छह घंटे में सोना, खाना और नहाना ही नसीब होता था। एक महीने बाद जब ठगों को थोड़ा भरोसा हुआ तो मोबाइल वापस दिया गया। रात में सागर ने किसी तरह परिवार से व्हाट्सएप पर संपर्क किया। परिवार ने तुरंत भारतीय दूतावास से मदद की गुहार लगाई।
कैंप में सैकड़ों नहीं बल्कि हजारों युवक फंसे हुए थे, जो नौकरी की तलाश में यहां पहुंचे थे। काम के दौरान अगर पलक भी झपकी तो सजा मिलती पिटाई, पूरी रात 20-20 लीटर पानी की बोतलें उठाकर खड़ा रहना या 200-300 उठक-बैठक। सजा सब कुछ ठेकेदारों के मूड पर निर्भर करती थी। खाने में बीफ या उबली चीजें दी जाती थीं। शाकाहारी होने के कारण सागर को मजबूरी में उबला खाना खाना पड़ा। बताई गई सैलरी में से भी हर महीने 3-4 हजार रुपये काट लिए जाते थे। लगातार प्रयासों के बाद नवंबर 2025 में भारतीय दूतावास और स्थानीय मिलिट्री की मदद से सागर को छुड़ाया गया। इसके बाद उसे दो महीने एक कैंप में रखा गया और 8 जनवरी 2026 को वह भारत लौट सका।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। पंचकूला के सेक्टर-19 निवासी सागर शर्मा की कहानी उन युवाओं के लिए चेतावनी है जो विदेश में नौकरी के सपने देख रहे हैं। अप्रैल 2025 के अंतिम सप्ताह में सागर को टेलीग्राम पर एक मैसेज आया कंप्यूटर का ज्ञान होने पर थाइलैंड में अच्छी नौकरी, 17-18 हजार रुपये सैलरी और रहने-खाने की पूरी सुविधा।
सागर ने 10वीं के बाद तीन साल का कंप्यूटर डिप्लोमा किया था। घर की आर्थिक हालत कमजोर थी और वह 20 हजार रुपये की मार्केटिंग नौकरी कर रहा था। बड़े बेटे होने के नाते जब 50 हजार रुपये तक कमाई की बात सामने आई तो उसने बिना ज्यादा सोच-विचार हामी भर दी।
विज्ञापन
पांच दिन की बातचीत के बाद सागर थाइलैंड पहुंच गया। वीजा ऑन अराइवल होने के कारण कोई परेशानी नहीं हुई। एयरपोर्ट पर सूचना देने पर होटल में रुकने को कहा गया लेकिन रात करीब तीन बजे एक कार आई जिसमें दो युवक सवार थे। उनमें से एक के पास आधुनिक हथियार था। सागर को कार में बैठाया गया और 10-12 घंटे की यात्रा के बाद उसे म्यांमार ले जाया गया। रास्ते में सवाल पूछने पर हथियार दिखाकर चुप करा दिया जाता था।
विज्ञापन
म्यांमार पहुंचते ही सागर से पासपोर्ट और मोबाइल फोन छीन लिए गए। यहां उससे सोशल मीडिया पर रैंडम लोगों से बातचीत कर अमीर लोगों के मोबाइल नंबर निकालने और साइबर ठगी से जुड़ा काम करवाया जाने लगा। मना करने पर जान से मारने की धमकी दी गई। मजबूरी में उसे काम करना पड़ा।
रोज़ाना 24 घंटे में से 18 घंटे लगातार काम, जबकि बाकी छह घंटे में सोना, खाना और नहाना ही नसीब होता था। एक महीने बाद जब ठगों को थोड़ा भरोसा हुआ तो मोबाइल वापस दिया गया। रात में सागर ने किसी तरह परिवार से व्हाट्सएप पर संपर्क किया। परिवार ने तुरंत भारतीय दूतावास से मदद की गुहार लगाई।
कैंप में सैकड़ों नहीं बल्कि हजारों युवक फंसे हुए थे, जो नौकरी की तलाश में यहां पहुंचे थे। काम के दौरान अगर पलक भी झपकी तो सजा मिलती पिटाई, पूरी रात 20-20 लीटर पानी की बोतलें उठाकर खड़ा रहना या 200-300 उठक-बैठक। सजा सब कुछ ठेकेदारों के मूड पर निर्भर करती थी। खाने में बीफ या उबली चीजें दी जाती थीं। शाकाहारी होने के कारण सागर को मजबूरी में उबला खाना खाना पड़ा। बताई गई सैलरी में से भी हर महीने 3-4 हजार रुपये काट लिए जाते थे। लगातार प्रयासों के बाद नवंबर 2025 में भारतीय दूतावास और स्थानीय मिलिट्री की मदद से सागर को छुड़ाया गया। इसके बाद उसे दो महीने एक कैंप में रखा गया और 8 जनवरी 2026 को वह भारत लौट सका।