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पंचकूला के फूड डिलीवरी ब्वॉय की प्रेरक कहानी: आधा शरीर बेजान पर नहीं मानी हार, व्हीलचेयर को बनाया ढाल

Sun, 04 Aug 2024 09:01 PM IST
अंकेश ठाकुर अक्षय जाधव, पंचकूला
अक्षय जाधव, पंचकूला Published by: अंकेश ठाकुर Updated Sun, 04 Aug 2024 09:01 PM IST
सार

पंचकूला के फूड डिलीवरी ब्वॉय टेक चंद की कहानी हर किसी के लिए प्रेरक है। एक हादसे के बाद उनके शरीर का आधा हिस्सा बेजान हो गया। चार साल तक बिस्तर पर रहे। पर उन्होंने हार नहीं मानी। टेक चंद व्हीलचेयर पर फूड डिलीवरी करते हैं। 

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Panchkula food delivery boy Tek chand he is on wheelchair doing food delivery Inspirational story
व्हीलचेर पर फूड डिलीवरी करने वाले टेक चंद। - फोटो : संवाद

विस्तार

इंसान के जीवन में कभी-कभी अचानक ऐसी घटनाएं हो जाती हैं, जो उसके जीवन का रुख ही मोड़ देती हैं। लेकिन जिसमें संघर्ष का माद्दा हो और जिंदगी की जंग जीतने की ललक हो, वह रास्ता निकाल ही लेता है। पंचकूला जिले के रायपुररानी के गांव मानकटबरा के रहने वाले टेक चंद इसकी मिसाल हैं। इनकी कहानी हर किसी के लिए प्रेरक है।

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एक हादसे में दोनों पैर पूरी तरह बेकार हो जाने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। अपने और अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए वे दिन भर शहर में फूड डिलीवरी का काम करते हैं। साथ ही अपने मिलने वालों और देखने वालों को किसी भी हालात में हार न मानने की प्रेरणा देते हैं।

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टेक चंद ने अपनी जीवन कहानी सुनाते हुए बताया कि वे बिजली विभाग में कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर कार्यरत थे। जून 2019 में एक दिन उन्होंने देखा कि सेक्टर-26 ओजस अस्पताल के सामने एक खंभे पर दिन में स्ट्रीट लाइट जल रही थी। उसे ठीक करने का काम उन्होंने शुरू किया। बिजली विभाग से फोन पर उन्हें सूचना मिली कि लाइनमैन ने बिजली बंद कर दी है। जब वह खंभे पर चढ़ गए तो अचानक उन्हें करंट लगा और वह नीचे गिर गए।

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इसके बाद वह साढ़े चार साल तक बिस्तर पर रहे। इस हादसे में उनकी नाभि के नीचे के पूरे हिस्से ने काम करना बंद कर गया। उनके भाई ने उन्हें घर से अलग कर दिया और कहा कि अपना खर्चा खुद उठाओ। इसके बाद वह चंडीगढ़ सेक्टर-28 स्पाइनल रिहैब सेंटर में गए, जहां उन्हें अकेले रहने की ट्रेनिंग दी गई। उन्हें व्हील चेयर पर कैसे रहना है, कैसे खाना-पीना-नहाना है, इसकी ट्रेनिंग दी गई। इसके अलावा उन्हें इलेक्ट्रिक व्हील चेयर दान करवाई गई और जोमैटो कंपनी में नौकरी लगवाई गई। वह पिछले डेढ़ महीने से शहर में जोमैटो कंपनी की तरहफ से फूड डिलीवरी का काम कर रहे हैं।

किसी ने नहीं की मदद

टेक चंद ने बताया कि वह रामगढ़ में अपनी मौसी के बेटे के साथ किराए पर कमरा लेकर रह रहे हैं। उनकी पत्नी और एक बेटा रायपुररानी के पास गांव मानकटबरा में रह रहे हैं। वह अपने घर का खर्चा खुद उठा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सूर्या कंपनी और बिजली विभाग से उन्हें किसी तरह की मदद नहीं मिली। उन्होंने सूर्या कंस्ट्रक्शन कंपनी के खिलाफ लेबर कोर्ट में केस भी किया है जिसका फैसला अभी नहीं आया है।

खुद सामान लेने के लिए आ जाते हैं लोग

टेक चंद ने बताया कि जब वह डिलीवरी करने जाते हैं और लोगों को बताते हैं कि वह दिव्यांग हैं तो लोग खुद सामान लेने के लिए उनके पास आ जाते हैं। कुछ लोग उनकी मजबूरी को देखकर टिप भी दे जाते हैं।

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