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Haryana: सरपंचों और पंचायत सदस्यों को हिरासत में लिया, पंचकूला-चंडीगढ़ मुख्य मार्ग 80 घंटे बाद बहाल

Sun, 05 Mar 2023 02:50 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो Updated Sun, 05 Mar 2023 02:50 AM IST
सार

पंचकूला पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई के दौरान डीसीपी सुमेर प्रताप सिंह और एडीसी वर्षा खनगवाल भी मौके पर मौजूद रहीं। बीते बुधवार को दोपहर करीब एक बजे हाउसिंग बोर्ड पर सरपंचों और पंचायत सदस्यों की पुलिस के साथ भिड़ंत हो गई थी।

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The sarpanches and panchayat members sitting on the dharna were detained
सरपंचों को हिरासत में लिया। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

पंचकूला-चंडीगढ़ मुख्य मार्ग से प्रदर्शनकारियों को हटाकर पुलिस ने करीब 80 घंटे बाद शनिवार देर रात रास्ता बहाल करा दिया। हालांकि एक तरफ के रास्ते को दिन में ही खुलवा दिया गया था। देर रात प्रदर्शनकारियों के हटने के बाद दोनों तरफ का रास्ता खुलने से वाहन चालकों को बड़ी राहत मिली। स्थानीय लोगों ने भी चैन की सांस ली। चार दिन से रास्ता बंद होने के कारण बड़ी संख्या में लोग प्रभावित थे।

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रात साढ़े आठ बजे कार्रवाई करते हुए पंचकूला पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई के दौरान डीसीपी सुमेर प्रताप सिंह और एडीसी वर्षा खनगवाल भी मौके पर मौजूद रहीं। बीते बुधवार को दोपहर करीब एक बजे हाउसिंग बोर्ड पर सरपंचों और पंचायत सदस्यों की पुलिस के साथ भिड़ंत हो गई थी। प्रदर्शनकारी चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री का आवास घेरने जा रहे थे। भिड़ंत में 22 पुलिसकर्मियों के साथ कई प्रदर्शनकारी भी घायल हुए थे। इसके बाद सरपंचों ने पंचकूला-चंडीगढ़ सीमा पर ही धरना लगा दिया था।
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इससे पंचकूला से चंडीगढ़ और चंडीगढ़ से पंचकूला आने-जाने वालों को वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ रहा था, जिससे जाम समेत दूसरी समस्याएं बढ़ गईं थीं। बच्चों की परीक्षाएं चल रही हैं, उन्हें भी आवागम में दिक्कत हो रही थी। इससे स्थानीय लोग भी परेशान थे।
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उधर, शनिवार रात हिरासत में लिए गए सरपंचों ने कहा कि उनका आंदोलन इस तरह से खत्म नहीं होगा। वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे। बता दें कि धरने पर बैठे सरपंचों ने शनिवार सुबह को अपने टेंट को विस्तार दे दिया था। पहले यहां सिर्फ एक शामियाना लगाया गया था लेकिन शनिवार को आठ से नौ शामियाने लगा दिए गए।

वहीं, छोटे स्पीकर की जगह बड़े लाउडस्पीकर लगा दिए गए। सरपंच एसोसिएशन ने यह भी एलान कर दिया कि वो इस बार हाउसिंग बोर्ड पर ही ही काली होली मनाएंगे। शनिवार सुबह साढ़े 11 बजे एसीपी सुरेंद्र यादव धरनारत सरपंच एसोसिएशन के सदस्यों के बीच पहुंचे। उन्होंने सरपंचों से लिखित में आश्वासन लिया कि उनकी एसोसिएशन का कोई भी सदस्य या प्रदर्शनकारी चंडीगढ़ की ओर कूच नहीं करेगा।

यह आश्वासन मिलने के बाद दोपहर सवा 12 बजे उन्होंने एक तरफ का रास्ता खुलवा दिया लेकिन दूसरी तरफ का रास्ता बंद होने से पंचकूला से चंडीगढ़ जाने वाले लोगों की समस्या कम नहीं हुई। उन्हें वैकल्पिक मार्गों का ही सहारा लेना पड़ा, जिससे जाम की स्थिति बनी रही। हालांकि देर रात दोनों तरफ के रास्ते खुलने के बाद वाहनों का आवागमन शुरू हो गया और लोगों ने राहत की सांस ली।

धरने पर ही बनने लगा था लंगर
सरपंचों का आंदोलन लगातार मजबूत होता जा रहा था। विभिन्न संगठन धरने को समर्थन देने के लिए पहुंच रहे थे। शुरू के दो दिन प्रदर्शनकारियों को खाने की समस्या का सामना करना पड़ा। पहले दिन प्रदर्शनकारियों ने जहां होटलों से मंगवाकर खाना खाया तो दूसरे दिन एक हलवाई ने सेक्टर-5 में खाना बनाया था। शनिवार से सरपंचों का लंगर हाउसिंग बार्ड स्थित धरनास्थल पर ही बनने लगा था। वहीं पर चाय की भी व्यवस्था की गई थी। शनिवार को पूर्व विधायक एवं आम आदमी पार्टी नेता निर्मल सिंह भी धरने पर समर्थन देने पहुंचे।

राष्ट्रीय अध्यक्ष पहुंचे समर्थन देने
प्रदेश के सरपंचों एवं पंचायत सदस्यों के आंदोलन को समर्थन देने के लिए शनिवार को राष्ट्रीय सरपंच संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयराम पलसानिया हाउसिंग बोर्ड पर समर्थन देने पहुंचे। उन्होंने कहा कि सरपंचों को अपने हक के लिए मजबूती से लड़ना चाहिए। पूरे देश के सरपंच उनके आंदोलन के साथ हैं। इस आंदोलन में जब भी उनकी जरूरत होगी तो वे हमेशा इसके लिए तैयार रहेंगे।

टेंटों को हटाने में लगा एक घंटा
सरपंचों को हिरासत में लेने के लिए हाउसिंग बोर्ड पर करीब 500 पुलिसकर्मी पहुंचे थे। रात साढ़े आठ बजे सरपंचों के हिरासत में लउन्होंने टेंट को हटाना शुरू किया तो इसमें करीब एक घंटे का समय लग गया। पुलिसकर्मियों ने सरपंचों के गद्दों और हुक्के को उठाकर साइड में रखा।

रास्ता खुलवाले के लिए धरने पर बैठे सरपंचों और पंचायत सदस्यों को हिरासत में लिया गया है और रास्ते को पूरी तरह खुलवा दिया गया है। अब वाहन चालकों को आवागमन में कोई परेशानी नहीं होगी। - अर्शदीप, एसीपी, पंचकूला

हाईकोर्ट के आदेश पर चार दिन बाद रास्ता साफ, सरपंचों को उठाया, तनातनी बरकरार
ई-टेंडरिंग के विरोध में पंचकूला-चंडीगढ़ मुख्य मार्ग को चार दिन से बाधित कर धरने पर बैठे सरपंचों और पंचायत सदस्यों को पंचकूला पुलिस ने शनिवार रात साढ़े आठ बजे हिरासत में लेकर रास्ता खुलवा दिया। यह कार्रवाई पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद हुई। दिन में मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को रात दस बजे तक की मोहलत दी थी।

उच्च न्यायालय ने दो टूक कहा था कि सरकार कानून के अनुरूप कोई भी कदम उठाए लेकिन रास्ता रात दस बजे तक खाली करवा लिया जाए। ऐसा करने में विफल रहने पर पंचकूला पुलिस कमिश्नर व डीसी को खुद कोर्ट में पेश होकर जवाब देना होगा। अदालत के कड़ा रुख अपनाने के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आ गया। शाम सात बजे बड़ी संख्या में पुलिस बल के साथ डीसीपी सुमेर प्रताप सिंह मौके पर पहुंचे और हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए सरपंचों को रास्ता खाली करने को कहा। हरियाणा सरपंच एसोसिएशन ने चर्चा के लिए 15 मिनट की मोहलत मांगी लेकिन समय समाप्त होने के बाद रास्ते से हटने से इन्कार कर दिया।

एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष सरपंच रणबीर समैण ने कहा कि जब तक हमारी मांगे मानी नहीं जातीं, हम यहां से नहीं हटेंगे। समैण ने कहा कि अगर हमारी मांगे 9 मार्च को नहीं मानी गईं तो 11 मार्च को करनाल में सीएम के आवास का घेराव करेंगे। इसके बाद पुलिस ने बलपूर्वक सरंपचों को हटाने का फैसला लिया और कार्रवाई शुरू कर दी। इस दौरान सरपंचों और पंचायत सदस्यों ने कार्रवाई का विरोध किया और सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। पुलिस ने करीब 60 सरपंचों और पंचायत सदस्यों को जबरन रोडवेज बसों में बैठाया और हिरासत में ले लिया। सभी को पुलिस लाइन ले जाया गया। रास्ता खाली होने के बाद पुलिस ने बैरिकेडिंग और प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए टेंटों को उखाड़ दिया। देर रात पंचकूला-चंडीगढ़ मुख्य मार्ग पर वाहनों का आवागमन शुरू हो गया।

पंचकूला निवासी डॉक्टर ने लगाई थी जनहित याचिका
पंचकूला निवासी डाक्टर नीतू बजाज व अन्य ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल करते हुए बंद रास्ते के कारण लोगों को होने वाली परेशानी का मुद्दा उठाया था। याचिका में बताया कि यह रास्ता चंडीगढ़-पंचकूला की लाइफ लाइन है। हजारों लोगों को रोजाना पंचकूला से चंडीगढ़ व चंडीगढ़ से पंचकूला आना-जाना होता है। रास्ता ब्लॉक होने से न केवल लोगों के सामान्य जीवन पर फर्क पड़ा है बल्कि इमरजेंसी में लोगों का पीजीआई जैसे संस्थानों में जाना भी मुश्किल हो गया है। पंचकूला से रोज स्कूल बसें, कर्मचारी व अन्य लोग अपने कार्य के लिए चंडीगढ़ जाने को इस मार्ग का इस्तेमाल करते हैं। इस मार्ग के बाधित होने से पंचकूला व चंडीगढ़ दोनों स्थानों पर जाम की स्थिति बन गई है।

बहस के दौरान हरियाणा सरकार की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि मुख्यमंत्री ने आंदोलनकारियों को 9 मार्च को मिलने का समय दिया है और पुलिस ने आंदोलनकारियों को रास्ता खोलने का नोटिस दिया। उन्होंने एक तरफ का रास्ता खोलने पर सहमति दी है। कोर्ट ने कहा कि यह गंभीर विषय है और सरकार को चाहिए कि इस समस्या का हल निकाले। शनिवार को केवल एक मार्ग को खोलने की अनुमति दी गई और बाद में वार्ता विफल हुई तो हालात पहले जैसे होंगे। कोर्ट ने अब हरियाणा सरकार को रात दस बजे तक की मोहलत देते हुए इस मार्ग को खाली करवाने और ऐसा करने में विफल रहने पर पंचकूला के पुलिस कमिश्नर व डीसी को हाजिर रहने का आदेश दिया है।

सरकार पर उठाए सवाल
हाईकोर्ट में शनिवार को तीन बजे सुनवाई आरंभ हुई तो कोर्ट ने सरकार को भी सवालों के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया। कोर्ट ने कहा कि कैसे यह लोग इतनी संख्या में हाउसिंग बोर्ड के पास एकत्रित हो गए और ऐसा करने के लिए उनको किसने अनुमति दी। कोर्ट ने कहा कि यदि पहले से मुस्तैदी से काम किया जाता है तो इस प्रकार की स्थिति ही नहीं बनती। ऐसे में अब शनिवार रात दस बजे तक ब्लॉक रोड को खाली करवाया जाए।

सरकार पर दबाव बनाने के लिए लोगों को परेशानी में डालने की नहीं दे सकते अनुमति हाईकोर्ट ने कहा कि लोगों को अपनी मांगों के लिए विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन इसके लिए आम लोगों को परेशानी में डालकर सरकार पर मांगों को मानने के लिए दबाव बनाने का अधिकार नहीं है।

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