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बतौड़ गांव की तर्ज पर गंदे पानी का निष्पादन करें पंचायतें
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कूडे़ का निष्पादन करने के लिए सरपंचों की बैठक की अध्यक्षता करते डीसी।
- फोटो : PKL OFFICE
पंचकूला। पंचायत प्रतिनिधि गांवों से कूड़े और गंदे पानी का सही निष्पादन सुनिश्चित करें, ताकि गांवों को पूर्ण रूप से स्वच्छ एवं सुंदर बनाया जा सके। उपायुक्त मुकेश कुमार आहूजा ने जिला सचिवालय के सभागार में रायपुररानी खंड के सरपंचों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों में नवीनतम तकनीकी को अपना कर ठोस कचरा एवं तरल पदार्थों को दोबारा से उपयोग में लाने के लिए सार्थक पहल करनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने मन की बात कार्यक्रम में ग्राम पंचायत बतौड़ का नाम देश के मानचित्र पर ला दिया है। इस पंचायत को रोल मॉडल के रूप में अपनाकर सभी गांवों में गंदे पानी की उचित निकासी करके खेतों में सिंचाई के उपयोग में लाएं। इससे लोगों को गंदगी से होने वाले संक्रमण से छुटकारा मिलेगा और सिंचाई के लिए जल भी मिलेगा।
मछली पालन का व्यवसाय अपना कर आमदनी बढ़ाएं
पानी में मछली पालन जैसा व्यवसाय अपनाकर नीली क्रांति को भी बढ़ावा दिया जा सकता है, जिससे ग्राम पंचायतों की आमदनी आय में भी बढ़ोत्तरी होगी। उपायुक्त ने कहा कि यदि किसी गांव में पंचायती जमीन उपलब्ध नहीं तो किसान अपने खेतों में स्टोरेज टैंक बनाकर री-साइकिल हुए जल का प्रयोग कर सकते हैं। ठोस कचरा प्रबंधन के तहत लगभग हर गांवों में 2 लाख 94 हजार रुपये की राशि से शेड का निर्माण किया गया है। इस शेड में गांव का कचरा एकत्र कर उसे सेग्रीगेट कर प्लास्टिक, गते आदि की बिक्री करके आजीविका का साधन बनाया जा सकता है। गीले कूडे़ से खाद बनाकर उसे बेचा जा सकती है।
गांवों में सफाई व्यवस्था दुरुस्त करें
जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी निशु सिंगल ने बताया कि गांव में सफाई के लिए कर्मचारी लगाए हुए हैं। इसके अलावा अतिरिक्त सफाई कर्मचारी लगाकर भी गांवों में सफाई व्यवस्था बनाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि घर-घर कूड़ा एकत्रित करने के लिए पंचायतें मामूली चार्ज भी ले सकती हैं, जिससे सफाई कर्मचारी की आय निकाली जा सकती है। उन्होंने कहा कि गांव से निकलने वाला गंदा पानी सीधे रूप से खेतों में न फैले और इसका समुचित उपयोग हो। इसलिए सभी सरपंच इस कार्य को आगामी मार्च तक अवश्य ही अमल में लाएं। बैठक में मुख्य कार्यकारी अधिकारी निशु सिंगल, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी कंवर दमन सिंह सहित रायपुररानी खंड के सभी सरपंच, ब्लॉक को-आर्डिनेटर ने भाग लिया।
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मछली पालन का व्यवसाय अपना कर आमदनी बढ़ाएं
पानी में मछली पालन जैसा व्यवसाय अपनाकर नीली क्रांति को भी बढ़ावा दिया जा सकता है, जिससे ग्राम पंचायतों की आमदनी आय में भी बढ़ोत्तरी होगी। उपायुक्त ने कहा कि यदि किसी गांव में पंचायती जमीन उपलब्ध नहीं तो किसान अपने खेतों में स्टोरेज टैंक बनाकर री-साइकिल हुए जल का प्रयोग कर सकते हैं। ठोस कचरा प्रबंधन के तहत लगभग हर गांवों में 2 लाख 94 हजार रुपये की राशि से शेड का निर्माण किया गया है। इस शेड में गांव का कचरा एकत्र कर उसे सेग्रीगेट कर प्लास्टिक, गते आदि की बिक्री करके आजीविका का साधन बनाया जा सकता है। गीले कूडे़ से खाद बनाकर उसे बेचा जा सकती है।
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गांवों में सफाई व्यवस्था दुरुस्त करें
जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी निशु सिंगल ने बताया कि गांव में सफाई के लिए कर्मचारी लगाए हुए हैं। इसके अलावा अतिरिक्त सफाई कर्मचारी लगाकर भी गांवों में सफाई व्यवस्था बनाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि घर-घर कूड़ा एकत्रित करने के लिए पंचायतें मामूली चार्ज भी ले सकती हैं, जिससे सफाई कर्मचारी की आय निकाली जा सकती है। उन्होंने कहा कि गांव से निकलने वाला गंदा पानी सीधे रूप से खेतों में न फैले और इसका समुचित उपयोग हो। इसलिए सभी सरपंच इस कार्य को आगामी मार्च तक अवश्य ही अमल में लाएं। बैठक में मुख्य कार्यकारी अधिकारी निशु सिंगल, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी कंवर दमन सिंह सहित रायपुररानी खंड के सभी सरपंच, ब्लॉक को-आर्डिनेटर ने भाग लिया।
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