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केबल किराया 100 रुपये तय करने पर ऑपरेटर भड़के
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चंडीगढ़। पंजाब के लोकल केबल ऑपरेटरों ने मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी द्वारा हाल ही में किए गए उस एलान की आलोचना की है, जिसमें उन्होंने राज्य में केबल का बिल प्रति माह 100 रुपये तय करने की बात कही थी। बुधवार को लोकल केबल आपरेटर्स के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि सरकार या तो अपने फैसले पर पुनर्विचार करे या फिर अपने फैसले संबंधी अधिसूचना जारी करे।
चंडीगढ़ प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में यूनियन के प्रधान संजीव सिंह सन्नी गिल ने कहा कि देशभर में केबल के कारोबार पर ट्राई का नियंत्रण है और केबल के लिए रेट-टैरिफ भी ट्राई द्वारा ही तय किया जाता है। राज्य सरकारें केबल के दाम करने का अधिकार नहीं रखतीं। पंजाब में लागू केबल के दाम 3 मार्च, 2017 को ट्राई द्वारा तय किए अनुसार हैं, जिसके तहत 200 मुफ्त चैनल (फ्री टू एयर) के लिए नेटवर्क कैपेसिटी फीस (एनसीएफ) 130 रुपये महीना ली जाती है और बाकी पेड चैनलों के लिए ग्राहक अपनी पसंद के अनुसार संबंधित ब्राडकास्टर द्वारा तय दाम अदा करते हैं।
उन्होंने बताया कि 130 रुपये पर 18 फीसदी जीएसटी लागू है और केबल ऑपरेटर को 130 रुपये के मासिक रेट में से 45 फीसदी राशि मिलती है जबकि 55 फीसदी राशि एमएसओ (सभी सिग्नल कलेक्शन) को जाती है। ग्राहक द्वारा पेड चैनल चुनने पर ब्राडकास्टर की तरफ से जो 20 फीसदी राशि दी जाती है, उसमें से 10 फीसदी केबल ऑपरेटर को और 10 फीसदी एमएसओ को जाती है। इस तरह केबल ऑपरेटर के हिस्से में प्रति चैलन 65 रुपये आते हैं, जिसके सहारे उसे अपना सारा खर्च चलाना है।
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ग्राहकों को डीटीएच पर ले जाने की साजिश
सन्नी गिल ने आरोप लगाया कि जिस तरह 100 रुपये महीना केबल की दर तय की गई है, उससे साफ है कि राज्य में केबल ऑपरेटर खत्म हो जाएंगे और सरकार ग्राहकों को रिलायंस, टाटा जैसे बड़े डीटीएच प्रमोटरों की तरफ मोड़ने की साजिश रच रही है, जो प्रति माह 400-500 रुपये तक वसूल रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा के पीछे सरकार में कोई डीटीएच समर्थक लॉबी काम कर रही है जो केबल ऑपरेटरों को माफिया बताकर ग्राहकों को डीटीएच प्रमोटरों के भरोसे छोड़ना चाहती है। पंजाब में 5000 केबल ऑपरेटर हैं जो 1.80 लाख ग्राहकों को केबल टीवी सुविधा मुहैया करा रहे हैं। इस कारोबार पर 25000 परिवार निर्भर हैं।
सन्नी गिल ने इस आरोप का खंडन किया कि पंजाब में केबल माफिया सक्त्रिस्य है। उन्होंने कहा कि ट्राई द्वारा जो व्यवस्था की गई है, कोई भी केबल ऑपरेटर अपने ग्राहकों की संख्या छिपा नहीं सकता।
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चंडीगढ़ प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में यूनियन के प्रधान संजीव सिंह सन्नी गिल ने कहा कि देशभर में केबल के कारोबार पर ट्राई का नियंत्रण है और केबल के लिए रेट-टैरिफ भी ट्राई द्वारा ही तय किया जाता है। राज्य सरकारें केबल के दाम करने का अधिकार नहीं रखतीं। पंजाब में लागू केबल के दाम 3 मार्च, 2017 को ट्राई द्वारा तय किए अनुसार हैं, जिसके तहत 200 मुफ्त चैनल (फ्री टू एयर) के लिए नेटवर्क कैपेसिटी फीस (एनसीएफ) 130 रुपये महीना ली जाती है और बाकी पेड चैनलों के लिए ग्राहक अपनी पसंद के अनुसार संबंधित ब्राडकास्टर द्वारा तय दाम अदा करते हैं।
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उन्होंने बताया कि 130 रुपये पर 18 फीसदी जीएसटी लागू है और केबल ऑपरेटर को 130 रुपये के मासिक रेट में से 45 फीसदी राशि मिलती है जबकि 55 फीसदी राशि एमएसओ (सभी सिग्नल कलेक्शन) को जाती है। ग्राहक द्वारा पेड चैनल चुनने पर ब्राडकास्टर की तरफ से जो 20 फीसदी राशि दी जाती है, उसमें से 10 फीसदी केबल ऑपरेटर को और 10 फीसदी एमएसओ को जाती है। इस तरह केबल ऑपरेटर के हिस्से में प्रति चैलन 65 रुपये आते हैं, जिसके सहारे उसे अपना सारा खर्च चलाना है।
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ग्राहकों को डीटीएच पर ले जाने की साजिश
सन्नी गिल ने आरोप लगाया कि जिस तरह 100 रुपये महीना केबल की दर तय की गई है, उससे साफ है कि राज्य में केबल ऑपरेटर खत्म हो जाएंगे और सरकार ग्राहकों को रिलायंस, टाटा जैसे बड़े डीटीएच प्रमोटरों की तरफ मोड़ने की साजिश रच रही है, जो प्रति माह 400-500 रुपये तक वसूल रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा के पीछे सरकार में कोई डीटीएच समर्थक लॉबी काम कर रही है जो केबल ऑपरेटरों को माफिया बताकर ग्राहकों को डीटीएच प्रमोटरों के भरोसे छोड़ना चाहती है। पंजाब में 5000 केबल ऑपरेटर हैं जो 1.80 लाख ग्राहकों को केबल टीवी सुविधा मुहैया करा रहे हैं। इस कारोबार पर 25000 परिवार निर्भर हैं।
सन्नी गिल ने इस आरोप का खंडन किया कि पंजाब में केबल माफिया सक्त्रिस्य है। उन्होंने कहा कि ट्राई द्वारा जो व्यवस्था की गई है, कोई भी केबल ऑपरेटर अपने ग्राहकों की संख्या छिपा नहीं सकता।