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अफसर रसूख दिखाने को वाहनों में कर रहे बत्तियों का इस्तेमाल, मामला पहुंचा हाईकोर्ट
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चंडीगढ़। सरकारी अधिकारियों द्वारा रसूख दिखाने के लिए सरकारी व निजी वाहनों पर नीली व लाल बत्ती लगाने के चलन को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के खिलाफ बताते हुए इस पर रोक लगाने के निर्देश जारी करने के लिए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है। हाईकोर्ट इस याचिका पर 10 सितंबर को सुनवाई करेगा।
मोहाली के एडवोकेट निखिल सराफ ने जनहित याचिका में बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने अभय सिंह बनाम उत्तर प्रदेश मामले में स्पष्ट किया था कि केवल आपातकालीन सेवाओं और आपदा प्रबंधन के लिए ही इन लाल और नीली बत्तियों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इसके अलावा इनका इस्तेमाल नहीं होना चाहिए और यदि इस्तेमाल करना भी है तो उसके लिए नोटिफिकेशन जारी करना अनिवार्य है। साथ ही जिन लोगों को यह बत्ती इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाए उसके लिए सार्वजनिक सूचना जारी की जाए।
याची ने कहा कि एक तरफ सुप्रीम कोर्ट का आदेश मौजूद है और दूसरी तरफ केंद्र सरकार का इसके बावजूद केवल अपने रुतबे और रसूख के लिए अधिकारी न केवल सरकारी बल्कि निजी वाहनों पर भी इन बत्तियों का इस्तेमाल कर रहे हैं। हाईकोर्ट से अपील की गई कि ऐसा करने वालों पर उचित कार्रवाई करने तथा इस प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए उचित निर्देश जारी किए जाएं।
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याची ने बताया कि अपनी इस मांग को लेकर याची ने हरियाणा, पंजाब और यूटी को मांगपत्र भी सौंपा था, लेकिन इस मांगपत्र पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। इस कारण हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी है। याची का पक्ष सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका पर 10 सितंबर को सुनवाई का निर्णय लिया है।
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मोहाली के एडवोकेट निखिल सराफ ने जनहित याचिका में बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने अभय सिंह बनाम उत्तर प्रदेश मामले में स्पष्ट किया था कि केवल आपातकालीन सेवाओं और आपदा प्रबंधन के लिए ही इन लाल और नीली बत्तियों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इसके अलावा इनका इस्तेमाल नहीं होना चाहिए और यदि इस्तेमाल करना भी है तो उसके लिए नोटिफिकेशन जारी करना अनिवार्य है। साथ ही जिन लोगों को यह बत्ती इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाए उसके लिए सार्वजनिक सूचना जारी की जाए।
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याची ने कहा कि एक तरफ सुप्रीम कोर्ट का आदेश मौजूद है और दूसरी तरफ केंद्र सरकार का इसके बावजूद केवल अपने रुतबे और रसूख के लिए अधिकारी न केवल सरकारी बल्कि निजी वाहनों पर भी इन बत्तियों का इस्तेमाल कर रहे हैं। हाईकोर्ट से अपील की गई कि ऐसा करने वालों पर उचित कार्रवाई करने तथा इस प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए उचित निर्देश जारी किए जाएं।
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याची ने बताया कि अपनी इस मांग को लेकर याची ने हरियाणा, पंजाब और यूटी को मांगपत्र भी सौंपा था, लेकिन इस मांगपत्र पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। इस कारण हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी है। याची का पक्ष सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका पर 10 सितंबर को सुनवाई का निर्णय लिया है।