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बड़ी राहतः कैंसर के इलाज में अब नहीं होगी देरी, बीमारी की वास्तविक स्थिति बताएगा सॉफ्टवेयर
Sun, 23 Feb 2020 12:57 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Sun, 23 Feb 2020 12:57 PM IST
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कैंसर के मरीजों में आमतौर पर देरी से बीमारी का पता चलने जैसी गंभीर समस्या का समाधान लगभग तलाश लिया गया है। इसकेलिए एमडी एंडर्सन यूएसए एक खास तरह का सॉफ्टवेयर तैयार कर रहा है। इसका 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इसकी मदद से पहले से प्रयोग किए जा रहे जांच उपकरणों जैसे पेट स्कैन, सिटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड से ही कैंसर के स्टेज की सही जानकारी चंद मिनटों में मिल सकेगी।
कैंसर डिडक्शन सॉफ्टवेयर टारगेटेड रिपोर्ट केफार्मूले पर काम करेगा। यह जानकारी पीजीआई रेडियोडायग्नोसिस और इमेजिंग विभाग के प्रो. नवीन कालरा ने दी। उन्होंने बताया कि उम्मीद की जा रही है कि पीजीआई आने वाले मरीजों को भी उस सॉफ्टवेयर का लाभ मिलेगा। फिर लक्षण केआधार पर मरीजों की प्रारंभिक जांच के दौरान ही कैंसर होने या न होने का सही पता चल जायेगा। डॉ. कालरा का कहना है कि कैंसर के मरीजों में बीमारी का देर से पता चलना सबसे बड़ी परेशानी है।
उदाहरण केतौर पर उन्होंने बताया कि लीवर कैंसर के मरीजों की शुरूआती 6 से 8 महीने की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में इसकी पुष्टि ही नहीं होती। जब तक इसका पता चलता है बहुत देर हो गया होता है, इसलिए इस सॉफ्टवेयर को तैयार किया जा रहा है ताकि किसी भी प्रकार के कैंसर की गहराई तक जानकारी प्राप्त की जा सके। कैंसर के साथ ही ट्यूमर और पुराने अल्सर केकेस में भी इसका लाभ उठाया जा सकेगा।
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विशेषज्ञों का हुआ जमावड़ा
पीजीआई में शनिवार को इंडियन रेडियोलॉजिकल इमेजिंग एसोसिएशन के चंडीगढ़ चैप्टर के 7वें एनुअल कांफ्रेंस की शुरुआत हुई। इस दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन पीजीआई रेडियोडायग्नोसिस और इमेजिंग विभाग की ओर से किया जा रहा है। सम्मेलन का उद्घाटन पीजीआई केनिदेशक प्रो. जगतराम ने किया। कार्यक्रम के आयोजन समिति के सचिव प्रो. एमएस संधू और प्रो. नवीन कालरा ने बताया कि कार्यक्रम में देशभर के अलग-अलग मेडिकल कॉलेज के लगभग 250 प्रतिनिधियों ने भाग लिया है।
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कैंसर डिडक्शन सॉफ्टवेयर टारगेटेड रिपोर्ट केफार्मूले पर काम करेगा। यह जानकारी पीजीआई रेडियोडायग्नोसिस और इमेजिंग विभाग के प्रो. नवीन कालरा ने दी। उन्होंने बताया कि उम्मीद की जा रही है कि पीजीआई आने वाले मरीजों को भी उस सॉफ्टवेयर का लाभ मिलेगा। फिर लक्षण केआधार पर मरीजों की प्रारंभिक जांच के दौरान ही कैंसर होने या न होने का सही पता चल जायेगा। डॉ. कालरा का कहना है कि कैंसर के मरीजों में बीमारी का देर से पता चलना सबसे बड़ी परेशानी है।
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उदाहरण केतौर पर उन्होंने बताया कि लीवर कैंसर के मरीजों की शुरूआती 6 से 8 महीने की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में इसकी पुष्टि ही नहीं होती। जब तक इसका पता चलता है बहुत देर हो गया होता है, इसलिए इस सॉफ्टवेयर को तैयार किया जा रहा है ताकि किसी भी प्रकार के कैंसर की गहराई तक जानकारी प्राप्त की जा सके। कैंसर के साथ ही ट्यूमर और पुराने अल्सर केकेस में भी इसका लाभ उठाया जा सकेगा।
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पीजीआई में शनिवार को इंडियन रेडियोलॉजिकल इमेजिंग एसोसिएशन के चंडीगढ़ चैप्टर के 7वें एनुअल कांफ्रेंस की शुरुआत हुई। इस दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन पीजीआई रेडियोडायग्नोसिस और इमेजिंग विभाग की ओर से किया जा रहा है। सम्मेलन का उद्घाटन पीजीआई केनिदेशक प्रो. जगतराम ने किया। कार्यक्रम के आयोजन समिति के सचिव प्रो. एमएस संधू और प्रो. नवीन कालरा ने बताया कि कार्यक्रम में देशभर के अलग-अलग मेडिकल कॉलेज के लगभग 250 प्रतिनिधियों ने भाग लिया है।