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Panchkula News: अब मोहाली को स्मार्ट सिटी बनाने तैयारी में जुटी पंजाब सरकार

Fri, 16 Jun 2023 01:55 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 16 Jun 2023 01:55 AM IST
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Now the Punjab government is preparing to make Mohali a smart city.
चंडीगढ़। पंजाब का वीआईपी शहर मोहाली आने वाले समय में स्मार्ट सिटी की सूची में शुमार हो सकता है। सूबा सरकार ने इस दिशा में कदम बढ़ा दिया है। राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने वीरवार को दिल्ली में आवास और शहरी मामलों के केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी से मुलाकात में यह मामला उठाया है। उन्होंने मोहाली को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शामिल की वजह भी गिनाईं, ताकि इलाके के सर्वपक्षीय विकास को यकीनी बनाया जा सकें। मुख्यमंत्री ने हरदीप पुरी से मुलाकात में मोहाली को स्मार्ट सिटी के तौर पर विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला ट्राइसिटी का हिस्सा होने के कारण मोहाली शहर विशेष महत्व रखता है। पंजाब सरकार के अधिकतर विभागों के मुख्य कार्यालय भी मोहाली में हैं, जिस कारण इसके विकास को और बढ़ावा देना जरूरी है।
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इस शहर को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शामिल करना समय की आवश्यकता है जिससे इसके सर्वपक्षीय और योजनाबद्ध विकास को यकीनी बनाया जा सके। मोहाली और इसके साथ लगती म्युनिसिपल कमेटियां जैसे जीरकपुर, खरड़, डेराबस्सी और कुराली में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, शैक्षणिक संस्थानों, टाउनशिप और उद्योगों की स्थापना के रूप में बड़े स्तर पर विकास हुआ है। ऐसे में उक्त क्षेत्र को योजनाबद्ध और बुनियादी ढांचों के विकास के लिए विशेष फंडों की जरूरत है।
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अमृत-1.0 की तर्ज पर फंड हो बहाल
इस दौरान मीटिंग में सीएम ने केंद्रीय मंत्री के समक्ष एक अन्य मुद्दा उठाते हुए कहा कि अमृत-1.0 की तरह ही अमृत 2.0 में फंड बहाल किए जाए। अमृत 1.0 के अंतर्गत एक लाख से 10 लाख आबादी की श्रेणी वाले कस्बों के लिए केंद्र और राज्य का हिस्सा 50:50 था जबकि अमृत 2.0 के अंतर्गत, इसी श्रेणी वाले कस्बों के लिए केंद्र और राज्य का हिस्सा बदल कर 33:67 कर दिया गया है। लुधियाना और अमृतसर जैसे 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के लिए यह अनुपात 33:67 (केंद्र और राज्य का हिस्सा) था और अमृत 2.0 के अंतर्गत, यह अनुपात अब 75:25 है। उन्होंने उन्हेें बताया यह शहर बहुत तेजी के साथ फैल रहे हैं, इसलिए इनके बुनियादी ढांचों के विकास की लगातार जरूरत है, जिसके लिए पुराना अनुपात ही बहाल किया जाना चाहिए।
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