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Panchkula News: अब न्यूरल हीलिंग करेगी नाइपर में बनी नई दवा
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मोहाली। अब मष्तिस्क में स्ट्रोक्स के लिए नई दवा खोज ली गई है। इस्केमिक स्ट्रोक के लिए तैयार यह दवा राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (नाइपर) के वैज्ञानिकों ने बनाई है। यह न्यूरोन प्रोटेक्शन और न्यूरल रिपेयर के लिए विकसित की गई है।
मस्तिष्क में रक्त प्रवाह अवरुद्ध होने को इस्केमिक स्ट्रोक कहते हैं। ऐसे में यह दवा जानलेवा आपातकाल के समय में तो काम आएगी ही साथ ही इस दवा का असर बाजार में उपलब्ध दवाओं से कहीं ज्यादा रहेगा। फिलहाल इसका प्रयोग चूहों पर किया गया है, जो कि पूरी तरह से सफल रहा है।
जल्द ही यह दवा मानव पर प्रयोग के लिए फाइल की जाएगी। फिलहाल इस्केमिक स्ट्रोक के लिए मार्केट में टीपीए ड्रग उपलब्ध है। नाइपर द्वारा विकसित की गई यह दवा इंजीनियरिंग वर्जन से तैयार की गई है। इसमें प्रोटीन की इंजीनियरिंग की गई है। नाइपर के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के प्रोफेसर डॉ. अभय एच पांडे और फार्माकोलॉजी और टॉक्सिकोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. श्याम एस. शर्मा ने इस तकनीक को वर्तमान प्रकाशनों के माध्यम से वेलिडेट किया है। इकेस्मिक स्ट्रोक दुनिया भर में मृत्यु का प्रमुख कारण और विकलांगता का तीसरा प्रमुख कारण बताया जाता है।
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न्यूरो-ई प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले मानव प्रोटीन (एपीओई) का एक इंजीनियर प्रारूप है। यह मस्तिष्क में प्राकृतिक कार्यों के समान न्यूरल रिपेयर की सुविधा प्रदान करता है। न्यूरो-ई के आविष्कारक प्रो. पांडे ने कहा कि न्यूरो-हीलर बायो फार्मास्युटिकल एपीओई एक प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला प्रोटीन है। यह न्यूरो प्रोटेक्शन और न्यूरल रिपेयर के लिए महत्वपूर्ण है। न्यूरो-ई के विकास से हमने इसको विकसित किया है जो न्यूरो प्रोटेक्शन को बढ़ाता है और उपचार को तेज करता है।
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मस्तिष्क में रक्त प्रवाह अवरुद्ध होने को इस्केमिक स्ट्रोक कहते हैं। ऐसे में यह दवा जानलेवा आपातकाल के समय में तो काम आएगी ही साथ ही इस दवा का असर बाजार में उपलब्ध दवाओं से कहीं ज्यादा रहेगा। फिलहाल इसका प्रयोग चूहों पर किया गया है, जो कि पूरी तरह से सफल रहा है।
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जल्द ही यह दवा मानव पर प्रयोग के लिए फाइल की जाएगी। फिलहाल इस्केमिक स्ट्रोक के लिए मार्केट में टीपीए ड्रग उपलब्ध है। नाइपर द्वारा विकसित की गई यह दवा इंजीनियरिंग वर्जन से तैयार की गई है। इसमें प्रोटीन की इंजीनियरिंग की गई है। नाइपर के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के प्रोफेसर डॉ. अभय एच पांडे और फार्माकोलॉजी और टॉक्सिकोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. श्याम एस. शर्मा ने इस तकनीक को वर्तमान प्रकाशनों के माध्यम से वेलिडेट किया है। इकेस्मिक स्ट्रोक दुनिया भर में मृत्यु का प्रमुख कारण और विकलांगता का तीसरा प्रमुख कारण बताया जाता है।
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न्यूरो-ई प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले मानव प्रोटीन (एपीओई) का एक इंजीनियर प्रारूप है। यह मस्तिष्क में प्राकृतिक कार्यों के समान न्यूरल रिपेयर की सुविधा प्रदान करता है। न्यूरो-ई के आविष्कारक प्रो. पांडे ने कहा कि न्यूरो-हीलर बायो फार्मास्युटिकल एपीओई एक प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला प्रोटीन है। यह न्यूरो प्रोटेक्शन और न्यूरल रिपेयर के लिए महत्वपूर्ण है। न्यूरो-ई के विकास से हमने इसको विकसित किया है जो न्यूरो प्रोटेक्शन को बढ़ाता है और उपचार को तेज करता है।