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पंजाब में स्मार्ट सिटी मिशन मुहिम की नहीं आई अच्छी रिपोर्ट
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चंडीगढ़। पंजाब में शहरों को स्मार्ट बनाए जाने के केंद्र सरकार के मिशन की अच्छी रिपोर्ट नहीं आई है। 5 सालों के दौरान हुए मिशन के कामों की समीक्षा में खुलासा हुआ है कि शहरों में किए जाने वाले 124 कार्यों में सिर्फ 15 क्षेत्रों में काम किया गया है। कैग की रिपोर्ट में इस खुलासे के बाद अब पंजाब सरकार ने स्मार्ट सिटी मिशन की समीक्षा शुरू करने का फैसला किया है।
केंद्र सरकार ने जून 2015 में स्मार्ट सिटी मिशन शुरू किया था, जिसका उद्देश्य पांच साल में 100 शहरों को कवर करना था। इसका उद्देश्य उन शहरों को बढ़ावा देना था जो मुख्य बुनियादी ढांचा प्रदान करते हैं और अपने नागरिकों को जीवन की एक अच्छी गुणवत्ता प्रदान करते हैं। मिशन को संबंधित राज्य सरकारों द्वारा प्रचारित स्पेशल पर्पस व्हीकल (एसपीवी) के माध्यम से शहर स्तर पर लागू किया जाना था। इसी मिशन के तहत सूबे के लुधियाना शहर को भारत सरकार द्वारा 2016 में 20 शहरों की पहली सूची में स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के लिए चुना था। बाद के चरणों में अमृतसर और जालंधर को भी शामिल कर लिया गया। पंजाब के तीनों शहरों में मिशन स्मार्ट सिटी की प्रगति को लेकर कैग के द्वारा समीक्षा की गई। कैग ने अप्रैल 2015 से मार्च 2020 की अवधि के लिए पंजाब में शहरी स्थानीय निकायों का ऑडिट किया और हाल ही में समाप्त हुए बजट सत्र के दौरान इसकी रिपोर्ट विधानसभा में पेश की। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि अक्तूबर 2020 तक, 3071.38 करोड़ रुपये की 124 परियोजनाओं को पूरा किया जाना था, लेकिन कुल परियोजनाओं में सिर्फ 15 (12.10 प्रतिशत) 40.69 करोड़ रुपये खर्च करके पूरी की गईं। शेष परियोजनाओं में काम किए जाने की बात कही गई है।
अमृतसर की रिपोर्ट सबसे खराब
रिपोर्ट में अमृतसर जिले की सबसे खराब स्थिति है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमृतसर में 32 परियोजनाओं में से 18 अभी शुरू होनी बाकी हैं, जबकि नौ पर काम चल रहा है। इसी तरह, जालंधर में 49 परियोजनाओं में से 34 अभी शुरू होनी बाकी हैं, जबकि 12 प्रगति पर हैं और लुधियाना में 43 में से 24 अभी शुरू होनी बाकी हैं और 12 प्रगति पर हैं।
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पंजाब सरकार ने शुरू की समीक्षा
स्मार्ट सिटी मिशन की इस हालत के खुलासे के बाद पंजाब सरकार ने भी योजनाओं की समीक्षा का फैसला किया है। सरकार के मंत्री डॉ. इंदरबीर सिंह निज्झर ने हाल ही में इस मामले में कहा था कि सरकार ने निकायों की समीक्षा शुरू कर दी है। जल्द ही इसके अच्छे परिणाम सामने आएंगे।
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केंद्र सरकार ने जून 2015 में स्मार्ट सिटी मिशन शुरू किया था, जिसका उद्देश्य पांच साल में 100 शहरों को कवर करना था। इसका उद्देश्य उन शहरों को बढ़ावा देना था जो मुख्य बुनियादी ढांचा प्रदान करते हैं और अपने नागरिकों को जीवन की एक अच्छी गुणवत्ता प्रदान करते हैं। मिशन को संबंधित राज्य सरकारों द्वारा प्रचारित स्पेशल पर्पस व्हीकल (एसपीवी) के माध्यम से शहर स्तर पर लागू किया जाना था। इसी मिशन के तहत सूबे के लुधियाना शहर को भारत सरकार द्वारा 2016 में 20 शहरों की पहली सूची में स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के लिए चुना था। बाद के चरणों में अमृतसर और जालंधर को भी शामिल कर लिया गया। पंजाब के तीनों शहरों में मिशन स्मार्ट सिटी की प्रगति को लेकर कैग के द्वारा समीक्षा की गई। कैग ने अप्रैल 2015 से मार्च 2020 की अवधि के लिए पंजाब में शहरी स्थानीय निकायों का ऑडिट किया और हाल ही में समाप्त हुए बजट सत्र के दौरान इसकी रिपोर्ट विधानसभा में पेश की। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि अक्तूबर 2020 तक, 3071.38 करोड़ रुपये की 124 परियोजनाओं को पूरा किया जाना था, लेकिन कुल परियोजनाओं में सिर्फ 15 (12.10 प्रतिशत) 40.69 करोड़ रुपये खर्च करके पूरी की गईं। शेष परियोजनाओं में काम किए जाने की बात कही गई है।
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अमृतसर की रिपोर्ट सबसे खराब
रिपोर्ट में अमृतसर जिले की सबसे खराब स्थिति है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमृतसर में 32 परियोजनाओं में से 18 अभी शुरू होनी बाकी हैं, जबकि नौ पर काम चल रहा है। इसी तरह, जालंधर में 49 परियोजनाओं में से 34 अभी शुरू होनी बाकी हैं, जबकि 12 प्रगति पर हैं और लुधियाना में 43 में से 24 अभी शुरू होनी बाकी हैं और 12 प्रगति पर हैं।
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पंजाब सरकार ने शुरू की समीक्षा
स्मार्ट सिटी मिशन की इस हालत के खुलासे के बाद पंजाब सरकार ने भी योजनाओं की समीक्षा का फैसला किया है। सरकार के मंत्री डॉ. इंदरबीर सिंह निज्झर ने हाल ही में इस मामले में कहा था कि सरकार ने निकायों की समीक्षा शुरू कर दी है। जल्द ही इसके अच्छे परिणाम सामने आएंगे।