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Panchkula News: वीडियो काॅल पर कोई गिरफ्तारी नहीं, साइबर ठगों से रहें सावधान

Tue, 08 Apr 2025 01:43 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 08 Apr 2025 01:43 AM IST
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No arrests on video calls, beware of cyber thugs
डीसीपी बोलीं- डिजिटल अरेस्ट एक जाल है, कानून में इसका कोई अस्तित्व नहीं
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संवाद न्यूज एजेंसी

पंचकूला। इन दिनों साइबर ठग नए और खतरनाक स्कैम से नागरिकों को निशाना बना रहे हैं। इस साइबर अपराध में ठग खुद को पुलिस, सीबीआई, नारकोटिक्स, आरबीआई या अन्य अधिकारी बताकर आत्मविश्वास से बात करते हैं और वीडियो काॅल करके लोगों को डराते-धमकाते हैं। वीडियो काॅल पर सामने बैठे व्यक्ति की वर्दी, बैकग्राउंड और बातचीत का तरीका इतना वास्तविक लगता है कि लोग झांसे में आ जाते हैं। इस प्रक्रिया में उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है और उनके या उनके परिजनों पर गंभीर अपराध में फंसाने की धमकी देकर मोटी रकम की मांग की जाती है। डीसीपी हिमाद्री कौशिक ने कहा कि वीडियो काॅल पर पुलिस गिरफ्तारी नहीं करती है। इस तरह से साइबर ठगों से सावधान रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि डिजिटल अरेस्ट एक जाल है, कानू में इसका कोई अस्तित्व नहीं है।


डीसीपी हिमाद्री कौशिक ने इस स्कैम के प्रति जनता को आगाह करते हुए कहा कि यह सुनियोजित साइबर अपराध है, जिसमें फर्जी अधिकारी लोगों से बड़ी रकम ठग लेते हैं। ठग व्हाट्सएप, स्काइप जैसे प्लेटफार्म से संपर्क करते हैं, जो किसी भी आधिकारिक सरकारी संवाद का माध्यम नहीं होता। इस स्कैम में पीड़ित को यह यकीन दिलाया जाता है कि वह किसी आपराधिक जांच के दायरे में है और यदि वह सहयोग नहीं करता तो उसकी गिरफ्तारी हो सकती है। डर के कारण अधिकांश लोग इस जाल में फंस जाते हैं और भारी भरकम रकम ठगों को ट्रांसफर कर देते हैं।
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पुलिस नहीं करती विडियो काल

डीसीपी हिमाद्री कौशिक ने बताया कि पुलिस अधिकारी कभी भी वीडियो काल के माध्यम से अपनी पहचान नहीं बताते और न ही किसी एप को डाउनलोड करने या पैसे भेजने की मांग करते हैं। वे ना तो आनलाइन गिरफ्तारी वारंट या एफआईआर साझा करते हैं और ना ही वाइस या वीडियो काल पर बयान लेते हैं। यदि कोई व्यक्ति काल पर आपको यह सब कहता है तो यह निश्चित रूप से एक ठगी है।
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फिशिंग के माध्यम से भी होती है ठगी



डीसीपी कौशिक ने बताया कि फिशिंग के माध्यम से भी लोग ठगी का शिकार हो रहे हैं, जिसमें ईमेल से दुर्भावनापूर्ण लिंक भेजकर कंप्यूटर या मोबाइल डेटा चुराया जाता है। अतः किसी भी अविश्वसनीय लिंक या संदेश पर क्लिक न करें। यदि कोई व्यक्ति इस प्रकार की साइबर ठगी का शिकार होता है तो तत्काल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करे या वेबसाइट www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।




खुद को और परिवार को डिजिटल अरेस्ट से बचाओ



डीसीपी हिमाद्री कौशिक ने नागरिकों से अपील की है कि वे पुलिस द्वारा समय-समय पर आयोजित किए जाने वाले जागरूकता कार्यक्रमों में भाग लें और इस प्रकार के साइबर अपराधों से खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखें। डिजिटल अरेस्ट फर्जीवाड़ा है इससे सावधान रहें और जागरूक रहें।
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