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Panchkula News: प्रदेश में खनन माफिया पर लगाम कसने में जुटा एनजीटी
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चंडीगढ़। हरियाणा में खनन माफिया पर नकेल कसने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) कड़ी कार्रवाई कर रहा है। भिवानी की डाडम खान के आसपास के क्षेत्र में अवैध खनन करने वाले ठेकेदारों पर 65 करोड़ का जुर्माना लगाने के बाद एनजीटी ने अब यमुनानगर जिले के तीन खनन ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की है।
इन ठेकेदारों पर आरोप है कि इन्हें अवैध खनन कर नदी के प्रवाह को मोड़ दिया। ग्रीन बेल्ट विकसित नहीं की। वाहनों पर सीसीटीवी कैमरे और जीपीएस सिस्टम स्थापित करने के लिए कदम नहीं उठाए। एनजीटी ने इन लापरवाही को देखते हुए तीन ठेकेदारों पर 18.7 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है।
एनजीटी की हरियाणा निगरानी समिति के चेयरमैन सेवानिवृत्त जस्टिस प्रीतम पाल सिंह ने बताया कि एक कंपनी पर 12 करोड़ रुपये और दूसरी पर 4.2 करोड़ रुपये का जुर्माना लगा। तीसरी कंपनी को 2.5 करोड़ रुपये भरने होंगे। तीनों ठेकेदारों को 2015 में खनन स्थल आवंटित किए गए थे। एक निजी कंपनी को नौ साल के लिए बोल्डर, बजरी और रेत निकालने को यमुनानगर के रादौर ब्लॉक के पोबारी गांव में 23.05 हेक्टेयर क्षेत्र आवंटित किया गया है।
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उन्होंने बताया कि इस ठेकेदार ने अधिक रेत निकालने के लिए यमुना के प्रवाह को ही मोड़ दिया। इसके अलावा अन्य उल्लंघन भी किए। सड़कों की मरम्मत ही नहीं की। दिल्ली की एक कंपनी ने छछरौली तहसील के कोहलीवाला गांव में 9 मीटर की गहराई से अधिक खनन किया। पट्टा अवधि खत्म होने के बाद भी खनन जारी रखा। धूल का प्रभाव कम करने के लिए उपचारित जल के बजाय भूजल का उपयोग किया। खनन स्थल पर एक अवैध स्क्रीनिंग प्लांट भी निगरानी समिति को मिला है। तीनों कंपिनयों को लगाया गया जुर्माना खान एवं भूगर्भ विभाग वसूल कर पर्यावरण विभाग एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास जमा कराएगा। इसमें से दस प्रतिशत राशि पर्यावरण संरक्षण पर खर्च होगी।
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इन ठेकेदारों पर आरोप है कि इन्हें अवैध खनन कर नदी के प्रवाह को मोड़ दिया। ग्रीन बेल्ट विकसित नहीं की। वाहनों पर सीसीटीवी कैमरे और जीपीएस सिस्टम स्थापित करने के लिए कदम नहीं उठाए। एनजीटी ने इन लापरवाही को देखते हुए तीन ठेकेदारों पर 18.7 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है।
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एनजीटी की हरियाणा निगरानी समिति के चेयरमैन सेवानिवृत्त जस्टिस प्रीतम पाल सिंह ने बताया कि एक कंपनी पर 12 करोड़ रुपये और दूसरी पर 4.2 करोड़ रुपये का जुर्माना लगा। तीसरी कंपनी को 2.5 करोड़ रुपये भरने होंगे। तीनों ठेकेदारों को 2015 में खनन स्थल आवंटित किए गए थे। एक निजी कंपनी को नौ साल के लिए बोल्डर, बजरी और रेत निकालने को यमुनानगर के रादौर ब्लॉक के पोबारी गांव में 23.05 हेक्टेयर क्षेत्र आवंटित किया गया है।
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उन्होंने बताया कि इस ठेकेदार ने अधिक रेत निकालने के लिए यमुना के प्रवाह को ही मोड़ दिया। इसके अलावा अन्य उल्लंघन भी किए। सड़कों की मरम्मत ही नहीं की। दिल्ली की एक कंपनी ने छछरौली तहसील के कोहलीवाला गांव में 9 मीटर की गहराई से अधिक खनन किया। पट्टा अवधि खत्म होने के बाद भी खनन जारी रखा। धूल का प्रभाव कम करने के लिए उपचारित जल के बजाय भूजल का उपयोग किया। खनन स्थल पर एक अवैध स्क्रीनिंग प्लांट भी निगरानी समिति को मिला है। तीनों कंपिनयों को लगाया गया जुर्माना खान एवं भूगर्भ विभाग वसूल कर पर्यावरण विभाग एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास जमा कराएगा। इसमें से दस प्रतिशत राशि पर्यावरण संरक्षण पर खर्च होगी।