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कोरोना वायरसः अफवाहों से बचें, अखबार से नहीं फैलती बीमारी, सैनेटाइज कर बांट रहे हैं हॉकर
Sat, 21 Mar 2020 12:42 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Sat, 21 Mar 2020 12:42 PM IST
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पूरी दुनिया में डर का पर्याय बने महामारी कोरोना वायरस को लेकर सोशल मीडिया में तरह-तरह की अफवाहें चल रही हैं। सरकार और डॉक्टरों की सलाह के बावजूद सोशल मीडिया इससे बचने के कई भ्रामक उपाय सुझा रहा है। डॉक्टरों और विशेषज्ञों का साफ कहना है कि अखबार पढ़ने, डोरबेल बजाने या दूध का पैकेट इस्तेमाल करने से यह वायरस नहीं फैलता है।
डॉक्टरों और विशेषज्ञों का कहना है कि आप बिना डरे अखबार पढ़ सकते हैं, बाहर से आए दूध के पैकेट का इस्तेमाल कर सकते हैं और डोरबेल भी बजा सकते हैं। अखबार को सुरक्षित बनाने में हॉकर भी अपनी जिम्मेदारियों का पूरी तरह से निर्वाह कर रहे हैं। अखबार बांटने से पहले वे अपने आपको सेनिटाइज करते हैं। मुंह में मास्क लगाने के बाद ही अखबार बांटने का काम करते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इसके बावजूद किसी रीडर को डर है तो अखबार के इस्तेमाल करने के बाद अच्छे से हाथ धोएं या सैनिटाइजर से साफ करें। ध्यान रखें कि यदि किसी व्यक्ति में संक्रमण की आशंका है तो उसके द्वारा इस्तेमाल की गई चीजों से दूर रहें। भीड़भाड़ वाली जगह पर जाने से बचें और संदिग्ध व्यक्ति से दूरी रखें। यह वायरस संक्रमित इंसान से फैलता है, न कि अखबार जैसी चीजों से।
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विशेषज्ञों के मुताबिक, अभी तक ऐसी कोई स्टडी नहीं है जिससे यह साबित हो कि अखबार या दूध के पैकेट से वायरस फैलता है। न ही इस तरह की कोई चिकित्सीय जानकारी चीन जैसे अति प्रभावित देशों से मिली है। भारत में अभी ऐसी स्थिति नहीं है कि यहां हर चीज में वायरस का खतरा हो। इसलिए लोगों को बिल्कुल भी घबराने की जरूरत नहीं है।
यह वायरस संक्रमित इंसान के छींकने, खांसने या हाथ मिलाने से फैलता है, इसलिए संक्रमित इंसान से दूरी बनाए रखने की जरूरत है। न कि अखबार या दूध के पैकेट से। लोगों को बिल्कुल भी घबराने की जरूरत नहीं। बस उन्हें सतर्कता बरतनी है।
- डॉ. विजय कुमार, एम्स दिल्ली
अभी तक ऐसी कोई भी स्टडी सामने नहीं आई है, जो यह बताए कि अखबार के माध्यम से कोरोना वायरस फैलता है। यह सब भ्रामक बातें हैं। इसके बावजूद किसी को कोई आशंका है तो अखबार पढ़ने के बाद वह हाथ धो लें।
- रविंद्रा खैवाल, एडिशनल प्रोफेसर, स्कूल आफ पब्लिक हेल्थ पीजीआई
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डॉक्टरों और विशेषज्ञों का कहना है कि आप बिना डरे अखबार पढ़ सकते हैं, बाहर से आए दूध के पैकेट का इस्तेमाल कर सकते हैं और डोरबेल भी बजा सकते हैं। अखबार को सुरक्षित बनाने में हॉकर भी अपनी जिम्मेदारियों का पूरी तरह से निर्वाह कर रहे हैं। अखबार बांटने से पहले वे अपने आपको सेनिटाइज करते हैं। मुंह में मास्क लगाने के बाद ही अखबार बांटने का काम करते हैं।
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विशेषज्ञों का कहना है कि इसके बावजूद किसी रीडर को डर है तो अखबार के इस्तेमाल करने के बाद अच्छे से हाथ धोएं या सैनिटाइजर से साफ करें। ध्यान रखें कि यदि किसी व्यक्ति में संक्रमण की आशंका है तो उसके द्वारा इस्तेमाल की गई चीजों से दूर रहें। भीड़भाड़ वाली जगह पर जाने से बचें और संदिग्ध व्यक्ति से दूरी रखें। यह वायरस संक्रमित इंसान से फैलता है, न कि अखबार जैसी चीजों से।
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विशेषज्ञों के मुताबिक, अभी तक ऐसी कोई स्टडी नहीं है जिससे यह साबित हो कि अखबार या दूध के पैकेट से वायरस फैलता है। न ही इस तरह की कोई चिकित्सीय जानकारी चीन जैसे अति प्रभावित देशों से मिली है। भारत में अभी ऐसी स्थिति नहीं है कि यहां हर चीज में वायरस का खतरा हो। इसलिए लोगों को बिल्कुल भी घबराने की जरूरत नहीं है।
यह वायरस संक्रमित इंसान के छींकने, खांसने या हाथ मिलाने से फैलता है, इसलिए संक्रमित इंसान से दूरी बनाए रखने की जरूरत है। न कि अखबार या दूध के पैकेट से। लोगों को बिल्कुल भी घबराने की जरूरत नहीं। बस उन्हें सतर्कता बरतनी है।
- डॉ. विजय कुमार, एम्स दिल्ली
अभी तक ऐसी कोई भी स्टडी सामने नहीं आई है, जो यह बताए कि अखबार के माध्यम से कोरोना वायरस फैलता है। यह सब भ्रामक बातें हैं। इसके बावजूद किसी को कोई आशंका है तो अखबार पढ़ने के बाद वह हाथ धो लें।
- रविंद्रा खैवाल, एडिशनल प्रोफेसर, स्कूल आफ पब्लिक हेल्थ पीजीआई
कहां कितने दिन तक रहता है वायरस
जगह------------समय
कार्डबोर्ड------24 घंटे
रबड़----------08 घंटे
पॉलिथीन-----16 घंटे
शीशा---------04 दिन
तांबा----------04 घंटे
हवा-----------03 घंटे
प्लास्टिक----03 दिन
स्टील--------03 दिन
कार्डबोर्ड------24 घंटे
रबड़----------08 घंटे
पॉलिथीन-----16 घंटे
शीशा---------04 दिन
तांबा----------04 घंटे
हवा-----------03 घंटे
प्लास्टिक----03 दिन
स्टील--------03 दिन