फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Panchkula News ›   My son kept fighting terrorists as long as he was conscious: Manju Kanwar

जब तक होश में रहा आतंकियों से लड़ता रहा मेरा बेटा : मंजू कंवर

Sun, 07 Jan 2024 01:23 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 07 Jan 2024 01:23 AM IST
विज्ञापन
My son kept fighting terrorists as long as he was conscious: Manju Kanwar
कहा- देश के वीर सपूतों के बलिदान के कारण ही हटा अनुच्छेद 370
विज्ञापन


माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। मां! जम्मू-कश्मीर के हालात एक दिन जरूर सुधरेंगे। सारी पाबंदियां हटेंगी। इसका लाभ सिर्फ जम्मू-कश्मीर के लोगों को ही नहीं बल्कि पूरे देश को मिलेगा। देश के लिए अपनी जान न्योछावर करने वाले अशोक चक्र विजेता शहीद मेजर संदीप सांकला अपनी मां से यह बात कहा करते थे। उनकी मां मंजू कंवर शनिवार को पंचकूला में थीं। भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और मुख्यमंत्री मनोहर लाल के रोड शो के बाद वह शहीद को श्रद्धांजलि देने आने वाले नेताओं से मिलने सेक्टर-2 के शहीद मेजर संदीप सांकला के स्मारक स्थल पहुंचीं थीं।
मंजू कंवर ने बताया कि मेजर संदीप सांकला ने बताया था कि कश्मीर के हालात अभी ठीक नहीं हैं। चारों तरफ गोलाबारी हो रही है। अभी एक महीने तक बात नहीं कर पाऊंगा क्योंकि कुपवाड़ा के जफरखान में एक ऑपरेशन में हूं। उसके बाद 8 अगस्त 1991 को जफरखान गांव में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए उनके शहीद होने की सूचना मिली। मंजू कवर ने बताया कि सेना के अधिकारी कहते थे कि अनुच्छेद 370 के प्रावधानों के हटने में मेरे बेटे के बलिदान का एक अहम योगदान है। मेरे बेटे के साथ कई वीर सपूतों के त्याग का ही प्रतिफल है कि कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया गया। आज जम्मू-कश्मीर के लोगों को ही नहीं बल्कि इसका लाभ हाशिए पर खड़े उन सभी लोगों को मिल रहा है, जिन्होंने अनुच्छेद 370 की वजह से काफी कुछ झेला।
विज्ञापन

मंजू कंवर ने बताया कि मेरे बेटे ने देश के लिए शहीद होकर भारत मां के साथ अपनी मां का भी गौरव बढ़ाया। एक मां के लिए इससे अधिक फक्र की बात और क्या हो सकती है कि चारों तरफ गोलियां चल रहीं थीं और मेरा बेटा अपने साथी जवान की जान जोखिम में पड़ते देख फायरिंग के बीच रेंगकर आगे बढ़ा और घायल जवान को सुरक्षित स्थान पर लेकर आया। इस बीच आतंकियों ने उस पर दो ग्रेनेड फेंके। वह आतंकियों की गोलियों से जख्मी हो गया। जब तक होश में रहा देश के लिए आतंकियों से लड़ता रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन


पिता की तरह बेटे ने देश सेवा की
कैप्टन संदीप सांखला हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर के रहने वाले थे। उनके पिता जेएस कंवर भी सेना थे। पिता का नाम लेफ्टिनेंट कर्नल जेएस कंवर और मां का नाम मंजू कंवर है। कैप्टन संदीप सांखला बचपन से ही पिता की तरह आर्मी में जाना चाहते थे। 14 जून 1986 को उनका सपना पूरा हुआ था। वह भारतीय सेना की 18 डोगरा रेजीमेंट में कमीशंड हुए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed