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Panchkula News: मदर एंड चाइल्ड अस्पताल को मिली फायर एनओसी, मानवाधिकार आयोग में 12 अगस्त को सुनवाई

Fri, 12 Jun 2026 01:57 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 12 Jun 2026 01:57 AM IST
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Mother and Child Hospital receives Fire NOC; hearing at Human Rights Commission on August 12.
दो साल पहले बनकर तैयार हुई बिल्डिंग, फायर सेफ्टी की अड़चन दूर; निर्माण कार्य को लेकर शिकायतें बरकरार
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संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। पंचकूला के सेक्टर-6 स्थित सिविल अस्पताल परिसर में बने मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल को फायर डिपार्टमेंट से एनओसी मिल गई है। फायर सेफ्टी संबंधी लंबे समय से चली आ रही अड़चन निरीक्षण के बाद दूर हो गई है। हालांकि अस्पताल से जुड़ा मामला हरियाणा मानवाधिकार आयोग के समक्ष लंबित है, जिस पर 12 अगस्त को सुनवाई होगी।
गौरतलब है कि मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल की बिल्डिंग करीब दो वर्ष पहले बनकर तैयार हो गई थी। इसके बाद महिला एवं बाल रोग विभाग की सेवाओं और ऑपरेशन थिएटर को नई बिल्डिंग में शिफ्ट किया जाना था। फिलहाल यहां केवल महिला एवं बाल रोग ओपीडी का संचालन हो रहा है। डॉक्टरों की कमी के कारण ऑपरेशन थिएटर शुरू नहीं हो सके हैं। इसी वजह से दोपहर एक बजे के बाद मरीजों के लैब टेस्ट भी नहीं हो पा रहे हैं।
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शिकायतकर्ता ने आयोग को लिखा पत्र
हॉस्पिटल की फायर सेफ्टी क्लीयरेंस और निरीक्षण प्रक्रिया को लेकर शिकायतकर्ता एसके नैयर ने हरियाणा मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश जारी करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, प्रोविंशियल डिवीजन, पीडब्ल्यूडी (बी एंड आर), पंचकूला की ओर से उन्हें न तो कोई पत्र मिला है और न ही संयुक्त निरीक्षण संबंधी जानकारी साझा की गई है। नैयर के अनुसार, उनकी जानकारी में चीफ फायर ऑफिसर, पंचकूला ने भी अब तक आयोग को कोई रिपोर्ट नहीं भेजी है।
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निर्माण कार्य अभी भी अधूरा
एसके नैयर का कहना है कि अस्पताल में फायर उपकरण अभी तक पूरी तरह स्थापित नहीं किए गए हैं। इन उपकरणों की स्थापना का कार्य हरियाणा जन स्वास्थ्य विभाग और पीडब्ल्यूडी द्वारा किया जाना था। उन्होंने दावा किया कि अस्पताल परिसर में सिविल कार्य भी अधूरा है और अब तक लगभग 80 प्रतिशत कार्य ही पूरा हुआ है।
साल 2025 से इस मामले में आयोग के समक्ष पांच से अधिक बार सुनवाई हो चुकी है। शिकायतकर्ता ने अस्पताल में कथित अनियमितताओं को लेकर रिपोर्ट भी प्रस्तुत की थी। उनका कहना है कि निर्माण कार्य स्वास्थ्य विभाग के अधीन नहीं होने के कारण अस्पताल प्रबंधन भी असहाय स्थिति में है। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्माण में लगातार हो रही देरी के लिए पीडब्ल्यूडी, हरियाणा जिम्मेदार है। उनका कहना है कि पंचकूला के लोगों के लिए यह अस्पताल जीवन रेखा है और देरी से उनके बुनियादी अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।


क्या कहते हैं अधिकारी
फायर ऑफिसर रविंदर पराशर ने कहा कि मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल को फायर क्लीयरेंस की एनओसी जारी कर दी गई है। फायर सेफ्टी से संबंधित सभी आपत्तियों का समाधान कर लिया गया था। वहीं, पीएमओ डॉ. आरएस चौहान ने बताया कि अस्पताल में मेंटेनेंस का कार्य जारी है, जबकि मरीजों की सुविधाओं से जुड़े सभी आवश्यक कार्य पूरे कर लिए गए हैं।
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