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किसानों को मालामाल करेगी मूंग, एक लाख एकड़ में बोई फसल
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चंडीगढ़। पंजाब के किसानों को इस बार मूंग की फसल मालामाल करेगी। मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा इस फसल पर एमएसपी की घोषणा के बाद राज्य में मूंग की फसल की बिजाई का क्षेत्रफल एक लाख एकड़ हो गया है। 2021 में यह क्षेत्रफल मात्र 50 हजार एकड़ था।
मूंग की दाल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य 7,275 रुपये प्रति क्विंटल रखा गया है। यह पहल गेहूं, धान की फसलों के दरमियान एक अन्य फसल बीजकर किसान की आमदनी बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी। राज्य के कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार मानसा जिला 25,000 एकड़ (10,000 हेक्टेयर) में मूंग की दाल की बिजाई कर राज्य भर में अग्रणी रहा, जो राज्य में इस फसल के अधीन बीजे गए कुल क्षेत्रफल का 25 प्रतिशत बनता है। इसके बाद मोगा में 12,750 एकड़ (5100 हेक्टेयर) और लुधियाना में 10,750 एकड़ (4300 हेक्टेयर) क्षेत्रफल इस फसल की कृषि के अधीन है। बठिंडा और मुक्तसर जिलों में मूंग की दाल के अधीन क्षेत्रफल क्रमवार 9500 एकड़ (3800 हेक्टेयर) और 8750 एकड़ (3500 हेक्टेयर) है। मुख्यमंत्री पहले ही मूंग की दाल की फसल का एक-एक दाना खरीदने के लिए अपनी सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दोहरा चुके हैं।
इस शर्त का करना होगा पालन
सरकार ने मूंग की फसल बोने वाले किसानों के लिए एक शर्त रखी है। इसके तहत किसानों को मूंग की दाल काटने के बाद उसी खेत में धान की 126 किस्म या बासमती की बिजाई करनी पड़ेगी, क्योंकि यह दोनों फसलें पकने के लिए बहुत कम समय लेती हैं। साथ ही धान की अन्य किस्मों के मुकाबले इनको बहुत कम पानी की जरूरत होती है।
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जमीन को उपजाऊ बनाती है दाल
कृषि विभाग के डायरेक्टर गुरविंदर सिंह के मुताबिक दाल की फसल की जड़ों में नाइट्रोजन फिक्सिंग नोड्यूल होते हैं जो जमीन में नाइट्रोजन फिक्स करके जमीन की उपजाऊ शक्ति बढ़ाते हैं। यदि मूंग की दाल की फसल की उपज कम भी जाए तो भी नाइट्रोजन फिक्सिंग का लाभ अगली फसल को मिलता है। अगली फसल के लिए यूरिया की उपभोग सिफारिश की खाद की अपेक्षा 25-30 किलोग्राम प्रति एकड़ तक कम हो जाती है।
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मूंग की दाल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य 7,275 रुपये प्रति क्विंटल रखा गया है। यह पहल गेहूं, धान की फसलों के दरमियान एक अन्य फसल बीजकर किसान की आमदनी बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी। राज्य के कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार मानसा जिला 25,000 एकड़ (10,000 हेक्टेयर) में मूंग की दाल की बिजाई कर राज्य भर में अग्रणी रहा, जो राज्य में इस फसल के अधीन बीजे गए कुल क्षेत्रफल का 25 प्रतिशत बनता है। इसके बाद मोगा में 12,750 एकड़ (5100 हेक्टेयर) और लुधियाना में 10,750 एकड़ (4300 हेक्टेयर) क्षेत्रफल इस फसल की कृषि के अधीन है। बठिंडा और मुक्तसर जिलों में मूंग की दाल के अधीन क्षेत्रफल क्रमवार 9500 एकड़ (3800 हेक्टेयर) और 8750 एकड़ (3500 हेक्टेयर) है। मुख्यमंत्री पहले ही मूंग की दाल की फसल का एक-एक दाना खरीदने के लिए अपनी सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दोहरा चुके हैं।
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इस शर्त का करना होगा पालन
सरकार ने मूंग की फसल बोने वाले किसानों के लिए एक शर्त रखी है। इसके तहत किसानों को मूंग की दाल काटने के बाद उसी खेत में धान की 126 किस्म या बासमती की बिजाई करनी पड़ेगी, क्योंकि यह दोनों फसलें पकने के लिए बहुत कम समय लेती हैं। साथ ही धान की अन्य किस्मों के मुकाबले इनको बहुत कम पानी की जरूरत होती है।
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जमीन को उपजाऊ बनाती है दाल
कृषि विभाग के डायरेक्टर गुरविंदर सिंह के मुताबिक दाल की फसल की जड़ों में नाइट्रोजन फिक्सिंग नोड्यूल होते हैं जो जमीन में नाइट्रोजन फिक्स करके जमीन की उपजाऊ शक्ति बढ़ाते हैं। यदि मूंग की दाल की फसल की उपज कम भी जाए तो भी नाइट्रोजन फिक्सिंग का लाभ अगली फसल को मिलता है। अगली फसल के लिए यूरिया की उपभोग सिफारिश की खाद की अपेक्षा 25-30 किलोग्राम प्रति एकड़ तक कम हो जाती है।