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पिता को जन्मदिन पर देने वाला था मोबाइल, मगर....
अमर उजाला पंचकूला
Updated Wed, 16 Oct 2013 03:02 AM IST
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उसने मुझसे कहा था कि पापा आपके जन्मदिन पर एक मोबाइल गिफ्ट करूंगा, लेकिन अब तो प्रतीक खुद ही हमेशा के लिए छोड़कर चला गया।
इतना कहते ही प्रतीक के पिता अनिल शर्मा फफक कर रो पड़े। प्रतीक की मां को तो होश ही नहीं है। बेटे की जुदाई में वह तो पूरी तरह से टूट गई हैं।
होश आता है, तो रोने लगती हैं और रोते-रोते फिर बेसुध हो जाती हैं।
हादसे के बाद प्रतीक के सेक्टर-19 स्थित घर का माहौल बेहद गमगीन हो गया है।
आस-पड़ोस के लोग सांत्वना देने के लिए उनके घर पर देर रात तक जमे रहे, लेकिन जिनका जवान बेटा दुनिया से चला गया हो, उनके दर्द को बांट पाना बेहद मुश्किल होता है।
परिजनों के मुताबिक प्रतीक अपने दोस्तों के साथ गया था, लेकिन उसने घर पर नहीं बताया था कि वह कसोली जा रहा है।
प्रतीक के पिता ने भरे हुए गले से बताया कि यदि उन्हें पता होता तो उसे कभी भी दोस्तों के साथ नहीं जाने न देते।
उन्हें तो यह भी नहीं पता कि प्रतीक ने ऐसा कौन-सा दोस्त बना लिया था, जो उसे गाड़ी से कसोली तक ले गया? प्रतीक की एक बड़ी बहन है, जो यह सदमा बर्दाशत नहीं कर पा रही।
उसकी भी हालत खराब होती जा रही है। उसकी समझ में कुछ नहीं आ रहा। वह कभी अपने पिता को संभालती है, तो कभी मां को। इस दौरान वह कभी-कभी खुद ही गुमसुम हो जाती है।
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आस-पड़ोस के लोगों ने बताया कि प्रतीक पहले कभी भी इस तरह बाहर नहीं गया था, लेकिन इस बार न जाने उसके मन में क्या आया और बगैर बताए चला गया।
पड़ोस के लोग परिवार को इस दुख की घड़ी में दिलासा दे रहे हैं, लेकिन परिवार मानो पहाड़ सा टूट पड़ा है।
इतना कहते ही प्रतीक के पिता अनिल शर्मा फफक कर रो पड़े। प्रतीक की मां को तो होश ही नहीं है। बेटे की जुदाई में वह तो पूरी तरह से टूट गई हैं।
होश आता है, तो रोने लगती हैं और रोते-रोते फिर बेसुध हो जाती हैं।
हादसे के बाद प्रतीक के सेक्टर-19 स्थित घर का माहौल बेहद गमगीन हो गया है।
आस-पड़ोस के लोग सांत्वना देने के लिए उनके घर पर देर रात तक जमे रहे, लेकिन जिनका जवान बेटा दुनिया से चला गया हो, उनके दर्द को बांट पाना बेहद मुश्किल होता है।
परिजनों के मुताबिक प्रतीक अपने दोस्तों के साथ गया था, लेकिन उसने घर पर नहीं बताया था कि वह कसोली जा रहा है।
प्रतीक के पिता ने भरे हुए गले से बताया कि यदि उन्हें पता होता तो उसे कभी भी दोस्तों के साथ नहीं जाने न देते।
उन्हें तो यह भी नहीं पता कि प्रतीक ने ऐसा कौन-सा दोस्त बना लिया था, जो उसे गाड़ी से कसोली तक ले गया? प्रतीक की एक बड़ी बहन है, जो यह सदमा बर्दाशत नहीं कर पा रही।
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उसकी भी हालत खराब होती जा रही है। उसकी समझ में कुछ नहीं आ रहा। वह कभी अपने पिता को संभालती है, तो कभी मां को। इस दौरान वह कभी-कभी खुद ही गुमसुम हो जाती है।
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आस-पड़ोस के लोगों ने बताया कि प्रतीक पहले कभी भी इस तरह बाहर नहीं गया था, लेकिन इस बार न जाने उसके मन में क्या आया और बगैर बताए चला गया।
पड़ोस के लोग परिवार को इस दुख की घड़ी में दिलासा दे रहे हैं, लेकिन परिवार मानो पहाड़ सा टूट पड़ा है।