फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Panchkula News ›   Mistake in the expenditure of Military Literature Festival: IAO

मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल के खर्च में गड़बड़ी : आईएओ

Thu, 17 Jun 2021 11:04 PM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Thu, 17 Jun 2021 11:04 PM IST
विज्ञापन
Mistake in the expenditure of Military Literature Festival: IAO
चंडीगढ़। पंजाब सरकार द्वारा आयोजित किए जाने वाले प्रतिष्ठित मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल में लाखों रुपये की गड़बड़ी सामने आई है। पंजाब सरकार के वित्त विभाग के इंटरनल ऑडिट संगठन (आईएओ) ने 2017 में कराए गए फेस्टिवल के हिसाब-किताब में गड़बड़ी उजागर करते हुए सांस्कृतिक मामले विभाग से जवाब-तलब कर लिया है।
विज्ञापन

गत 27 मई को आईएओ द्वारा संबंधित विभाग को जारी पत्र में ऑडिट रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि उक्त फेस्टिवल के दौरान 50000 रुपये की राशि सीधे तौर पर एक मुलाजिम राकेश कुमार पटियाल के नाम पेटीएम के जरिए ट्रांसफर कर दी गई और उसका हिसाब भी नहीं दिया गया। आईएओ ने जब इस पर सवाल उठाया तो मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल एसोसिएशन (एमएलएफए) ने उबेर कैब कंपनी की एक स्टेटमेंट पेश करते हुए इस पैसे को आने-जाने पर खर्च किया, दर्शा दिया।
विज्ञापन

फेस्टिवल में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित हस्तियों के विमान यात्रा के लिए इकोनॉमी क्लास के बजाय महंगे बिजनेस क्लास के टिकट खरीदे गए। ऐसे गण्यमान्यों की मेहमाननवाजी के लिए पेय पदार्थ खरीदने पर एक लाख रुपये खर्च कर दिए गए। इस मामले पर आईएओ द्वारा सवाल उठाए जाने पर एमएलएफए ने 29 सितंबर, 2017 को मुख्यमंत्री के सीनियर सलाहकार और एमएलएफए के चेयरमैन का हवाला देते हुए बताया गया कि विदेशी गण्यमान्य व्यक्तियों के लिए सेवा और सम्मान के मानदंडों को बनाए रखने के लिए पेय परोसा जा सकता है। लेकिन आईएओ ने एमएलएफए के इस जवाब को संतोषजनक नहीं माना और इस मद में खर्च की गई राशि को नियमित करने के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

इसके अलावा, एमएलएफए ने फेस्टिवल संबंधी स्मारिका प्रकाशित कराने का ठेका निजी कंपनी को देते हुए 9 लाख रुपये खर्च कर दिए। आईएओ का कहना है कि एक निजी कंपनी द पंजाब डिजिटल लाइब्रेरी से 50 पन्नों की स्मारिका प्रति कॉपी 3000 रुपये में छपवाई गई। इस संबंध में एमएलएफए का जवाब संतोषजनक नहीं है, इसलिए इस खर्च को सचिव (सांस्कृतिक मामले) के जरिए नियमबद्ध कराया जाए। इसी तरह फेस्टिवल के विज्ञापनों पर 19.35 लाख रुपये और स्टेशनरी की प्रिंटिंग पर 4.20 लाख रुपये खर्च करते हुए इस मद में कुल 32.55 लाख रुपये खर्च दिखाया गया है। आईएओ का कहना है कि यह सारा खर्च डीएवीपी रेट या टेंडर आमंत्रित कर किया जाना चाहिए था।

एमएलएफए को प्रायोजकों से प्राप्त हुए 59.80 लाख रुपये के हिसाब-किताब पर भी उंगली उठाई गई है। आईएओ का कहना है कि एसोसिएशन ने प्रायोजन राशि में से एक नया पैसा भी राजकोष को वापस नहीं किया। इस तरह 31 अगस्त, 2018 से एसोसिएशन के खाते में 96.40 लाख रुपये अब तक रखे हैं। इसके अलावा एमएलएफए ने मोबिलाइजेशन एडवांस के रूप में 2 करोड़ रुपये हासिल किए, जिसे लौटाया जाना चाहिए था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed