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Panchkula News: तीन साल बाद जुड़ी कौशल्या डैम की पाइपलाइन, 45 एमएलडी पानी की बहाली की तैयारी

Fri, 18 Sep 2026 01:38 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 18 Sep 2026 01:38 AM IST
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Kaushalya Dam pipeline connected after three years; preparations underway to restore 45 MLD water supply.
300 मीटर लाइन का काम पूरा, पानी के सैंपल की जांच रिपोर्ट के बाद पांच दिन में बहाल हो सकती है सप्लाई
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अभी 22 घंटे चल रहे 200 ट्यूबवेल, 300 फीट नीचे पहुंचा भूजल स्तर; सप्लाई लौटने से घग्गर पार के सेक्टरों को मिलेगी राहत
माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। तीन साल से बंद पड़ी कौशल्या डैम की पानी सप्लाई अब बहाल होने की कगार पर पहुंच गई है। अमरावती पुल के पास टूटी 300 मीटर लंबी पाइपलाइन का काम पूरा हो गया है। पीएमडीए ने वीरवार को डैम के पानी का सैंपल जांच के लिए भेज दिया है। जांच रिपोर्ट सही आने पर करीब पांच दिन में 45 एमएलडी पानी की सप्लाई बहाल करने की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। सप्लाई शुरू होने से घग्गर पार के सेक्टरों में ट्यूबवेलों पर निर्भरता कम होगी और गर्मी में पेयजल संकट झेल रहे हजारों लोगों को राहत मिल सकती है। वहीं, डैम की सप्लाई बंद होने के कारण अभी 200 ट्यूबवेल करीब 22 घंटे रोज चल रहे हैं और भूजल स्तर औसतन 300 फीट तक नीचे पहुंच चुका है।

ट्यूबवेलों पर बढ़ा बोझ, बिजली और भूजल दोनों पर दबाव
कौशल्या डैम की सप्लाई बंद होने का सबसे बड़ा बोझ एचएसवीपी के ट्यूबवेलों पर पड़ा है। डैम से करीब 45 एमएलडी पानी नहीं मिलने के कारण सेक्टर-23, 24, 25, 26, 27 और 28 समेत आसपास के इलाकों की मांग पूरी करने के लिए 200 ट्यूबवेलों को करीब 22 घंटे रोज चलाना पड़ रहा है। पहले यही ट्यूबवेल करीब आठ घंटे चलते थे। यानी डैम की सप्लाई बंद होने के बाद ट्यूबवेलों के संचालन का समय कई गुना बढ़ गया है। इससे एक तरफ बिजली की खपत बढ़ी है, वहीं दूसरी तरफ भूजल पर भी लगातार दबाव बढ़ रहा है।
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जुलाई 2023 में टूटी थी पाइपलाइन, अप्रैल 2024 में होना था काम
कौशल्या डैम से घग्गर पार के सेक्टरों को पानी पहुंचाने वाली पाइपलाइन जुलाई 2023 में अमरावती पुल के पास टूट गई थी। इसके बाद मरम्मत के लिए एचएसवीपी ने करीब सात करोड़ रुपये का एस्टिमेट तैयार किया था। लेकिन फाइल इंजीनियरिंग विंग में अटकने के कारण काम आगे नहीं बढ़ सका। लोगों की लगातार मांग और पेयजल संकट को देखते हुए एस्टिमेट को मंजूरी मिली और अप्रैल 2024 में मरम्मत का काम शुरू होना था। काम शुरू होने से पहले ही एनएचएआई ने पाइपलाइन के रूट को लेकर आपत्ति जता दी। इसके बाद करीब दो महीने तक दोनों विभागों के बीच पत्राचार और बैठकों का दौर चला। पाइपलाइन के एलाइनमेंट और रूट पर सहमति बनने के बाद प्रोजेक्ट पीएमडीए को सौंप दिया गया। इसके बाद प्रक्रिया आगे बढ़ी और अब 300 मीटर लंबी पाइपलाइन तैयार हो चुकी है।
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40 साल में 20 से 300 फीट नीचे पहुंचा भूजल
डैम की सप्लाई बंद रहने का असर अब भूजल पर भी साफ दिखाई दे रहा है। अधिकारियों के अनुसार करीब 40 साल पहले क्षेत्र में भूजल स्तर लगभग 20 फीट था, जो अब औसतन 300 फीट तक नीचे पहुंच चुका है। डैम की सप्लाई बंद रहने के कारण ट्यूबवेलों से लगातार पानी खींचा जा रहा है। यदि छह महीने तक इसी तरह अतिरिक्त भूजल दोहन जारी रहता है तो जलस्तर और नीचे जाने का खतरा है।


जांच रिपोर्ट के बाद पांच दिन में राहत की उम्मीद
पाइपलाइन का काम पूरा होने के बाद अब सबसे बड़ा इंतजार पानी की जांच रिपोर्ट का है। पीएमडीए ने सैंपल जांच के लिए भेज दिया है। रिपोर्ट सही आती है तो करीब पांच दिन में डैम से पेयजल सप्लाई बहाल करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। 45 एमएलडी पानी वापस मिलने से 200 ट्यूबवेलों पर दबाव घटेगा, उनके संचालन का समय कम होगा और बिजली के साथ-साथ भूजल की भी बचत होगी। तीन साल से पाइपलाइन की बहाली का इंतजार कर रहे घग्गर पार के लोगों की नजर अब जांच रिपोर्ट पर टिकी है।
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