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मुख्यमंत्री मनोहर लाल के प्रधान सचिव रह चुके कौशल
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चंडीगढ़। हरियाणा के नए मुख्य सचिव संजीव कौशल भाजपा सरकार के पहले कार्यकाल में मुख्यमंत्री मनोहर लाल के प्रधान सचिव रह चुके हैं। मनोहर सरकार के कार्यकाल में कौशल पांचवें मुख्य सचिव हैं। दसवीं कक्षा में वह पंजाब में टॉप कर गोल्ड मेडल हासिल कर चुके हैं। बीएससी नॉन मेडिकल में भी उन्हें गोल्ड मेडल मिला है। वह 1987-88 में मदुरै में सहायक कलेक्टर प्रशिक्षण व 1988-90 में कोयंबटुर में सब-कलेक्टर पद सेवाएं दे चुके हैं।
डीसी से लेकर वित्तायुक्त जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कौशल ने अपनी कार्यशैली की अमिट छाप छोड़ी है। हंसमुख व मृदु स्वभाव के अधिकारी कौशल कनिष्ठ व वरिष्ठ अधिकारियों, कर्मचारियों के साथ टीम के रूप में काम करते हैं। उनकी इस कला से सभी कायल हैं। वह भारत सरकार में संयुक्त सचिव रहे हैं। उन्हें हरियाणा के सबसे बड़े नगर निगम फरीदाबाद में आयुक्त की जिम्मेदारी के साथ फरीदाबाद के मुख्य प्रशासक के रूप में काम करने का अनुभव है।
वह वर्ष 1990-91 में हरियाणा में फरीदाबाद के अतिरिक्त उपायुक्त रहे।1993-94 में हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक के रूप में सेवाएं दी। 1994-96 तक यमुनानगर के डीसी का दायित्व निभाया।
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वर्ष 1999 से 2001 तक प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव और सूचना ,जनसंपर्क एवं सांस्कृतिक मामले विभाग के निदेशक रहे।
2003-04 के दौरान केंद्र सरकार में तत्कालीन केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री के निजी सचिव व वर्ष 2004-07 तक भारत सरकार के लघु उद्योग विभाग में संयुक्त विकास आयुक्त एवं वर्ष 2007-08 में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय में अतिरिक्त विकास आयुक्त व संयुक्त विकास आयुक्त के तौर पर कार्य किया है।
28 मई 2012 से 12 जुलाई 2013 तक वित्त और योजना विभाग में वित्त आयुक्त और प्रमुख सचिव और 12 जुलाई 2013 से 30 अक्टूबर 2014 तक पीडब्ल्यू (बी. एंड आर) और वास्तुकला विभाग में प्रधान सचिव के रूप में कार्य किया। उन्हें 30 अक्तूबर 2014 को हरियाणा के मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव की जिम्मेवारी सौंपी गई। हालांकि, कुछ समय बाद वह सीएमओ से बाहर हो गए।
गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर से बीएससी (नॉन-मेडिकल) में गोल्ड मेडल के साथ ही वह लोक प्रशासन व अर्थशास्त्र में परास्नातक हैं। संजीव कौशल ने अपने सेवाकाल के दौरान विभिन्न कोर्स व प्रशिक्षण प्राप्त किए ताकि सरकारी काम-काज में सुविधा हो सके और जनता को उनकी सेवाओं का लाभ मिले।
कौशल ने लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में नवोदित और मध्यम स्तर के आईएएस अधिकारियों को रिसोर्स फैकल्टी के तौर पर मागदर्शन किया। वह केंद्र सरकार की ओर से ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात, चीन तथा बहरीन देश में जाने वाले औद्योगिक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर चुेक हैं। कौशल को विचारों का पॉवरफुल जनरेटर तथा कम्यूनिकेटर कहा जाता है। बड़ी परियोजनाओं के प्रबंधन के गुण के साथ ही वह राजनीतिक व प्रशासनिक तालमेल की क्षमता रखते हैं।
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डीसी से लेकर वित्तायुक्त जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कौशल ने अपनी कार्यशैली की अमिट छाप छोड़ी है। हंसमुख व मृदु स्वभाव के अधिकारी कौशल कनिष्ठ व वरिष्ठ अधिकारियों, कर्मचारियों के साथ टीम के रूप में काम करते हैं। उनकी इस कला से सभी कायल हैं। वह भारत सरकार में संयुक्त सचिव रहे हैं। उन्हें हरियाणा के सबसे बड़े नगर निगम फरीदाबाद में आयुक्त की जिम्मेदारी के साथ फरीदाबाद के मुख्य प्रशासक के रूप में काम करने का अनुभव है।
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वह वर्ष 1990-91 में हरियाणा में फरीदाबाद के अतिरिक्त उपायुक्त रहे।1993-94 में हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक के रूप में सेवाएं दी। 1994-96 तक यमुनानगर के डीसी का दायित्व निभाया।
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वर्ष 1999 से 2001 तक प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव और सूचना ,जनसंपर्क एवं सांस्कृतिक मामले विभाग के निदेशक रहे।
2003-04 के दौरान केंद्र सरकार में तत्कालीन केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री के निजी सचिव व वर्ष 2004-07 तक भारत सरकार के लघु उद्योग विभाग में संयुक्त विकास आयुक्त एवं वर्ष 2007-08 में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय में अतिरिक्त विकास आयुक्त व संयुक्त विकास आयुक्त के तौर पर कार्य किया है।
28 मई 2012 से 12 जुलाई 2013 तक वित्त और योजना विभाग में वित्त आयुक्त और प्रमुख सचिव और 12 जुलाई 2013 से 30 अक्टूबर 2014 तक पीडब्ल्यू (बी. एंड आर) और वास्तुकला विभाग में प्रधान सचिव के रूप में कार्य किया। उन्हें 30 अक्तूबर 2014 को हरियाणा के मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव की जिम्मेवारी सौंपी गई। हालांकि, कुछ समय बाद वह सीएमओ से बाहर हो गए।
गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर से बीएससी (नॉन-मेडिकल) में गोल्ड मेडल के साथ ही वह लोक प्रशासन व अर्थशास्त्र में परास्नातक हैं। संजीव कौशल ने अपने सेवाकाल के दौरान विभिन्न कोर्स व प्रशिक्षण प्राप्त किए ताकि सरकारी काम-काज में सुविधा हो सके और जनता को उनकी सेवाओं का लाभ मिले।
कौशल ने लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में नवोदित और मध्यम स्तर के आईएएस अधिकारियों को रिसोर्स फैकल्टी के तौर पर मागदर्शन किया। वह केंद्र सरकार की ओर से ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात, चीन तथा बहरीन देश में जाने वाले औद्योगिक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर चुेक हैं। कौशल को विचारों का पॉवरफुल जनरेटर तथा कम्यूनिकेटर कहा जाता है। बड़ी परियोजनाओं के प्रबंधन के गुण के साथ ही वह राजनीतिक व प्रशासनिक तालमेल की क्षमता रखते हैं।